Logo
Logo
mic
Download
मैं शायर तो नहीं – सीज़न २

मैं शायर तो नहीं – सीज़न २

Duration

2hr 34m

Language

Urdu

Released

Category

People

Like

Favorite

like

Review

play

Play

share

Share

उर्दू साहित्य में बड़े से बड़े शायरों ने इश्क, दुनिया, दोस्ती, असबाब, गम, बेवफाई, रुसवाई सहित कई पहलुओं पर अपनी शेर, शायरी, नज़्म और ग़ज़लें लिखी हैं। 'मैं शायर तो नहीं' शो के माध्यम से हम आपको उर्दू साहित्य के उन शायरों के जीवनी के बारे में बताएंगे जिन्होंने उर्दू साहित्य और कला का नाम विश्वभर में ऊंचा किया है। ये वो शायर हैं जिनके कलाम लोग आज भी सुनना पसंद करते हैं। बच्चा हो या बूढ़ा, साहित्य और कला का हर एक कदरदान, इन शायरों को हमेशा याद करता है। आइये, आप और हम भी मिलकर इन शायरों को फिर एक बार याद करें।

Read More

कैफ़ी आज़मी - भाग १

1 - कैफ़ी आज़मी - भाग १

04 min 45 sec

Like

7

play...

Episode info

info

Share Episode

share
कैफ़ी आज़मी - भाग २

2 - कैफ़ी आज़मी - भाग २

04 min 07 sec

Like

2

play...

Episode info

info

Share Episode

share
कैफ़ी आज़मी - भाग ३

3 - कैफ़ी आज़मी - भाग ३

03 min 50 sec

Like

4

play...

Episode info

info

Share Episode

share
कैफ़ी आज़मी - भाग ४

4 - कैफ़ी आज़मी - भाग ४

05 min 39 sec

Like

1

play...

Episode info

info

Share Episode

share
कैफ़ी आज़मी - भाग ५

5 - कैफ़ी आज़मी - भाग ५

04 min 01 sec

Like

0

play...

Episode info

info

Share Episode

share
मजरूह सुल्तानपुरी - भाग १

6 - मजरूह सुल्तानपुरी - भाग १

07 min 58 sec

Like

3

play...

Episode info

info

Share Episode

share
मजरूह सुल्तानपुरी - भाग २

7 - मजरूह सुल्तानपुरी - भाग २

08 min 33 sec

Like

0

play...

Episode info

info

Share Episode

share
मजरूह सुल्तानपुरी - भाग ३

8 - मजरूह सुल्तानपुरी - भाग ३

08 min 33 sec

Like

0

play...

Episode info

info

Share Episode

share
मजरूह सुल्तानपुरी - भाग ४

9 - मजरूह सुल्तानपुरी - भाग ४

08 min 06 sec

Like

3

play...

Episode info

info

Share Episode

share
मजरूह सुल्तानपुरी - भाग ५

10 - मजरूह सुल्तानपुरी - भाग ५

06 min 55 sec

Like

0

play...

Episode info

info

Share Episode

share

मैं शायर तो नहीं – सीज़न २

People|Urdu|25 Episodes
Like
share
like

About Show

उर्दू साहित्य में बड़े से बड़े शायरों ने इश्क, दुनिया, दोस्ती, असबाब, गम, बेवफाई, रुसवाई सहित कई पहलुओं पर अपनी शेर, शायरी, नज़्म और ग़ज़लें लिखी हैं। 'मैं शायर तो नहीं' शो के माध्यम से हम आपको उर्दू साहित्य के उन शायरों के जीवनी के बारे में बताएंगे जिन्होंने उर्दू साहित्य और कला का नाम विश्वभर में ऊंचा किया है। ये वो शायर हैं जिनके कलाम लोग आज भी सुनना पसंद करते हैं। बच्चा हो या बूढ़ा, साहित्य और कला का हर एक कदरदान, इन शायरों को हमेशा याद करता है। आइये, आप और हम भी मिलकर इन शायरों को फिर एक बार याद करें।

