Logo
Logo
mic
Download
'रंग-ए-ग़ज़ल' सीज़न 2

'रंग-ए-ग़ज़ल' सीज़न 2

Duration

0hr 40m

Language

Urdu

Released

Category

Entertainment

Like

Favorite

like

Review

play

Play

share

Share

ग़ज़लें झऱने की तरह होती है। जिस तरह झरने से ठंडा पानी बहता है, उसी तरह ग़ज़लों से शायरों के दिल में छिपी भावनाएं बहती हैं। अपनी भावनाओं को बताने के लिए अक्सर शायर गहराई से भरे अल्फ़ाज़ों का इस्तेमाल करते हैं। और इन्ही अल्फ़ाज़ों को एक साथ एक ही धागे में पिरोकर शायर ग़ज़लें तैयार करते हैं। यह कहना गलत नहीं होगा कि जितना पुराना उर्दू साहित्य का इतिहास है, उतना ही पुराना ग़ज़लों का भी इतिहास है। हर मूड में सुनी जाने वाली ग़ज़लों के इस शो 'रंग-ए-ग़ज़ल' में आपका स्वागत है। इस शो में हम आपके लिए सभी दिग्गज शायरों की एक से एक ग़ज़लें लेकर आए हैं।

Read More

मिर्ज़ा ग़ालिब - हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी

1 - मिर्ज़ा ग़ालिब - हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी

04 min 56 sec

Like

0

play...

Episode info

info

Share Episode

share
फैज़ अहमद फैज़ - आपकी याद आती रही रात भर

2 - फैज़ अहमद फैज़ - आपकी याद आती रही रात भर

03 min 41 sec

Like

0

play...

Episode info

info

Share Episode

share
मीर ताकि मीर - देख तो दिल की जां से उठता है

3 - मीर ताकि मीर - देख तो दिल की जां से उठता है

05 min 28 sec

Like

3

play...

Episode info

info

Share Episode

share
शेख़ इब्राहिम ज़ौक़ - वक़्ते पीरी शबाब की बातें

4 - शेख़ इब्राहिम ज़ौक़ - वक़्ते पीरी शबाब की बातें

04 min 02 sec

Like

1

play...

Episode info

info

Share Episode

share
आले रज़ा रज़ा - हमीं ने उनकी तरफ से मना लिया दिल को

5 - आले रज़ा रज़ा - हमीं ने उनकी तरफ से मना लिया दिल को

02 min 22 sec

Like

0

play...

Episode info

info

Share Episode

share
सीमाब अकबराबादी - अब क्या बताऊँ मैं तेरे मिलने से क्या मिला

6 - सीमाब अकबराबादी - अब क्या बताऊँ मैं तेरे मिलने से क्या मिला

04 min 08 sec

Like

1

play...

Episode info

info

Share Episode

share
इंशा अल्लाह खान इंशा - कमर बांधे हुए चलने को यहाँ सब यार बैठे हैं

7 - इंशा अल्लाह खान इंशा - कमर बांधे हुए चलने को यहाँ सब यार बैठे हैं

04 min 57 sec

Like

0

play...

Episode info

info

Share Episode

share
मिर्ज़ा रज़ा बर्क़ - मिसाल-ए-तार-ए-नज़र क्या नज़र नहीं आता

8 - मिर्ज़ा रज़ा बर्क़ - मिसाल-ए-तार-ए-नज़र क्या नज़र नहीं आता

03 min 09 sec

Like

0

play...

Episode info

info

Share Episode

share
इमाम बक़्श नासीख़ - जान हम तुझपे दिया करते हैं

9 - इमाम बक़्श नासीख़ - जान हम तुझपे दिया करते हैं

03 min 49 sec

Like

2

play...

Episode info

info

Share Episode

share
मुसहफ़ी ग़ुलाम हमदानी - आए हो तो ये हिजाब क्या है

10 - मुसहफ़ी ग़ुलाम हमदानी - आए हो तो ये हिजाब क्या है

03 min 51 sec

Like

2

play...

Episode info

info

Share Episode

share

'रंग-ए-ग़ज़ल' सीज़न 2

Entertainment|Urdu|10 Episodes
Like
share
like

About Show

ग़ज़लें झऱने की तरह होती है। जिस तरह झरने से ठंडा पानी बहता है, उसी तरह ग़ज़लों से शायरों के दिल में छिपी भावनाएं बहती हैं। अपनी भावनाओं को बताने के लिए अक्सर शायर गहराई से भरे अल्फ़ाज़ों का इस्तेमाल करते हैं। और इन्ही अल्फ़ाज़ों को एक साथ एक ही धागे में पिरोकर शायर ग़ज़लें तैयार करते हैं। यह कहना गलत नहीं होगा कि जितना पुराना उर्दू साहित्य का इतिहास है, उतना ही पुराना ग़ज़लों का भी इतिहास है। हर मूड में सुनी जाने वाली ग़ज़लों के इस शो 'रंग-ए-ग़ज़ल' में आपका स्वागत है। इस शो में हम आपके लिए सभी दिग्गज शायरों की एक से एक ग़ज़लें लेकर आए हैं।

EpisodesDuration
मिर्ज़ा ग़ालिब - हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी

