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मधुशाला की कहानी

मधुशाला की कहानी

Duration

3hr 37m

Language

Hindi

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Category

Hindi Shows

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अपने सीधे सरल शब्दों को कविता में पिरोकर साहित्य रसिकों को 'काव्य रस' देने वाले हिंदी के सुप्रसिद्ध कवि डॉ. हरिवंश राय ने पूरे साहित्य जगत् पर अपनी अलग और अमिट छाप छोड़ी। जिन व्यक्तियों की रुचि साहित्य या काव्य में न भी रही हो, उन्होंने भी अपने जीवन में कभी न कभी 'मधुशाला' की रुबाइयाँ ज़रूर गुनगुनायी होंगी। प्रेम, सौहार्द और मस्ती की कविताओं के ज़रिये हरिवंशराय बच्चन हमेशा से कविता-प्रेमियों को अपनी ओर आकृष्ट करते आए हैं। सीधे और सरल शब्दों में मन के भीतर उतर जाना उन्हें अच्छे से आता है। 'मधुशाला', 'जो बीत गयी सो बात गयी', 'अग्निपथ' और 'इस पार उस पार' जैसी कविताएं आज भी जब किसी मंच पर पढ़ी जाती हैं तो श्रोता मुग्ध हुए बिना नहीं रह पाते। 'मधुशाला' से ज़्यादा लोकप्रिय किताब शायद ही हिन्दी काव्य में कोई दूसरी होगी। पेश है 'मधुशाला' से चुनिंदा रूबाइयां-

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पहला परिचय

1 - पहला परिचय

13 min 11 sec

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मिडनाइट इन पेरिस

2 - मिडनाइट इन पेरिस

13 min 16 sec

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होली दिवाली

3 - होली दिवाली

13 min 15 sec

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यिन एंड यैंग

4 - यिन एंड यैंग

13 min 19 sec

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मंदिर मस्जिद

5 - मंदिर मस्जिद

13 min 19 sec

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बाला

6 - बाला

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पहली बार

7 - पहली बार

12 min 45 sec

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राग और आग

8 - राग और आग

13 min 27 sec

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मैं जवान हूँ

9 - मैं जवान हूँ

13 min 16 sec

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कलम और तलवार

10 - कलम और तलवार

13 min 32 sec

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मधुशाला की कहानी

Hindi Shows|Hindi|16 Episodes
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About Show

अपने सीधे सरल शब्दों को कविता में पिरोकर साहित्य रसिकों को 'काव्य रस' देने वाले हिंदी के सुप्रसिद्ध कवि डॉ. हरिवंश राय ने पूरे साहित्य जगत् पर अपनी अलग और अमिट छाप छोड़ी। जिन व्यक्तियों की रुचि साहित्य या काव्य में न भी रही हो, उन्होंने भी अपने जीवन में कभी न कभी 'मधुशाला' की रुबाइयाँ ज़रूर गुनगुनायी होंगी। प्रेम, सौहार्द और मस्ती की कविताओं के ज़रिये हरिवंशराय बच्चन हमेशा से कविता-प्रेमियों को अपनी ओर आकृष्ट करते आए हैं। सीधे और सरल शब्दों में मन के भीतर उतर जाना उन्हें अच्छे से आता है। 'मधुशाला', 'जो बीत गयी सो बात गयी', 'अग्निपथ' और 'इस पार उस पार' जैसी कविताएं आज भी जब किसी मंच पर पढ़ी जाती हैं तो श्रोता मुग्ध हुए बिना नहीं रह पाते। 'मधुशाला' से ज़्यादा लोकप्रिय किताब शायद ही हिन्दी काव्य में कोई दूसरी होगी। पेश है 'मधुशाला' से चुनिंदा रूबाइयां-

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पहला परिचय

1 . पहला परिचय

मधुशाला पहली बार सन 1935 में प्रकाशित हुई थी। कवि सम्मेलनों में मधुशाला की रूबाइयों के पाठ से हरिवंश राय बच्चन को काफी प्रसिद्धि मिली और मधुशाला खूब बिका। हर साल उसके दो-तीन संस्करण छपते गए। मधुशाला की हर रूबाई मधुशाला शब्द से समाप्त होती है। हरिवंश राय 'बच्चन' ने मधु, मदिरा, हाला (शराब), साकी (शराब पड़ोसने वाली), प्याला (कप या ग्लास), मधुशाला और मदिरालय की मदद से जीवन की जटिलताओं के विश्लेषण का प्रयास किया है। मधुशाला जब पहली बार प्रकाशित हुई तो शराब की प्रशंसा के लिए कई लोगों ने उनकी आलोचना की। बच्चन की आत्मकथा के अनुसार, महात्मा गांधी ने मधुशाला का पाठ सुनकर कहा कि मधुशाला की आलोचना ठीक नहीं है। मधुशाला बच्चन की रचना-त्रय 'मधुबाला' और 'मधुकलश' का हिस्सा है जो उमर खैय्याम की रूबाइयां से प्रेरित है। उमर खैय्याम की रूबाइयां को हरिवंश राय बच्चन मधुशाला के प्रकाशन से पहले ही हिंदी में अनुवाद कर चुके थे। मधुशाला की रचना के कारण श्री बच्चन को " हालावाद का पुरोधा " भी कहा जाता है।

