रंग-ए-ग़ज़ल
Duration
0hr 58m
Language
Urdu
Released
Category
Urdu Shows
Favorite
Review
Play
Share
Read More
1 - हसरत मोहानी - चुपके-चुपके रात दिन आंसू बहाना याद है
07 min 29 sec
10
Episode info
Share Episode
2 - जॉन एलिया - हिज्र की आँखों से आँखें तो मिलाते जाइए
06 min 26 sec
6
Episode info
Share Episode
3 - जॉन एलिया - कितनी दिलकश हो तुम, कितना दिल-जु हूँ मैं
07 min 44 sec
3
Episode info
Share Episode
4 - नसीर तुराबी - वो हम-सफ़र था पर उससे हम-नवाई न थी
05 min 23 sec
3
Episode info
Share Episode
5 - अल्लामा इक़बाल - सितारों से आगे जहाँ और भी हैं, अभी इश्क़ के इम्तिहाँ और भी हैं
05 min 20 sec
0
Episode info
Share Episode
6 - बहादुर शाह ज़फर - बात करनी मुझे मुश्किल कभी ऐसी तो न थी, जैसी अब है तेरी महफ़िल कभी ऐसी तो न थी
06 min 20 sec
1
Episode info
Share Episode
7 - दाग़ दहलवी - ख़ातिर से या लिहाज़ से मैं मान तो गया, झूठी क़सम से आप का ईमान तो गया
06 min 53 sec
0
Episode info
Share Episode
8 - मीर तकी मीर - इब्तिदा-ए-इश्क़ है रोता है क्या, आगे-आगे देखिये होता है क्या
06 min 30 sec
0
Episode info
Share Episode
9 - ज़ौक़ - अब तो घबरा के ये कहते है कि मर जाएँगे, मर के भी चैन न पाया तो किधर जाएँगे
06 min 22 sec
1
Episode info
Share Episode
रंग-ए-ग़ज़ल
About Show
| Episodes | Duration | |||
1 . हसरत मोहानी - चुपके-चुपके रात दिन आंसू बहाना याद हैरंग-ए-ग़ज़ल' के इस एपिसोड में सुनिए शायर हसरत मोहनी साहब की लिखी ग़ज़ल, जिसका नाम है 'चुपके-चुपके रात दिन आंसू बहाना याद है'। More | 07 min 29 sec | |||
2 . जॉन एलिया - हिज्र की आँखों से आँखें तो मिलाते जाइएरंग-ए-ग़ज़ल' के इस एपिसोड में सुनिए शायर जॉन एलिया की लिखी ग़ज़ल, जिसका नाम है 'हिज्र की आँखों से आँखें तो मिलाते जाइए'। More | 06 min 26 sec | |||
3 . जॉन एलिया - कितनी दिलकश हो तुम, कितना दिल-जु हूँ मैंरंग-ए-ग़ज़ल' के इस एपिसोड में सुनिए शायर जॉन एलिया की लिखी ग़ज़ल, जिसका नाम है 'कितनी दिलकश हो तुम, कितना दिल-जु हूँ मैं'। More | 07 min 44 sec | |||
4 . नसीर तुराबी - वो हम-सफ़र था पर उससे हम-नवाई न थीरंग-ए-ग़ज़ल' के इस एपिसोड में सुनिए जनाब नसीर तुराबी की लिखी ग़ज़ल, जिसका नाम है 'वो हम-सफ़र था पर उससे हम-नवाई न थी'। More | 05 min 23 sec | |||
5 . अल्लामा इक़बाल - सितारों से आगे जहाँ और भी हैं, अभी इश्क़ के इम्तिहाँ और भी हैंरंग-ए-ग़ज़ल' के इस एपिसोड में सुनिए शायर अल्लामा इक़बाल साहब की एक बेहतरीन ग़ज़ल, जिसका नाम है 'सितारों से आगे जहाँ और भी हैं, अभी इश्क़ के इम्तिहाँ और भी हैं '। More | 05 min 20 sec | |||
6 . बहादुर शाह ज़फर - बात करनी मुझे मुश्किल कभी ऐसी तो न थी, जैसी अब है तेरी महफ़िल कभी ऐसी तो न थीरंग-ए-ग़ज़ल' के इस एपिसोड में सुनिए शायर बहादुर शाह ज़फर की लिखी ग़ज़ल, जिसका नाम है 'बात करनी मुझे मुश्किल कभी ऐसी तो न थी, जैसी अब है तेरी महफ़िल कभी ऐसी तो न थी'। More | 06 min 20 sec | |||
7 . दाग़ दहलवी - ख़ातिर से या लिहाज़ से मैं मान तो गया, झूठी क़सम से आप का ईमान तो गयारंग-ए-ग़ज़ल' के इस एपिसोड में सुनिए शायर दाग़ दहलवी साहब की ग़ज़ल 'ख़ातिर से या लिहाज़ से मैं मान तो गया, झूठी क़सम से आप का ईमान तो गया'। More | 06 min 53 sec | |||
8 . मीर तकी मीर - इब्तिदा-ए-इश्क़ है रोता है क्या, आगे-आगे देखिये होता है क्यारंग-ए-ग़ज़ल' के इस एपिसोड में सुनिए जनाब मीर तकी मीर की लिखी ग़ज़ल, जिसका नाम है 'इब्तिदा-ए-इश्क़ है रोता है क्या, आगे-आगे देखिये होता है क्या'। More | 06 min 30 sec | |||
9 . ज़ौक़ - अब तो घबरा के ये कहते है कि मर जाएँगे, मर के भी चैन न पाया तो किधर जाएँगेरंग-ए-ग़ज़ल' के इस एपिसोड में सुनिए शायर ज़ौक़ की लिखी ग़ज़ल, जिसका नाम है 'अब तो घबरा के ये कहते है कि मर जाएँगे, मर के भी चैन न पाया तो किधर जाएँगे'। More | 06 min 22 sec |
Recommended shows
You may also like
न ग़ुबार में न गुलाब में मुझे देखना
ईद उल फ़ित्र
अली सरदार जाफरी - मख़दूम पुरस्कार
क्षितिज की कहानी
अदा जाफ़री
बालों की परेशानी