1 . मिर्ज़ा ग़ालिब - हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी

रंग-ए-ग़ज़ल' S2 के इस एपिसोड में सुनिए शायर मिर्ज़ा ग़ालिब साहब की लिखी ग़ज़ल, जिसका नाम है 'हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी'।

More

04 min 56 sec

play

share

फैज़ अहमद फैज़ - आपकी याद आती रही रात भर

2 . फैज़ अहमद फैज़ - आपकी याद आती रही रात भर

रंग-ए-ग़ज़ल' S2 के इस एपिसोड में सुनिए शायर फैज़ अहमद फैज़ साहब की लिखी ग़ज़ल, जिसका नाम है 'आपकी याद आती रही रात भर'।

More

03 min 41 sec

play

share

मीर ताकि मीर - देख तो दिल की जां से उठता है

3 . मीर ताकि मीर - देख तो दिल की जां से उठता है

रंग-ए-ग़ज़ल' S2 के इस एपिसोड में सुनिए शायर मीर तकी मीर साहब की लिखी ग़ज़ल, जिसका नाम है 'देख तो दिल की जां से उठता है'।

More

05 min 28 sec

play

share

शेख़ इब्राहिम ज़ौक़ - वक़्ते पीरी शबाब की बातें

4 . शेख़ इब्राहिम ज़ौक़ - वक़्ते पीरी शबाब की बातें

रंग-ए-ग़ज़ल' S2 के इस एपिसोड में सुनिए शायर शेख़ इब्राहिम ज़ौक़ साहब की लिखी ग़ज़ल, जिसका नाम है 'वक़्ते पीरी शबाब की बातें'।

More

04 min 02 sec

play

share

आले रज़ा रज़ा - हमीं ने उनकी तरफ से मना लिया दिल को

5 . आले रज़ा रज़ा - हमीं ने उनकी तरफ से मना लिया दिल को

रंग-ए-ग़ज़ल' S2 के इस एपिसोड में सुनिए शायर आले रज़ा रज़ा साहब की लिखी ग़ज़ल, जिसका नाम है 'हमीं ने उनकी तरफ से मना लिया दिल को'।

More

02 min 22 sec

play

share

सीमाब अकबराबादी - अब क्या बताऊँ मैं तेरे मिलने से क्या मिला

6 . सीमाब अकबराबादी - अब क्या बताऊँ मैं तेरे मिलने से क्या मिला

रंग-ए-ग़ज़ल' S2 के इस एपिसोड में सुनिए शायर सीमाब अकबराबादी साहब की लिखी ग़ज़ल, जिसका नाम है अब क्या बताऊँ मैं तेरे मिलने से क्या मिला'।

More

04 min 08 sec

play

share

इंशा अल्लाह खान इंशा - कमर बांधे हुए चलने को यहाँ सब यार बैठे हैं

7 . इंशा अल्लाह खान इंशा - कमर बांधे हुए चलने को यहाँ सब यार बैठे हैं

रंग-ए-ग़ज़ल' S2 के इस एपिसोड में सुनिए शायर इंशा अल्लाह खान इंशा साहब की लिखी ग़ज़ल, जिसका नाम है 'कमर बांधे हुए चलने को यहाँ सब यार बैठे हैं'।

More

04 min 57 sec

play

share

मिर्ज़ा रज़ा बर्क़ - मिसाल-ए-तार-ए-नज़र क्या नज़र नहीं आता

8 . मिर्ज़ा रज़ा बर्क़ - मिसाल-ए-तार-ए-नज़र क्या नज़र नहीं आता

रंग-ए-ग़ज़ल' S2 के इस एपिसोड में सुनिए शायर मिर्ज़ा रज़ा बर्क़ साहब की लिखी ग़ज़ल, जिसका नाम है 'मिसाल-ए-तार-ए-नज़र क्या नज़र नहीं आता'।

More

03 min 09 sec

play

share

इमाम बक़्श नासीख़ - जान हम तुझपे दिया करते हैं

9 . इमाम बक़्श नासीख़ - जान हम तुझपे दिया करते हैं

रंग-ए-ग़ज़ल' S2 के इस एपिसोड में सुनिए शायर इमाम बक़्श नासीख़ साहब की लिखी ग़ज़ल, जिसका नाम है 'जान हम तिझपे दिया करते हैं'।

More

03 min 49 sec

play

share

मुसहफ़ी ग़ुलाम हमदानी - आए हो तो ये हिजाब क्या है

10 . मुसहफ़ी ग़ुलाम हमदानी - आए हो तो ये हिजाब क्या है

रंग-ए-ग़ज़ल' S2 के इस एपिसोड में सुनिए शायर मिर्ज़ा ग़ालिब साहब की लिखी ग़ज़ल, जिसका नाम है 'हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी'।

More

03 min 51 sec

play

share

You may also like

Picture of the author

सिंधु घाटी सभ्यता

play
Picture of the author

न ग़ुबार में न गुलाब में मुझे देखना

play
Picture of the author

S1E1: D'Evil

play
Picture of the author

Anurag Kashyap

play
Picture of the author

ईद उल फ़ित्र

play
Picture of the author

अली सरदार जाफरी - मख़दूम पुरस्कार

play