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मिडनाइट इन पेरिस

2 . मिडनाइट इन पेरिस

इस एपिसोड में सुनिए की हरिवंश राय बच्चन की 'मधुशाला' किस तरह मशहूर अंतराष्ट्रीय फिल्म 'मिडनाइट इन पेरिस' से जुड़ी हुई है।

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होली दिवाली

3 . होली दिवाली

इस एपिसोड में सुनिए बच्चन साहब और अमिताभ बच्चन से जुड़े किस्सों के बारे में जान बच्चन साहब अमिताभ बच्चन के साथ बैठकर मधुशाला पढ़ते और उन्हें उसकी पंक्तियों का अर्थ समझाते।

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13 min 15 sec

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यिन एंड यैंग

4 . यिन एंड यैंग

इस एपिसोड में सुनिए मधुशाला से जुड़ा एक महत्वपूर्ण किस्सा। वो किस्सा जब मधुशाला ने एक किताब का रूप लेने की शुरूआत की थी।

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मंदिर मस्जिद

5 . मंदिर मस्जिद

मंदिर - मस्जिद, हिन्दू - मुसलमान को एक करती है मधुशाला। बच्चन साहब का यही मानना था। अपनी इसी सोच को उन्होंने मधुशाला की कुछ पंक्तियों में भी उतारा जिसे स्वयं महात्मा गांधी ने भी पसंद किया था। चलिए सुनते है हिन्दू-मुसलमान को एक करती बच्चन साहब की ये कविता।

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बाला

6 . बाला

मधुशाला ने लोगों से जितना प्यार बटोरा उतनी ही आलोचना भी बटोरी। अक्सर लोग अपनी रचनाओं को मिली आलोचना का जवाब देते हैं, लेकिन बच्चन साहब ऐसा नहीं करते थे। उन्होंने इन आलोचना का जवाब देते हुए एक कविता लिखी थी जिसका नाम था बाला। बाला मधुबाला का ही एक प्रमुख हिस्सा थी और पाठकों द्वारा बेहद पसंद भी की गई थी।

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पहली बार

7 . पहली बार

आज बात करते हैं उस सभा की जब पहली बार बच्चन साहब ने मधुशाला सुनाई थी। जानिए कैसा था वो पल जब भरी सभा में बच्चन साहब ने मधुशाला पढ़ने की शुरुआत की थी।

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राग और आग

8 . राग और आग

इस एपिसोड में जानिए हरिवंश राय बच्चन और तेजी बच्चन की भारत की कोकिला सरोजिनी नायडू के साथ रही पहली मुलाक़ात के बारे में।

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13 min 27 sec

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मैं जवान हूँ

9 . मैं जवान हूँ

इस एपिसोड में सुनिए हरिवंश राय जी की एक ऐसी कविता जिसमें वे अपने आप का इंट्रोडक्शन देते हुए नज़र आ रहे हैं, ऐसा हास्यपद इंट्रोडक्शन आपने कभी नहीं सुना होगा।

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कलम और तलवार

10 . कलम और तलवार

हरिवंश राय बच्चन को UTC यानी यूनिवर्सिटी ट्रेनिंग कॉर्प्स के तहत बंदूक चलाने का अनुभव मिला था। 1917 में ब्रिटिश राज में इंडियन डिफेंस एक्ट 1917 पास हुआ था, जिसे 1920 से लागू किया गया. इस एक्ट के तहत यूनिवर्सिटी कॉर्प्स को UTC में बदला गया जिसका मकसद था, ब्रिटिश फौजों में समय पड़ने पर सैनिकों की कमी न पड़े इसलिए छात्र जीवन में आर्मी ट्रेनिंग देकर फौजी तैयार किए जाएं। चूंकि पहला विश्व युद्ध बीत चुका था इसलिए आने वाले युद्ध समय की तैयारी ब्रिटिशों ने इस तरह की थी। यूनिवर्सिटियों में इस ट्रेनिंग के दौरान छात्रों को आर्मी जैसी ड्रेस दी जाती थी। समय के साथ इस संगठन में बदलाव हुआ और 1942 में इसे UOTC यानी यूनिवर्सिटी ऑफिसर्स ट्रेनिंग कॉर्प्स के रूप में बदला गया।

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13 min 32 sec

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