डकैत - बाग़ीयों का विद्रोह
Duration
0hr 33m
Language
Hindi
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Category
Entertainment
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1 - डाकू मान सिंह
04 min 32 sec
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2 - डाकू पान सिंह तोमर
04 min 20 sec
6
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3 - डाकू फूलन देवी
05 min 28 sec
1
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4 - डाकू सीमा परिहार
05 min 37 sec
3
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5 - डाकू वीरप्पन - भाग १
04 min 23 sec
0
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6 - डाकू वीरप्पन - भाग २
04 min 23 sec
1
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7 - डाकू वीरप्पन - भाग ३
05 min 11 sec
2
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डकैत - बाग़ीयों का विद्रोह
About Show
| Episodes | Duration | |||
1 . डाकू मान सिंहडाकू मान सिंह वो नाम है जो 1939 से 1955 तक चंबल में दहशत का दूसरा नाम था। मान सिंह पर लूट के 112 तथा हत्या के 185 मामले दर्ज थे। वर्ष 1950 में कुख्यात डकैत मान सिंह के नाम से लोग थर्रा उठते थे। डाकू मान सिंह ने हीचिट्ठी भेजकर फिरौती मांगने की परंपरा शुरू की थी। डाकू मान सिंह के ऊपर फ़िल्में भी बन चुकी है। डाकू मान सिंह का पैतृक गांव खेड़ा राठौर में मंदिर है। इस मंदिर में रोज पूजा अर्चना होती है। यह मंदिर वर्ष 1984 में बना था। आइये सुनते है कैसे बने वो डाकू। More | 04 min 32 sec | |||
2 . डाकू पान सिंह तोमरपान सिंह तोमर एक भारतीय सैनिक, एथलीट, और बाग़ी (विद्रोही) थे। उन्होंने भारतीय सेना में सेवा की, जहाँ दौड़ने की उनकी प्रतिभा का पता चला। वह 1950 और 1960 के दशक में सात बार के राष्ट्रीय स्टीपलचेज़ में चैंपियन थे और 1952 के एशियाई खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व किया था। सेना से समय से पहले सेवानिवृत्त होने के बाद, वह अपने पैतृक गांव लौट आए। जहाँ उनके परिवार के सदस्यों ने उनकी ज़मीन भ्रष्ट कर्मचारियों के सहयोग से अपने नाम करवा ली। उनकी खेती नष्ट कर दी। बंदूकों से पान सिंह तोमर के परिवार पर हमला कर दिया, उनकी माता को मार दिया गया। बाद में पान सिंह तोमर, अपना बदला लेने के लिए चम्बल घाटी के डकैत के रूप में कुख्याति प्राप्त की। 1981 में, उन्हें भारतीय कानून प्रवर्तन अधिकारियों द्वारा मार दिया गया था। आइये सुनते हैं, डाकू पान सिंह तोमर के चुनौतीपूर्ण जीवन की कथा। More | 04 min 20 sec | |||
3 . डाकू फूलन देवीफूलन देवी वह पहली महिला डकैत हैं, जिन्होंने मर्दों की यातनाएं झेली थीं। लेकिन नैन-नक्श बढ़िया होने के चलते यह दस्यु संदुरी कही जाने लगीं। डाकू विक्रम मल्हार फूलन देवी से प्रेम करने लगा था, लेकिन एक घटना में उसकी मौत हो गई थी। उसके बाद फूलन ने विक्रम की बंदूक थाम ली और अपने साथ बचपन के दिनों में हुए दुराचार का बदला भी लिया। इसके बाद जेल में उमेद सिंह से फूलन देवी की मुलाकात हुई। कुछ मुलाकातों के बाद उमेद सिंह भी दस्यु सुंदरी फूलन देवी के प्यार में पड़ गए। इसके बाद दोनों ने शादी कर ली। More | 05 min 28 sec | |||
4 . डाकू सीमा परिहारडकैत सीमा परिहार की हंसी और खौफ से पूरा बीहड़ कांप उठता था। यूपी के ठाकुर परिवार में जन्मी सीमा का महज 13 साल की उम्र में ही डकैत लाला राम और कुसुमा नाईन ने अपहरण कर लिया था। इसके बाद उसे घर जाने का मौका मिला, लेकिन उसे डकैतों का गिरोह रास आ चुका था। सरला जाटव के दीवाने निर्भय गुर्जर ने कभी सीमा परिहार से शादी की थी। लेकिन निर्भय की सीमा से नहीं बनी और दोनों अलग हो गए। लाला राम के गिरोह के साथ कई डकैतियां करने के बाद सीमा परिहार ने पुलिस के सामने 30 नवंबर, 2000 को आत्मसमर्पण कर दिया। जब कि इससे पहले ही 18 मई 2000 को पुलिस ने डकैत लाला राम को मुठभेड़ में मार गिराया था। More | 05 min 37 sec | |||
5 . डाकू वीरप्पन - भाग १एक वक्त था जब वीरप्पन ने भारत सरकार की नींद हराम कर रखी थी। उसको गिरफ्तार करने के लिए सरकार ने करोड़ों रुपए बर्बाद कर दिए। वीरप्पन के बारे में कहा जाता है कि उसने 2000 से अधिक हाथियों का शिकार किया था। कहा जाता है कि वीरप्पन के गिरोह में कुल 40 लोग थे जो उसके इशारे पर जान तक देने को तैयार थे। वीरप्पन पुलिस वालों को शिकार बनाता था। वीरप्पन ने अपने अपराधी बनने की शुरूआत अपने रिश्तेदार सेवी गौंदर का असिस्टेंट बनकर की, जो चन्दन की लकड़ी के कुख्यात तस्कर थे। वीरप्पन ने 1970 से अपने अपराधिक जीवन की शुरुआत की और 1972 में पहली बार उसे गिरफ्तार किया गया था। तक़रीबन 30 वर्षों तक वो कर्नाटक, केरला और तमिलनाडु के जंगलो में रह रहा था। More | 04 min 23 sec | |||
6 . डाकू वीरप्पन - भाग २वीरप्पन के मशहूर होने से पहले तमिलनाडु में एक जंगल पैट्रोल पुलिस हुआ करती थी, जिसके प्रमुख होते थे लहीम शहीम गोपालकृष्णन। उनकी बांहों के डोले इतने मजबूत होते थे कि उनके साथी उन्हें रैम्बो कह कर पुकारते थे। रैम्बो गोपालकृष्णन की खास बात ये थी कि वो वीरप्पन की ही वन्नियार जाति से आते थे। इस एपिसोड में सुनिए वीरप्पन के जीवन के उस हिस्से के बारे में जिसमें, रैम्बो गोपालकृष्णन ने बहुत कुछ खो दिया। More | 04 min 23 sec | |||
7 . डाकू वीरप्पन - भाग ३कुख्यात चंदन तस्कर वीरप्पन को मार गिराने वाले के विजय कुमार 1975 बैच के तमिलनाडु कैडर के अधिकारी हैं. वह आतंक का पर्याय बन चुके वीरप्पन को मार गिराने वाली पुलिस टीम का भी अंग थे। तब वह एसटीएफ के प्रभारी थे और उनके नेतृत्व में ही एसटीएफ ने सफलतापूर्वक वीरप्पन को मार गिराने के अभियान को अंजाम दिया था। आइये, इस एपिसोड में सुनते हैं वीरप्पन के एनकाउंटर से जुड़ी पूरी कहानी। More | 05 min 11 sec |
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