'रंग-ए-ग़ज़ल' सीज़न 2
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0hr 40m
Language
Urdu
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Category
Entertainment
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1 - मिर्ज़ा ग़ालिब - हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी
04 min 56 sec
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2 - फैज़ अहमद फैज़ - आपकी याद आती रही रात भर
03 min 41 sec
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3 - मीर ताकि मीर - देख तो दिल की जां से उठता है
05 min 28 sec
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4 - शेख़ इब्राहिम ज़ौक़ - वक़्ते पीरी शबाब की बातें
04 min 02 sec
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5 - आले रज़ा रज़ा - हमीं ने उनकी तरफ से मना लिया दिल को
02 min 22 sec
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6 - सीमाब अकबराबादी - अब क्या बताऊँ मैं तेरे मिलने से क्या मिला
04 min 08 sec
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7 - इंशा अल्लाह खान इंशा - कमर बांधे हुए चलने को यहाँ सब यार बैठे हैं
04 min 57 sec
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8 - मिर्ज़ा रज़ा बर्क़ - मिसाल-ए-तार-ए-नज़र क्या नज़र नहीं आता
03 min 09 sec
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9 - इमाम बक़्श नासीख़ - जान हम तुझपे दिया करते हैं
03 min 49 sec
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10 - मुसहफ़ी ग़ुलाम हमदानी - आए हो तो ये हिजाब क्या है
03 min 51 sec
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'रंग-ए-ग़ज़ल' सीज़न 2
About Show
| Episodes | Duration | |||
1 . मिर्ज़ा ग़ालिब - हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसीरंग-ए-ग़ज़ल' S2 के इस एपिसोड में सुनिए शायर मिर्ज़ा ग़ालिब साहब की लिखी ग़ज़ल, जिसका नाम है 'हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी'। More | 04 min 56 sec | |||
2 . फैज़ अहमद फैज़ - आपकी याद आती रही रात भररंग-ए-ग़ज़ल' S2 के इस एपिसोड में सुनिए शायर फैज़ अहमद फैज़ साहब की लिखी ग़ज़ल, जिसका नाम है 'आपकी याद आती रही रात भर'। More | 03 min 41 sec | |||
3 . मीर ताकि मीर - देख तो दिल की जां से उठता हैरंग-ए-ग़ज़ल' S2 के इस एपिसोड में सुनिए शायर मीर तकी मीर साहब की लिखी ग़ज़ल, जिसका नाम है 'देख तो दिल की जां से उठता है'। More | 05 min 28 sec | |||
4 . शेख़ इब्राहिम ज़ौक़ - वक़्ते पीरी शबाब की बातेंरंग-ए-ग़ज़ल' S2 के इस एपिसोड में सुनिए शायर शेख़ इब्राहिम ज़ौक़ साहब की लिखी ग़ज़ल, जिसका नाम है 'वक़्ते पीरी शबाब की बातें'। More | 04 min 02 sec | |||
5 . आले रज़ा रज़ा - हमीं ने उनकी तरफ से मना लिया दिल कोरंग-ए-ग़ज़ल' S2 के इस एपिसोड में सुनिए शायर आले रज़ा रज़ा साहब की लिखी ग़ज़ल, जिसका नाम है 'हमीं ने उनकी तरफ से मना लिया दिल को'। More | 02 min 22 sec | |||
6 . सीमाब अकबराबादी - अब क्या बताऊँ मैं तेरे मिलने से क्या मिलारंग-ए-ग़ज़ल' S2 के इस एपिसोड में सुनिए शायर सीमाब अकबराबादी साहब की लिखी ग़ज़ल, जिसका नाम है अब क्या बताऊँ मैं तेरे मिलने से क्या मिला'। More | 04 min 08 sec | |||
7 . इंशा अल्लाह खान इंशा - कमर बांधे हुए चलने को यहाँ सब यार बैठे हैंरंग-ए-ग़ज़ल' S2 के इस एपिसोड में सुनिए शायर इंशा अल्लाह खान इंशा साहब की लिखी ग़ज़ल, जिसका नाम है 'कमर बांधे हुए चलने को यहाँ सब यार बैठे हैं'। More | 04 min 57 sec | |||
8 . मिर्ज़ा रज़ा बर्क़ - मिसाल-ए-तार-ए-नज़र क्या नज़र नहीं आतारंग-ए-ग़ज़ल' S2 के इस एपिसोड में सुनिए शायर मिर्ज़ा रज़ा बर्क़ साहब की लिखी ग़ज़ल, जिसका नाम है 'मिसाल-ए-तार-ए-नज़र क्या नज़र नहीं आता'। More | 03 min 09 sec | |||
9 . इमाम बक़्श नासीख़ - जान हम तुझपे दिया करते हैंरंग-ए-ग़ज़ल' S2 के इस एपिसोड में सुनिए शायर इमाम बक़्श नासीख़ साहब की लिखी ग़ज़ल, जिसका नाम है 'जान हम तिझपे दिया करते हैं'। More | 03 min 49 sec | |||
10 . मुसहफ़ी ग़ुलाम हमदानी - आए हो तो ये हिजाब क्या हैरंग-ए-ग़ज़ल' S2 के इस एपिसोड में सुनिए शायर मिर्ज़ा ग़ालिब साहब की लिखी ग़ज़ल, जिसका नाम है 'हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी'। More | 03 min 51 sec |
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