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रंग-ए-ग़ज़ल

रंग-ए-ग़ज़ल

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Urdu

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Urdu Shows

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ग़ज़लें झऱने की तरह होती है। जिस तरह झरने से ठंडा पानी बहता है, उसी तरह ग़ज़लों से शायरों के दिल में छिपी भावनाएं बहती हैं। अपनी भावनाओं को बताने के लिए अक्सर शायर गहराई से भरे अल्फ़ाज़ों का इस्तेमाल करते हैं। और इन्ही अल्फ़ाज़ों को एक साथ एक ही धागे में पिरोकर शायर ग़ज़लें तैयार करते हैं। यह कहना गलत नहीं होगा कि जितना पुराना उर्दू साहित्य का इतिहास है, उतना ही पुराना ग़ज़लों का भी इतिहास है। हर मूड में सुनी जाने वाली ग़ज़लों के इस शो 'रंग-ए-ग़ज़ल' में आपका स्वागत है। इस शो में हम आपके लिए सभी दिग्गज शायरों की एक से एक ग़ज़लें लेकर आए हैं।

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हसरत मोहानी - चुपके-चुपके रात दिन आंसू बहाना याद है

1 - हसरत मोहानी - चुपके-चुपके रात दिन आंसू बहाना याद है

07 min 29 sec

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जॉन एलिया - हिज्र की आँखों से आँखें तो मिलाते जाइए

2 - जॉन एलिया - हिज्र की आँखों से आँखें तो मिलाते जाइए

06 min 26 sec

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जॉन एलिया - कितनी दिलकश हो तुम, कितना दिल-जु हूँ मैं

3 - जॉन एलिया - कितनी दिलकश हो तुम, कितना दिल-जु हूँ मैं

07 min 44 sec

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नसीर तुराबी - वो हम-सफ़र था पर उससे हम-नवाई न थी

4 - नसीर तुराबी - वो हम-सफ़र था पर उससे हम-नवाई न थी

05 min 23 sec

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अल्लामा इक़बाल - सितारों से आगे जहाँ और भी हैं, अभी इश्क़ के इम्तिहाँ और भी हैं

5 - अल्लामा इक़बाल - सितारों से आगे जहाँ और भी हैं, अभी इश्क़ के इम्तिहाँ और भी हैं

05 min 20 sec

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बहादुर शाह ज़फर - बात करनी मुझे मुश्किल कभी ऐसी तो न थी, जैसी अब है तेरी महफ़िल कभी ऐसी तो न थी

6 - बहादुर शाह ज़फर - बात करनी मुझे मुश्किल कभी ऐसी तो न थी, जैसी अब है तेरी महफ़िल कभी ऐसी तो न थी

06 min 20 sec

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दाग़ दहलवी - ख़ातिर से या लिहाज़ से मैं मान तो गया, झूठी क़सम से आप का ईमान तो गया

7 - दाग़ दहलवी - ख़ातिर से या लिहाज़ से मैं मान तो गया, झूठी क़सम से आप का ईमान तो गया

06 min 53 sec

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मीर तकी मीर - इब्तिदा-ए-इश्क़ है रोता है क्या, आगे-आगे देखिये होता है क्या

8 - मीर तकी मीर - इब्तिदा-ए-इश्क़ है रोता है क्या, आगे-आगे देखिये होता है क्या

06 min 30 sec

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ज़ौक़ - अब तो घबरा के ये कहते है कि मर जाएँगे, मर के भी चैन न पाया तो किधर जाएँगे

9 - ज़ौक़ - अब तो घबरा के ये कहते है कि मर जाएँगे, मर के भी चैन न पाया तो किधर जाएँगे

06 min 22 sec

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रंग-ए-ग़ज़ल

Urdu Shows|Urdu|9 Episodes
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About Show

ग़ज़लें झऱने की तरह होती है। जिस तरह झरने से ठंडा पानी बहता है, उसी तरह ग़ज़लों से शायरों के दिल में छिपी भावनाएं बहती हैं। अपनी भावनाओं को बताने के लिए अक्सर शायर गहराई से भरे अल्फ़ाज़ों का इस्तेमाल करते हैं। और इन्ही अल्फ़ाज़ों को एक साथ एक ही धागे में पिरोकर शायर ग़ज़लें तैयार करते हैं। यह कहना गलत नहीं होगा कि जितना पुराना उर्दू साहित्य का इतिहास है, उतना ही पुराना ग़ज़लों का भी इतिहास है। हर मूड में सुनी जाने वाली ग़ज़लों के इस शो 'रंग-ए-ग़ज़ल' में आपका स्वागत है। इस शो में हम आपके लिए सभी दिग्गज शायरों की एक से एक ग़ज़लें लेकर आए हैं।

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हसरत मोहानी - चुपके-चुपके रात दिन आंसू बहाना याद है

