दादासाहेब फाल्के पुरस्कार
Duration
1hr 53m
Language
Hindi
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Category
Entertainment
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1 - दादासाहेब फाल्के और पुरुस्कार
09 min 09 sec
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2 - देविका रानी
07 min 16 sec
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3 - राज कपूर
08 min 04 sec
1
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4 - अशोक कुमार
07 min 05 sec
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5 - ऋषिकेश मुखर्जी
05 min 42 sec
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6 - यश चोपड़ा
06 min 51 sec
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7 - देव आनंद
10 min 03 sec
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8 - श्याम बेनेगल
06 min 09 sec
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9 - मन्ना डे
09 min 00 sec
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10 - प्राण
08 min 28 sec
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दादासाहेब फाल्के पुरस्कार
About Show
| Episodes | Duration | |||
1 . दादासाहेब फाल्के और पुरुस्कार"भारतीय सिनेमा का सफर 100 साल से भी ज़्यादा का हो गया है। 3 मई 1913 को रिलीज़ हुई थी पहली फिल्म नाम था राजा हरिश्चंदर और इस फिल्म को बनाया था धुंडिराज गोविन्द फाल्के यानी दादा साहब फाल्के जी ने। इसलिए इन्हें भारतीय सिनेमा के जनक भी कहा जाता है और इन्हीं के नाम पर साल 1969 में शुरू किये गए, इस पुरुस्कार को भारतीय सिने जगत का सर्वोच्च सम्मान होने का गौरव भी हासिल है। भारत सरकार द्वारा हर साल विशेष व्यक्ति को भारतीय सिनेमा और उसके विकास में महत्वपूर्ण योगदान के लिए दादा साहब फाल्के पुरस्कार दिया जाता है। इस एपिसोड में बात करेंगे दादा साहब फाल्के जी के फ़िल्मी सफर के बारे में,पहली फिल्म बनाने और रिलीज़ करने के बारे में और इस गौरवशाली पुरस्कार के बारे में . " More | 09 min 09 sec | |||
2 . देविका रानीहिंदी सिनेमा में आज महिलाएं पुरुषों के साथ कदम से कदम मिलाते हुए आगे बढ़ रही हैं। आज सिनेमा के क्षेत्र में महिलाएं सिर्फ अभिनेत्री बनकर ही नहीं बल्कि निर्देशक, निर्माता, कैमरापर्सन, होस्ट जैसे कई काम सहजता से संभाल रही हैं। हालांकि पहले के समय में महिलाओं के लिए फिल्मों में आना आसान नहीं था। उस दौर में एक लड़की ने अपने कदम आगे बढ़ाए और बनी भारतीय सिनेमा की पहली अभिनेत्री। इनका नाम था, देविका रानी। उन्हें भारतीय सिनेमा की पहली स्टार अभिनेत्री कहा जाता है। 1969 में भारत सरकार ने ‘दादा साहेब फालके अवार्ड’ की शुरुआत की और सबसे पहले इस पुरुस्कार से देविका रानी को ही नवाज़ा गया। उन्हें 'फर्स्ट लेडी ऑफ इंडियन स्क्रीन' भी कहा जाता है। देविका ने जिन फिल्मों में काम किया, उनमें, इज्जत, प्रभात, वचन, निर्मला, जीवन नैया, अछूत कन्या, कर्म, पुनर्मिलन, कंगन, बन्धन, भाभी, बसन्त, किस्मत, हमारी बात फिल्में प्रमुख हैं। More | 07 min 16 sec | |||
3 . राज कपूरराज कपूर हिन्दी सिनेमा जगत् का वह नाम है, जो पिछले कई दशकों से फ़िल्मी आकाश पर जगमगा रहा है और आने वाले कई दशकों तक भुलाया नहीं जा सकेगा। महज 24 साल की उम्र में राज कपूर ने आरके स्टूडियो शुरू कर बड़ी मिसाल कायम की। ये अपने जमाने के सबसे यंग डायरेक्टर थे। आर.के.बैनर तले उन्होंने आवारा, अंदाज, बरसात, आह, बूट पॉलिश, चोरी-चोरी, जागते रहो, जिस देश में गंगा बहती है, छलिया, श्री 420, संगम, बॉबी, सत्यम शिवम सुन्दरम, राम तेरी गंगा मैली, मेरा नाम जोकर, प्रेमरोग जैसी शानदार फिल्में बनायीं । राज कपूर की जो फिल्में सिनेमा की धरोहर मानी जाती हैं, उनमें ‘आवारा, ‘श्री 420’, ‘संगम और मेरा नाम जोकर शामिल हैं। ये फिल्मे देश ही नहीं विदेशो में भी सुपर हिट रही । राज कपूर ऐसे पहले एक्टर और फिल्म मेकर थे , जिन्होंने पूरी दुनिया में अपनी पहचान बनाई। More | 08 min 04 sec | |||
