मैं शायर तो नहीं
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2hr 19m
Language
Urdu
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Urdu Shows
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1 - परवीन शाकिर- भाग १
06 min 32 sec
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2 - परवीन शाकिर- भाग २
06 min 53 sec
2
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3 - परवीन शाकिर - भाग ३
06 min 27 sec
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4 - परवीन शाकिर - भाग ४
07 min 03 sec
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5 - परवीन शाकिर - भाग ५
06 min 38 sec
2
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6 - मुनव्वर राना - भाग १
04 min 42 sec
3
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7 - मुनव्वर राना - भाग २
06 min 13 sec
1
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8 - मुनव्वर राना - भाग ३
06 min 16 sec
1
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9 - मुनव्वर राना - भाग ४
06 min 17 sec
2
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10 - मुनव्वर राना - भाग ५
05 min 49 sec
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मैं शायर तो नहीं
About Show
| Episodes | Duration | |||
1 . परवीन शाकिर- भाग १सैयदा परवीन शाकिर एक उर्दू कवयित्री, शिक्षिका और पाकिस्तान की सरकार की सिविल सेवा में एक अधिकारी थीं। इनकी प्रमुख कृतियाँ खुली आँखों में सपना, ख़ुशबू, सदबर्ग, इन्कार, रहमतों की बारिश, ख़ुद-कलामी, इंकार(१९९०), माह-ए-तमाम (१९९४) आदि हैं। वे उर्दू शायरी में एक युग का प्रतिनिधित्व करती हैं। उनकी शायरी का केन्द्रबिंदु स्त्री रहा है। फ़हमीदा रियाज़ के अनुसार ये पाकिस्तान की उन कवयित्रियों में से एक हैं जिनके शेरों में लोकगीत की सादगी और लय भी है और क्लासिकी संगीत की नफ़ासत भी और नज़ाकत भी। उनकी नज़्में और ग़ज़लें भोलेपन और सॉफ़िस्टीकेशन का दिलआवेज़ संगम है। पाकिस्तान की इस मशहूर शायरा के बारे में कहा जाता है, कि जब उन्होंने 1982 में सेंट्रल सुपीरयर सर्विस की लिखित परीक्षा दी तो उस परीक्षा में उन्हीं पर एक सवाल पूछा गया था जिसे देखकर वह आत्मविभोर हो गयी थी। More | 06 min 32 sec | |||
2 . परवीन शाकिर- भाग २इस एपिसोड में सुनिए परवीन शाकिर जी के मोहब्बत पर लिखे गए कुछ बेहद खूबसूरत शेर। परवीन जी उन शायारों में से थी जो बेवफाई में भी मोहब्बत ढूंढ लेती हैं। प्यार, इकरार, तकरार ये सारे भाव उनकी शायरी में देखने को मिलते हैं। तो फिर आइये, हम भी सुनें उनकी ये शायरी। More | 06 min 53 sec | |||
3 . परवीन शाकिर - भाग ३परवीन शाकिर जी की शायरी का मुख्य केंद्र 'औरत' थी। एक टूटी, बिखरी, अकेली औरत, मगर एक खुद्दार औरत। उन्होंने अक्सर अपनी शायरी में औरतों के उन भावों को समेटा जो दुनियावालों के सामने शायद ही कभी आते हैं। एक औरत की तन्हाई, बेबसी, दिल्लगी और अकेलेपन को बहुत खुद शब्दों का रूप देती रही वो। तो चलिए, क्यों ना हम भी उनकी इन बेहतरीन शायरी का लुत्फ़ उठाएं। More | 06 min 27 sec | |||
4 . परवीन शाकिर - भाग ४जब लोग मोहब्बत में होते हैं, तो उनके मन में सैकड़ों भाव पैदा होते हैं जो वे आसानी से बयान नहीं कर पाते। लेकिन परवीन जी को उन भावों को बयान करना बखूबी आता था। वे बड़ी ही खूबसूरती से आशिक़ों और प्रेमियों के दिल में चल रही हलचल को अपने शब्दों में पिरो लेती थी। इसी के चलते वे हमे कुछ सुन्दर शायरी दे गयी हैं। आइये सुनते हैं मोहब्बत से भरी उनकी कुछ शायरी। More | 07 min 03 sec | |||