1 . हसरत मोहानी - चुपके-चुपके रात दिन आंसू बहाना याद है

रंग-ए-ग़ज़ल' के इस एपिसोड में सुनिए शायर हसरत मोहनी साहब की लिखी ग़ज़ल, जिसका नाम है 'चुपके-चुपके रात दिन आंसू बहाना याद है'।

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07 min 29 sec

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जॉन एलिया - हिज्र की आँखों से आँखें तो मिलाते जाइए

2 . जॉन एलिया - हिज्र की आँखों से आँखें तो मिलाते जाइए

रंग-ए-ग़ज़ल' के इस एपिसोड में सुनिए शायर जॉन एलिया की लिखी ग़ज़ल, जिसका नाम है 'हिज्र की आँखों से आँखें तो मिलाते जाइए'।

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06 min 26 sec

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जॉन एलिया - कितनी दिलकश हो तुम, कितना दिल-जु हूँ मैं

3 . जॉन एलिया - कितनी दिलकश हो तुम, कितना दिल-जु हूँ मैं

रंग-ए-ग़ज़ल' के इस एपिसोड में सुनिए शायर जॉन एलिया की लिखी ग़ज़ल, जिसका नाम है 'कितनी दिलकश हो तुम, कितना दिल-जु हूँ मैं'।

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07 min 44 sec

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नसीर तुराबी - वो हम-सफ़र था पर उससे हम-नवाई न थी

4 . नसीर तुराबी - वो हम-सफ़र था पर उससे हम-नवाई न थी

रंग-ए-ग़ज़ल' के इस एपिसोड में सुनिए जनाब नसीर तुराबी की लिखी ग़ज़ल, जिसका नाम है 'वो हम-सफ़र था पर उससे हम-नवाई न थी'।

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05 min 23 sec

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अल्लामा इक़बाल - सितारों से आगे जहाँ और भी हैं, अभी इश्क़ के इम्तिहाँ और भी हैं

5 . अल्लामा इक़बाल - सितारों से आगे जहाँ और भी हैं, अभी इश्क़ के इम्तिहाँ और भी हैं

रंग-ए-ग़ज़ल' के इस एपिसोड में सुनिए शायर अल्लामा इक़बाल साहब की एक बेहतरीन ग़ज़ल, जिसका नाम है 'सितारों से आगे जहाँ और भी हैं, अभी इश्क़ के इम्तिहाँ और भी हैं '।

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बहादुर शाह ज़फर - बात करनी मुझे मुश्किल कभी ऐसी तो न थी, जैसी अब है तेरी महफ़िल कभी ऐसी तो न थी

6 . बहादुर शाह ज़फर - बात करनी मुझे मुश्किल कभी ऐसी तो न थी, जैसी अब है तेरी महफ़िल कभी ऐसी तो न थी

रंग-ए-ग़ज़ल' के इस एपिसोड में सुनिए शायर बहादुर शाह ज़फर की लिखी ग़ज़ल, जिसका नाम है 'बात करनी मुझे मुश्किल कभी ऐसी तो न थी, जैसी अब है तेरी महफ़िल कभी ऐसी तो न थी'।

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06 min 20 sec

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दाग़ दहलवी - ख़ातिर से या लिहाज़ से मैं मान तो गया, झूठी क़सम से आप का ईमान तो गया

7 . दाग़ दहलवी - ख़ातिर से या लिहाज़ से मैं मान तो गया, झूठी क़सम से आप का ईमान तो गया

रंग-ए-ग़ज़ल' के इस एपिसोड में सुनिए शायर दाग़ दहलवी साहब की ग़ज़ल 'ख़ातिर से या लिहाज़ से मैं मान तो गया, झूठी क़सम से आप का ईमान तो गया'।

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06 min 53 sec

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मीर तकी मीर - इब्तिदा-ए-इश्क़ है रोता है क्या, आगे-आगे देखिये होता है क्या

8 . मीर तकी मीर - इब्तिदा-ए-इश्क़ है रोता है क्या, आगे-आगे देखिये होता है क्या

रंग-ए-ग़ज़ल' के इस एपिसोड में सुनिए जनाब मीर तकी मीर की लिखी ग़ज़ल, जिसका नाम है 'इब्तिदा-ए-इश्क़ है रोता है क्या, आगे-आगे देखिये होता है क्या'।

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06 min 30 sec

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ज़ौक़ - अब तो घबरा के ये कहते है कि मर जाएँगे, मर के भी चैन न पाया तो किधर जाएँगे

9 . ज़ौक़ - अब तो घबरा के ये कहते है कि मर जाएँगे, मर के भी चैन न पाया तो किधर जाएँगे

रंग-ए-ग़ज़ल' के इस एपिसोड में सुनिए शायर ज़ौक़ की लिखी ग़ज़ल, जिसका नाम है 'अब तो घबरा के ये कहते है कि मर जाएँगे, मर के भी चैन न पाया तो किधर जाएँगे'।

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