....Loading

EpisodesDuration
कैफ़ी आज़मी - भाग १

1 . कैफ़ी आज़मी - भाग १

कैफी आज़मी का असली नाम अख्तर हुसैन रिजवी था। उत्तरप्रदेश के आजमगढ़ जिले के छोटे से गांव मिजवां में 14 जनवरी 1919 में जन्मे। गांव के भोलेभाले माहौल में कविताएं पढ़ने का शौक लगा। भाइयों ने प्रोत्साहित किया तो खुद भी लिखने लगे। 11 साल की उम्र में उन्होंने अपनी पहली गज़ल लिखी। ‘कैफ़ी आज़मी’ एक ऐसा नाम जिसे आप उसकी नज़्मों से, उसकी शायरी से जानते हैं। जो सिर्फ अपनी नज़्मों तक ही प्रगतिशील नहीं बल्कि अपनी ज़िंदगी में भी उतना ही प्रोग्रेसिव रहा। उन्होंने गरीब-अमीर के बराबरी की बात की, उन्होंने औरत-मर्द के बराबरी की बात की। इस बराबरी को लगातार अपनी नज़्मों के जरिए लोगों तक पहुंचाते रहे। ज़मींदार घराने से सम्बन्ध रखने के बावज़ूद कैफ़ी ने अपनी ज़िन्दगी में दोनों रंग देखे। आज हम आपके लिए उनके जीवन के इन्ही रंगों को बिखेरने वाले हैं।

More

04 min 45 sec

play

share

कैफ़ी आज़मी - भाग २

2 . कैफ़ी आज़मी - भाग २

कैफ़ी आज़मी हिंदी-उर्दू साहित्य के एक प्रमुख शायर थे। कैफ़ी जी अपने शेर और नाटक, दोनों के लिए ही बहुत लोकप्रिय थे। इस कार्यक्रम में उनकी ज़िन्दगी से जुड़े किस्सो पर चर्चा की गयी है।

More

04 min 07 sec

play

share

कैफ़ी आज़मी - भाग ३

3 . कैफ़ी आज़मी - भाग ३

कैफ़ी आज़मी ने फिल्मों के गाने भी लिखे.। 'गर्म हवा’ जैसी फिल्मों को भला कौन भूल सकता है? हीर-रांझा’ के संवाद के लिए उनको फिल्म फेयर अवार्ड से नवाजा गया। उन्होंने फ़िल्मी दुनिया में अपनी खास जगह बनाई और अमर नग्में लिखे।

More

03 min 50 sec

play

share

कैफ़ी आज़मी - भाग ४

4 . कैफ़ी आज़मी - भाग ४

कैफ़ी आज़मी साहब के लिखीं कागज के फूल, शमा, शोला और शबनम , हीर-रांझा, अनुपमा, इत्यादि फिल्मों के गाने बहुत मशहूर हुए। लेकिन फिल्म चल नहीं पा रहीं थीं फिल्म इंडस्ट्री ने उनसे परहेज़ करना शुरू कर दिया था।

More

05 min 39 sec

play

share

कैफ़ी आज़मी - भाग ५

5 . कैफ़ी आज़मी - भाग ५

क़ैफ़ी आज़मी को राष्ट्रीय पुरस्कार के अलावा कई बार फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला। १९७४ में भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया। कैफ़ी साहब की याद भुलाए नहीं भूलती उनसा कोई दूसरा कैफ़ी पैदा नहीं होगा।

