पंचतत्व ध्वनी
Duration
2hr 28m
Language
Hindi
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Category
Music
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1 - भूमि
31 min 00 sec
21
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2 - जल
25 min 35 sec
4
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3 - अग्नि
30 min 21 sec
3
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4 - पवन
30 min 18 sec
3
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5 - आकाश
30 min 56 sec
5
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पंचतत्व ध्वनी
About Show
| Episodes | Duration | |||
1 . भूमिपंचतत्व की ध्वनी' का पहला तत्व 'पृथ्वी' है जिसे संस्कृत में 'भूमि' कहते है। यह तत्व एक व्यक्ति की पांच इंद्रियों को मिलाकर बनता है। जैसे, सुनना, स्पर्श करना, देखना, सूंघना और चखना। यहाँ पर 'पृथ्वी' का अर्थ है, हमारा शरीर जो मांसपेशियों और हड्डियों से बना हुआ है। More | 31 min 00 sec | |||
2 . जलपंचतत्व की ध्वनी' का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण तत्व 'पानी' है जिसे संस्कृत में 'जल' कहते है। इस तत्व को सूंघा नहीं जा सकता, लेकिन सुना, देखा, चखा और महसूस किया जा सकता है। यहां पर 'जल' का अर्थ है मानव शरीर में उपस्तिथ रक्त और अन्य तरल पदार्थ। More | 25 min 35 sec | |||
3 . अग्निमानव शरीर में अगला महत्वपूर्ण तत्व 'आग' है जिसे संस्कृत में 'अग्नि' ही कहते हैं। मानव शरीर के तापमान में, जठराग्नि को 'अग्नि' माना जाता है। इसे सुना, देखा और महसूस किया जा सकता है। More | 30 min 21 sec | |||
4 . पवनपंचतत्व की ध्वनी' का चौथा तत्व 'वायु' है जिसे संस्कृत में 'पवन' कहा जाता है। पवन को केवल सुना और महसूस किया जा सकता है। हवा को देखा नहीं जा सकता। मानव शरीर में 'पवन' का अर्थ है उसमे मौजूद ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड। यह तत्त्व प्राणायाम योग के लिए एक महत्वपूर्ण तत्त्व है। More | 30 min 18 sec | |||
5 . आकाशपंचतत्व की ध्वनी' का पांचवा और अंतिम तत्व 'स्पेस' है जिसे संस्कृत में 'आकाश' कहते है। किसी भी प्रकार की ध्वनि को पास करने के लिए 'आकाश' अबसे अच्छा माध्यम है। मानव शरीर में 'आकाश' का अर्थ 'आत्मा' है। More | 30 min 56 sec |
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