90s की यादें
Duration
0hr 53m
Language
Hindi
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Category
Entertainment
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1 - 90s वाला प्यार
05 min 17 sec
15
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2 - कागज़ की कश्ती
05 min 04 sec
6
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3 - क्रिकेट
03 min 59 sec
2
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4 - एंटीना
04 min 33 sec
4
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5 - स्कूटर
04 min 28 sec
4
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6 - 90s वाली खेल-कूद
05 min 20 sec
3
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7 - 90s वाला बर्थडे
06 min 08 sec
4
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8 - टेलीफोन वॉकमेन रेडियो
05 min 53 sec
2
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9 - अपनी पाठशाला
06 min 36 sec
5
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10 - गर्मियों की छुट्टी
05 min 55 sec
12
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90s की यादें
About Show
| Episodes | Duration | |||
1 . 90s वाला प्यार90 के दशक में प्यार करना और उसका इज़हार करना इतना आसान नहीं हुआ करता था। मैसेज और चैटिंग तो कोई सोच भी नहीं सकता था। वैसे प्यार है ही बड़ा पेचीदा, कब, किससे हो जाए, कोई कह नहीं सकता। जब कोई प्यार में होता है तो वो अपने प्रेमी को अपनी भावना व्यक्त करने के बहाने ढूंढता रहता है। आजकल सोशल मीडिया ने इस पूरी प्रक्रिया को आसान बना दिया है। आज ये सोचकर हंसी आ सकती है कि कैसे 90 के दशक में प्रेमी प्यार को पाने के लिए मशक्कत करते थे। तब सोशल मीडिया और इंटरनेट तो था नहीं, लिहाजा तरीके बेहद अटपटे लगते थे, लेकिन उतने ही प्यारे भी थे। More | 05 min 17 sec | |||
2 . कागज़ की कश्तीबारिश के पानी में कागज की कश्ती तैराने का मजा जो उस जमाने में आता था वो अब कहां? 90 के दशक में बचपन दोस्तों के साथ की गई सारी मस्ती और शरारतों में से ये एक हुआ करती थी। ये तो सबने जरुर किया होगा। पहली बारिश के गिरते ही अपने सारे दोस्तों को इक्कट्ठा कर घंटो तक भीगना और फिर सफ़ेद पेपर की नाव बनाना और फिर उसे तैराना। वो दिन भी क्या दिन थे। More | 05 min 04 sec | |||
3 . क्रिकेट90s के दशक में भारतीय क्रिकेट टीम के पास सचिन तेंडुलकर, सौरव गांगुली, अजहरुद्दीन और राहुल द्रविड़ जैसे स्टार क्रिकेटर्स से। इसे सचिन तेंडुलकर के करियर का भी गोल्डन दौर कहा जाता है। उस वक्त सचिन अपनी बैटिंग से पूरी दुनिया में छा गए थे। उनके करियर के कुछ बेस्ट मोमेंट्स की बात करें तो, 24 अप्रैल को 25वें बर्थडे पर लगाई गई सेन्चुरी शायद ही कोई क्रिकेट फैन भूला हो। आइये 90s के दशक में भारतीय क्रिकेट के कुछ और ख़ास पलों को याद करें। More | 03 min 59 sec | |||
4 . एंटीना90s में टीवी देखने के लिए रोज़ एंटीना फिक्स करना पड़ता था, क्योंकि अगर कौवा बैठ गया, या ज़ोर से हवा चल गई तो एंटीना हिल जाता था और पिक्चर फिर क्लियर नहीं आती थी। तब कौवे भी होते थें, एंटीना के साथ; अब वो भी गायब हो गए हैं। एंटीना ठीक करने के लिए तीन लोगों की जरूरत पड़ती थी, एक जो छत पर चढके एंटीना घुमाएगा, दूसरा आंगन में मीडियेटर का काम करेगा और तीसरा टीवी के पास, ठीक होने की सूचना देगा। छत से आवाज़ आती, "आया क्या?", तो अंदर से आवाज आती, "अभीनहीं, थोड़ा और घुमाओ; बस-बस आ गया।" More | 04 min 33 sec | |||
