बातें सितारों की - मोहम्मद रफ़ी
Duration
1hr 13m
Language
Hindi
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Category
Entertainment
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1 - पहली बार मिला गाने का मौका
07 min 46 sec
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2 - पंजाबी फिल्म में मिला पहला ब्रेक
06 min 29 sec
1
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3 - आवाज में बदलाव
07 min 46 sec
1
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4 - जब रफ़ी ने बिना देखें दान कर दिए सब
06 min 13 sec
1
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5 - अमरीकी कार इंपाला
07 min 52 sec
1
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6 - मोहम्मद रफी उसूलों के पक्के थे
07 min 34 sec
0
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7 - 1947 भारत के विभाजन का किस्सा
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8 - जब गले से निकला खून
07 min 57 sec
1
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9 - रफ़ी साहब का लाया गिफ्ट
07 min 14 sec
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10 - रफ़ी साहब और अमित जी का किस्सा
09 min 24 sec
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बातें सितारों की - मोहम्मद रफ़ी
About Show
| Episodes | Duration | |||
1 . पहली बार मिला गाने का मौका"ऑल इंडिया रेडियो लाहौर में उस समय के प्रख्यात गायक और अभिनेता कुन्दन लाल सहगल गाने के लिए आए हुए थे। रफी साहब और उनके बड़े बाई भी सहगल को सुनने के लिए गए थे। अचानक बिजली गुल हो जाने की वजह परफॉरमेंस में देरी हो गयी और उसी समय रफी के बड़े भाई साहब ने आयोजकों से निवेदन किया की भीड़ को शांत करने के लिए रफी को गाने का मौका दिया जाए। यह पहला मौका था जब मोहम्मद रफी ने लोगों के सामने गाया था। इस एपिसोड में हम सुनेंगे रफ़ी साहब के संगीत के सफर के बारे में। " More | 07 min 46 sec | |||
2 . पंजाबी फिल्म में मिला पहला ब्रेक"इस एपिसोड में हम सुनेंगे, मोहम्मद रफ़ी साहब के फिल्म संगीत करियर के सफर के बारे में। मात्र 13 साल की उम्र में रफी ने अपना पहला परफॉर्मेंस दिया था। आकाशवाणी लाहौर के लिए भी उन्होंने गाने गाए। पंजाबी फिल्मों में गाना गाने के बाद उन्होंने अपना पहला हिंदी गाना 1944 में गाया था फ़िल्म का नाम था ‘गांव की गोरी’ हालांकि इस गाने से रफी को कोई पहचान नहीं मिली। " More | 06 min 29 sec | |||
3 . आवाज में बदलाव"एक कार्यक्रम में मीडिया से बातचीत के दौरान जावेद अख्तर साहब ने कहा, ""दुनिया ने कई बड़े गायकों को देखा है, लेकिन आप एक पुरुष गायक का नाम नहीं ले सकते हैं, जिस अभिनेता के लिए वह गा रहा था, उसके अनुसार उसकी आवाज बदल गई""। एक ऐसे गायक थे मोहम्मद रफ़ी साहब जो अपनी आवाज और गायन की शैली में बदलाव किया करते थे ताकि अभिनेता को कैमरे के सामने गाने से लिप-सिंक किया जा सके। इस एपिसोड में हम सुनेंगे उनसे जुड़े कुछ ऐसे ही किस्से। " More | 07 min 46 sec | |||
4 . जब रफ़ी ने बिना देखें दान कर दिए सब"नौशाद साहब ने अपने फिल्मी करियर के दौरान एक से बढ़कर एक शानदार नगमे तैयार किए. एक दौर ऐसा था जब नौशाद साहब की धुन और मोहम्मद रफी की आवाज में गाना बनता तो वो गारंटी रहता था। इस एपिसोड में हम सुनेंगे, नौशाद साहब और मोहम्मद रफ़ी साहब से जुड़ा एक किस्सा और उनसे जुडी कुछ बातें। " More | 06 min 13 sec | |||