4 . अशोक कुमारइस एपिसोड में बात होगी, हिंदी सिनेमा के मशहूर और दिग्गज अभिनेता अशोक कुमार की। लगभग 6 दशकों तक अपने अभिनय से लोगों का दिल जीतने वाले अशोक कुमार दादा मुनि के नाम से मशहूर थे। हिंदी फिल्मों के शुरुआती दौर के नायकों में अशोक कुमार एक ऐसे अभिनेता थे, जिन्होंने अपने स्वाभाविक अभिनय के दम पर अपना स्टारडम खड़ा किया और कभी अपने आप को किसी एक इमेज में बंधने नहीं दिया। 250 से भी ज़्यादा फिल्मों में काम करने वाले अशोक कुमार का फ़िल्मी सफर 1936 में आई, फिल्म ''जीवन नैया'' से लेकर 1997 की फिल्म ''आँखों में तुम हो'' तक जारी रहा था। एंटी हीरो के रोल बहुत बहुत सारे अभिनेताओं ने किये है लेकिन हिंदी फिल्म जगत में सबसे पहले ये रोल करने का श्रेय अशोक कुमार को ही जाता है और वो फिल्म थी किस्मत जो की 1943 में आयी थी। अशोक कुमार की गिनती बॉलीवुड के उन नायाब कलाकारों में होती है जिनकी चमक से फ़िल्मी दुनिया ने दुनियाभर में रौशनी बिखेरी। More | 07 min 05 sec | |||
5 . ऋषिकेश मुखर्जीइस एपिसोड में बात करते है हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के उस शानदार डायरेक्टर की जिन्होंने 1950 से लेकर 1980 के दशक तक बेहतरीन फिल्में बनाई थीं। उनकी बनायीं फिल्म 'गुड्डी', 'बावर्ची', 'नमक हराम', मिली ' गोलमाल' , 'चुपके चुपके' लोगों को आज भी याद है। राजेश खन्ना और अमिताभ बच्चन को लेकर इस डायरेक्टर की बनायीं एक और फिल्म 'आनंद' को कोई कैसे भूल सकता है। ये है फ़िल्मी दुनिया के महान निर्देशक ऋषिकेश मुखर्जी। सिनेमा की दुनिया में उन्हें लोग प्यार से ऋषि दा भी कहते थे। अपनी फिल्मों में हंसी हंसी में वो गहरी बात कर जाते थे। More | 05 min 42 sec | |||
6 . यश चोपड़ाइस एपिसोड में बात करेंगे उस निर्माता निर्देशक यश चोपड़ा की जिसकी फिल्में बॉक्स ऑफिस पर सुपर हिट थी और साथ ही उन फिल्मों में काम करने वाले कलाकार भी कामयाबी के शिखर पर पहुंचे। More | 06 min 51 sec | |||
7 . देव आनंदइस एपिसोड में बात करते हैं दादा साहब फाल्के अवार्ड से नवाज़े गए उस फ़िल्मी हस्ती की जिसने हिंदी सिनेमा में तकरीबन छह दशक तक अपने हुनर, अदाकारी और रूमानियत का जादू बिखेरा, वो है एवरग्रीन यानि सदाबहार अभिनेता देव आनंद। 1946 से लेकर 2011 तक फ़िल्मी परदे पर अपना जादू बिखरेने वाले जवाँदिल इंसान देवानंद ने अपने चाहने वालो की दिल में जो जगह बनायीं है, वो आज भी बरक़रार है। इनकी एक एक फिल्म को लोगों ने कई बार देखा, इनके गानों को बार बार गुनगुनाया, इनके डायलॉग्स को बार बार सुनाया। More | 10 min 03 sec | |||
8 . श्याम बेनेगलइस एपिसोड में बात करते हैं श्याम बेनेगल के बारे में जो भारत के जाने-माने और हिंदी सिनेमा के कामयाब फ़िल्म निर्देशकों में से एक हैं। उनकी हर फ़िल्म का अपना एक अलग अन्दाज़ होता है। सामाजिक सन्देश देती उनकी फिल्मों ने भारतीय सिनेमा में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। More | 06 min 09 sec | |||
9 . मन्ना डेइस एपिसोड में बात करते हैं गायक मन्ना डे ने अपने पांच दशक के फ़िल्मी सफर में लगभग 3500 गीत गाए। मन्ना डे ने जैसे गाने गाये है उसे छू पाना हर किसी के बस की बात नहीं है इसलिए संगीत की दुनिया में इनका नाम बड़े अदब से लिया जाता हैं। ऐ मेरे प्यारे वतन , पूछो न कैसे मैंने रैन बिताई , ज़िन्दगी कैसी है पहेली हाए…, ऐ मेरी ज़ोहराजबी , इक चतुर नार बड़ी होशियार …, ‘कस्मे वादे प्यार वफा…’, ‘यारी है ईमान मेरा … जैसे कर्णप्रिय और सदाबहार गाने मन्ना डे की ही आवाज़ में ही सुनने को मिलते है। More | 09 min 00 sec | |||
10 . प्राणइस एपिसोड में बात करते हैं भारतीय सिनेमा में ज्यादातर हीरो और हीरोइन को ही तवज्जो दी जाती है लेकिन जब बात आती है विलेन की तो उसके बारे में कम ही बात की जाती है। और इस एपिसोड में बात करते है उस कलाकार की जिसे मेगा स्टार विलन, सुपर स्टार विलन, शताब्दी के खलनायक जैसे खिताबों से नवाज़ा गया। More | 08 min 28 sec |
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