More

04 min 01 sec

play

share

मजरूह सुल्तानपुरी - भाग १

6 . मजरूह सुल्तानपुरी - भाग १

मजरुह सुल्तानपुरी हिन्दी फिल्मों के एक प्रसिद्ध गीतकार और प्रगतिशील आंदोलन के उर्दू के सबसे बड़े शायरों में से एक थे। उन्होंने अपनी रचनाओं के जरिए देश, समाज और साहित्य को नई दिशा देने का काम किया। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा सुल्तानपुर जिले के गनपत सहाय कालेज में मजरुह सुल्तानपुरी ग़ज़ल के आइने में शीर्षक से मजरूह सुल्तानपुरी पर राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया। देश के प्रमुख विश्वविद्यालयों के शिक्षाविदों ने इस सेमिनार में हिस्सा लिया और कहा कि वे ऐसी शख्सियत थे जिन्होंने उर्दू को एक नयी ऊंचाई दी है। लखनऊ विश्वविद्यालय की उर्दू विभागाध्यक्ष डॉ॰सीमा रिज़वी की अध्यक्षता व गनपत सहाय कालेज की उर्दू विभागाध्यक्ष डॉ॰जेबा महमूद के संयोजन में राष्ट्रीय सेमिनार को सम्बोधित करते हुए इलाहाबाद विश्वविद्यालय के उर्दू विभागाध्यक्ष प्रो॰अली अहमद फातिमी ने कहा मजरूह, सुल्तानपुर में पैदा हुए और उनके शायरी में यहां की झलक साफ मिलती है। वे इस देश के ऐसे तरक्की पसंद शायर थे जिनकी वजह से उर्दू को नया मुकाम हासिल हुआ। उनकी मशहूर पंक्तियों में 'मै अकेला ही चला था, जानिबे मंजिल मगर लोग पास आते गये और कारवां बनता गया' का जिक्र भी वक्ताओं ने किया। लखनऊ विश्वविद्यालय के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो॰मलिक जादा मंजूर अहमद ने कहा कि यूजीसी ने मजरूह पर राष्ट्रीय सेमिनार उनकी जन्मस्थली सुल्तानपुर में आयोजित करके एक नयी दिशा दी है।

More

07 min 58 sec

play

share

मजरूह सुल्तानपुरी - भाग २

7 . मजरूह सुल्तानपुरी - भाग २

मजरूह सुलतानपुरी ने ग़ज़ल की क्लासिकी परंपरा में राजनीतिक प्रतीक बना कर साबित किया कि ग़ज़ल की विधा अपने तग़ज़्ज़ुल को त्याग किए बिना भी हर तरह के भावनाओं, संवेदनाओं और विचारों को प्रभावी और रोचक ढंग से व्यक्त करने की क्षमता रखती है।

More

08 min 33 sec

play

share

मजरूह सुल्तानपुरी - भाग ३

8 . मजरूह सुल्तानपुरी - भाग ३

मजरूह सुल्तानपुरी फ़िल्म में गीत लिखने के लिए राजी हो गए। संगीतकार नौशाद ने मजरूह सुल्तानपुरी को एक धुन सुनाई और उनसे उस धुन पर एक गीत लिखने को कहा। मजरूह ने उस धुन पर 'गेसू बिखराए, बादल आए झूम के' गीत की रचना की। शाहजहाँ फिल्म के लिखीं गई गीत 'जब दिल ही टूट गया' बेहद लोकप्रिय हुआ।

More

08 min 33 sec

play

share

मजरूह सुल्तानपुरी - भाग ४

9 . मजरूह सुल्तानपुरी - भाग ४

मजरूह सुल्तानपुरी की शायरी और फिल्मी नग्मों में जमीन से गहराई तक जुड़े उनके सरोकारों की छाप मिलती है। इसके अलावा, उन्होंने इश्क के तरानों को भी अपनी लेखनी से नए आयाम दिए हैं।

More

08 min 06 sec

play

share

मजरूह सुल्तानपुरी - भाग ५

10 . मजरूह सुल्तानपुरी - भाग ५

बुढ़ापे में वो फेफड़े की बीमारी से ग्रस्त हो गए थे। २४ मई २००० को बंबई के लीलावती अस्पताल में उनका देहांत हो गया। उनका ८० साल के जीवन काल में, उनका कभी ना भूला जाने वाला योगदान को न तो हम और न ही फिल्म जगत भूल सकता है।

More

06 min 55 sec

play

share

You may also like

Picture of the author

न ग़ुबार में न गुलाब में मुझे देखना

play
Picture of the author

लॉकडाउन, क्रिकेट की शुरुआत और निजी संघर्ष

play
Picture of the author

मेघा धाडे

play
Picture of the author

Jim Egan on The Master's Voice from MediaBrief.com

play
Picture of the author

ईद उल फ़ित्र

play
Picture of the author

अली सरदार जाफरी - मख़दूम पुरस्कार

play