5 . परवीन शाकिर - भाग ५उर्दू शायरी की दुनिया में परवीन शाकिर जी का योगदान फूलों की तरह महकदार और खूबसूरत था। जिस तरह वो अपनी शायरी में आशिक़ी और उससे जुड़े तमाम एहसासों को ढालती थी, शायद ही कोई ढाल पाता था। उनके इसी यादगार योगदान को हमारा सलाम। More | 06 min 38 sec | |||
6 . मुनव्वर राना - भाग १मुनव्वर राना उर्दू भाषा के साहित्यकार हैं। इनके द्वारा रचित एक कविता शाहदाबा के लिये उन्हें सन् 2014 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। वे लखनऊ में रहते हैं। भारत-पाकिस्तान बंटवारे के समय उनके बहुत से नजदीकी रिश्तेदार और पारिवारिक सदस्य देश छोड़कर पाकिस्तान चले गए। लेकिन साम्प्रदायिक तनाव के बावजूद मुनव्वर राना के पिता ने अपने देश में रहने को ही अपना कर्तव्य माना। मुनव्वर राना की शुरुआती शिक्षा-दीक्षा कलकत्ता (नया नाम कोलकाता) में हुई। राना ने ग़ज़लों के अलावा संस्मरण भी लिखे हैं। उनके लेखन की लोकप्रियता का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनकी रचनाओं का ऊर्दू के अलावा अन्य भाषाओं में भी अनुवाद हुआ है। More | 04 min 42 sec | |||
7 . मुनव्वर राना - भाग २मुनव्वर राना साहब अपने समय के सबसे लोकप्रिय शायरों में से थे। उन्होंने उर्दू साहित्य को एक से बढ़कर एक सौगातें दी है। उनका कलाम एक से बढ़कर एक। हर इंसान के दिल का हाल मिलता है उनकी शायरी में माँ, ग़ज़ल, गाँव, पीपल छाँव, बदन सराय, नीम के फूल, सब उसके लिए, घर अकेला हो गया, कहो ज़िल्ले इलाही से, बग़ैर नक़्शे का मकान, फिर कबीर, नए मौसम के फूल उनकी कुछ बेहतरीन रचनाएं हैं। उनकी कोई भी शायरी सुन लीजिये, वाह-वाह किए बिना नहीं रह पाएंगे। More | 06 min 13 sec | |||
8 . मुनव्वर राना - भाग ३मैं एक फ़कीर के होठों की मुस्कराहट हूँ, किसी से भी मेरी कीमत अदा नहीं होती' मुनव्वर राना का ये कलाम उनकी खुद की शख्सियत को बखूबी दर्शाता है। तो क्यों ना आज आप और हम मिलकर इसी कलाम को सुने राना साहब की शख्सियत को थोड़ा और समझें। More | 06 min 16 sec | |||
9 . मुनव्वर राना - भाग ४ऐसा लगता है जैसे मुनव्वर राना साहब की शायरी अपनों के जुदाई के गम से तप कर निकली है। तभी, वो सीधे दिल को जा कर लगती है। ऐसी ही उनकी एक शायरी है 'माँ'। यह शायरी सुनकर ऐसा लगता है मानो उन्होंने अपने दिल में दबे सभी भावों को अपनी कलम की मदद से सबके सामने रख दिया हो। आइये, आज आप और हम मिलाकर सुनते हैं उनकी शायरी - 'माँ'। More | 06 min 17 sec | |||
10 . मुनव्वर राना - भाग ५मुनव्वर राना को उनकी रचनाओं के लिए ढेरों अवॉर्ड्स से सम्मानित भी किया गया है। अमीर ख़ुसरो अवार्ड 2006, मीर तक़ी मीर अवार्ड 2005, शहूद आलम आफकुई अवार्ड 2005, कोलकाता, ग़ालिब अवार्ड 2005, उदयपुर, डॉ॰ जाकिर हुसैन अवार्ड 2005, नई दिल्ली, सरस्वती समाज अवार्ड 2004, सलीम जाफरी अवार्ड 1997, दिलकुश अवार्ड 1995, भारती परिषद प्रयाग अवार्ड, इलाहाबाद, हुमायूँ कबीर अवार्ड, कोलकाता, सरस्वती समाज अवार्ड 2004, अदब अवार्ड 2004, मौलाना अबुल हसन नदवी अवार्ड, कबीर अवार्ड आदि। उनकी इस सफलता का प्रमाण उनकी शायरी बखूबी देती है। तो चलिए, सुनते हैं उनकी अवॉर्ड विनिंग शायरी। More | 05 min 49 sec |
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