5 . स्कूटरस्कूटर भले ही अब इतिहास बनने के कगार पर हो, लेकिन 90 के दशक की ये शान हुआ करता था। हर मिडिल क्लास वाले घरों में ये शान की सवारी हुआ करती थी। स्कूटर एक मल्टी टास्किंग व्हीकल था। बच्चों को स्कूल छोड़ना हो, घर के =लिए गैस सिलेंडर लाना हो या फिर कहीं घूमने जाना हो। स्कूटर हर जगह साथ देता था। More | 04 min 28 sec | |||
6 . 90s वाली खेल-कूदआज के दौर की तरह 90s में मशीने हमारा मनोरंजन नहीं किया करती थी, बल्कि बच्चे घर के बाहर निकलकर, साथ मिलकर अपने दोस्तों के साथ घंटों ग्राउंड में अलग-अलग खेल खेला करते थे। इधर से उधर दौड़ते रहते थे। एक दूसरे के साथ बैठते थे। उस दौर के बच्चों को जो आनंद आता था वह अब नामुमकिन लगता है। आइए फिर याद करें उन खेलों को जिन्होंने हमारे बचपन को सुनहरा बना दिया। इनमें से कुछ आज के बच्चों को पता है, वहीं कुछ अब बिल्कुल ही गायब हो चुके हैं। More | 05 min 20 sec | |||
7 . 90s वाला बर्थडेउस ज़माने में किसी भी दोस्त का बर्थडे हो, एक्साइटमेंट ऐसी होती थी मानो अपना ही बर्थडे हो। फिर केक काटने के बाद जब प्लेट में आंटी समोसा, आलू की चिप्स और केक का टुकड़ा प्लेट में रखती थी, तो वो डिश दुनिया की सबसे अच्छी दावत लगती थी। आज कल तो जन्मदिन सिर्फ होटलों में पार्टी करने तक ही सिमित रह गया है। काश वो जन्मदिन वापस आ सकते हैं। More | 06 min 08 sec | |||
8 . टेलीफोन वॉकमेन रेडियोउस ज़माने में अगर किसी बच्चे के पास वॉकमैन या रेडियो होता तो बाकि बच्चे उसे ऐसे देखते थे मानों उसके पास कोई बहुत अनमोल चीज़ हो और सारे बच्चे उसके आसपास जमा हो जाते थे। गाना सुनने के लिए ये तब का सबसे लोकप्रिय साधन थे। लोग अक्सर वॉकमैन के साथ मॉर्निंग वॉक भी करते थे, जैसे आजकल स्मार्टफोन के साथ करते हैं। और लैंडलाइन फोन, वो तो जैसे अब इतिहास बन गया है। उस ज़माने में लैंडलाइन को सबसे अहम चीज़ मानी जाती थी। इतना ही नहीं, जिसके घर में फोन नहीं होता था वो पड़ोसी के घर का नंबर दे जाता था। यानी तब ये लैंडलाइन पड़ोसियों से भी रिश्ते मज़बूत करने के काम आता था। More | 05 min 53 sec | |||
9 . अपनी पाठशालास्कूल लाइफ 90 के दशक के बच्चों का सबसे सुनहरा दौर था। स्कूल की यादें ज़िन्दगी का वो हिस्सा होती है, जिसकी कीमत उसके चले जाने के बाद पता चलती है। 90 के दशक के छात्र शायद आखिरी पीढ़ी थे जिन्होंने दोस्तों के साथ खेलने में समय बिताया और मोबाइल गेम्स पर नहीं। उन बच्चों के स्कूल के दोस्त होते थे, फेसबुक के नहीं। वे सही मायने में अपने बचपन को जीते थे। इन दिनों, बाहर खेलना के बजाय बच्चे टेक्सटिंग में, वीडियो गेम खेलने में और इंटरनेट पर सर्फिंग में मज़ा ढूंढते हैं। सोशल मीडिया लाइफ और डिजिटल नेटवर्किंग के हटकर 90s के स्कूल लाइफ की हमारे पास बहुत अच्छी यादें हैं। More | 06 min 36 sec | |||
10 . गर्मियों की छुट्टीगर्मी की छुट्टियाँ किसी भी बच्चे को बहुत अच्छी लगती हैं। बच्चों के लिए विद्यालय की ओर से यह बहुत ही अच्छा उपहार होता है। गर्मी की छुट्टियों का नाम सुनते ही कई विचार दिमाग में आने लगते हैं। हर एक बच्चा इसे अपने-अपने तरीके से बिताता है। बहुत सारी पढ़ाई के बाद इन गर्मी और आलस भरे दिनों में जब घर से बाहर निकलने का मन नहीं करता तो गर्मी की छुट्टिया ही हैं जो बच्चों को आराम पहुँचाती है। घर में पंखे या कूलर की हवा में आराम से बैठना या फिर गाँव जाकर अपने साथियों के साथ पेड़ की ठहनियों पर चढ़कर कच्चे आम खाना। शायद इसलिए गर्मी की छुट्टियाँ ज़िन्दगी भर यादगार रहती है। More | 05 min 55 sec |
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