5 . अमरीकी कार इंपाला"इस एपिसोड में हम सुनेंगे, रफ़ी साहब को याद करते हुए उनसे जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा। रफ़ी साहब ने एक बार इंपोर्टेड अमरीकी कार इंपाला खरीदी थी। वो इंपोर्टेड कार, राइट हैंड ड्राइव वाली थी। उनका ड्राइवर सुल्तान राइट हैंड से ड्राइव करना नहीं जानता था। इसलिए रफ़ी साहब ने नया ड्राइवर ढूंढ़ना शुरू किया जो राइट हैंड ड्राइविंग जानता हो। उन्हें नया ड्राइवर तो मिल गया लेकिन उन्होंने अपने पुराने ड्राइवर को खाली हाथ नहीं जाने दिया। सुनते हैं, फिर क्या उन्होंने अपने पुराने ड्राइवर के लिए किया। " More | 07 min 52 sec | |||
6 . मोहम्मद रफी उसूलों के पक्के थे"इस एपिसोड में हम सुनेंगे, जितेंद्र कपूर द्वारा कहा मोहम्मद रफी से जुड़ा एक किस्सा। मोहम्मद रफी साहब सीधा सादा जीवन व्यतीत करने वाले व्यक्ति थे। रफी ने जब जितेंद्र द्वारा भेजी ज्यादा राशि देखी तो उन्होंने 4 हजार रुपए अपना मेहनताना लेते हुए बाकी 16 हजार की रकम जितेंद्र को यह कहते हुए लौटा दी कि जित्ते !! तेरे पास पैसे ज्यादा हो गए हैं क्या... तो चलिए सुनते हैं, इस किस्से को विस्तार में। " More | 07 min 34 sec | |||
7 . 1947 भारत के विभाजन का किस्सा"1947 में भारत के विभाजन के दौरान हुए दंगों में अपने माता-पिता को गंवाने के बाद बशिरा ने भारत छोड़ने का फैसला ले लिया था। वह भारत में नहीं रहना चाहती थीं। वह लाहौर में जाकर बस गई थीं, जबकि गायकी में अपना करियर बना रहे मोहम्मद रफी ने भारत में ही रहने का फैसला लिया था। इस एपिसोड में हम सुनेंगे, मोहम्मद रफी के बारे में वह किस्सा जो भारत के विभाजन के दौरान घटा था। " More | 05 min 17 sec | |||
8 . जब गले से निकला खून"‘नौशादनामा: द लाइफ एंड म्यूजिक ऑफ नौशाद’ में मोहम्मद रफी से जुड़ा एक बहुत ही रोचक किस्सा लिखा है। ‘ओ दुनिया के रखवाले’ (फिल्म बैजू बावरा) गाने के लिए रफी ने कड़ी मेहनत की थी। करीब 15 दिनों तक और कई घंटों तक रियाज करने की वजह से उनके गले में कई परेशानियां हो गई थीं। कई दिनों की लगातार मेहनत के बाद यह गाना पूरा हुआ। फाइनल रिकॉर्डिंग के दौरान गाना खत्म होने पर उनके गले से खून आ गया था। इस एपिसोड में हम सुनेंगे रफी साहब के उनके काम को लेकर निष्ठा के किस्से को। " More | 07 min 57 sec | |||
9 . रफ़ी साहब का लाया गिफ्ट"इस एपिसोड में हम सुनेंगे, नौशाद साहब द्वारा बताया किस्सा रफ़ी साहब के बारे में। वो कहते है, रफ़ी जहां जाते थे वहा से वे कुछ न कुछ खरीद के ले आते थे, दूसरों के लिए तो कभी खुद के लिए। उनके इंतेक़ाल से कुछ महीनों पहले मोहम्मद रफ़ी नौशाद के पास आए और कहने लगे मैं अमेरिका जा रहा हूं वहां से क्या चीज़ लाऊं जो ग़रीबों के काम आए। तो उन्होंने कहा डायलिसिस की मशीन ले आइए, बहुत से लोगों को किडनी की तकलीफ होती है लेकिन फ़ीस ज़्यादा होने की वजह से उनका इलाज नहीं हो पाता। रफ़ी साहब ने फिर डायलिसिस मशीन को लाकर अस्पताल में दान कर दिए । " More | 07 min 14 sec | |||
10 . रफ़ी साहब और अमित जी का किस्सादोस्तों, हम ''बातें सितारों की - मोहम्मद रफ़ी'' के आखरी एपिसोड में हम पहुंच चुके हैं, तो सफर को आगे बढ़ाते हैं और चलिए सुनते हैं, उनसे जुड़े कुछ और किस्से को। More | 09 min 24 sec |
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