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श्रीमद्‍भगवद्‍गीता - अध्याय १८

श्रीमद्‍भगवद्‍गीता - अध्याय १८

Duration

2hr 33m

Language

Hindi

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Category

Devotional

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इस शो में हम आपको श्रीमदभगवद्गगीता के अठारहवें अध्याय के श्लोक सुनाएंगे और उनके मतलब समझाएंगे।

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श्लोक १

1 - श्लोक १

03 min 05 sec

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श्लोक  २

2 - श्लोक २

02 min 13 sec

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श्लोक  ३

3 - श्लोक ३

03 min 24 sec

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श्लोक ४ और  श्लोक ५

4 - श्लोक ४ और श्लोक ५

02 min 47 sec

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श्लोक  ६

5 - श्लोक ६

02 min 11 sec

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श्लोक  ७

6 - श्लोक ७

02 min 10 sec

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श्लोक ८

7 - श्लोक ८

01 min 35 sec

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श्लोक ९

8 - श्लोक ९

01 min 42 sec

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श्लोक १०, श्लोक  ११ और श्लोक १२

9 - श्लोक १०, श्लोक ११ और श्लोक १२

05 min 36 sec

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श्लोक १३, श्लोक १४, श्लोक १५, श्लोक १६ और श्लोक  १७

10 - श्लोक १३, श्लोक १४, श्लोक १५, श्लोक १६ और श्लोक १७

05 min 17 sec

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श्रीमद्‍भगवद्‍गीता - अध्याय १८

Devotional|Hindi|37 Episodes
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इस शो में हम आपको श्रीमदभगवद्गगीता के अठारहवें अध्याय के श्लोक सुनाएंगे और उनके मतलब समझाएंगे।

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श्लोक १

1 . श्लोक १

"(अर्जुन उवाच) सन्यासस्य, महाबाहो, तत्त्वम्, इच्छामि, वेदितुम्, त्यागस्य, च, हृषीकेश, पृथक्, केशिनिषूदन।।1।।"

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03 min 05 sec

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श्लोक  २

2 . श्लोक २

"काम्यानाम्, कर्मणाम्, न्यासम्, सóयासम्, कवयः, विदुः, सर्वकर्मफलत्यागम्, प्राहुः, त्यागम्, विचक्षणाः।।2।।"

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02 min 13 sec

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श्लोक  ३

3 . श्लोक ३

"त्याज्यम्, दोषवत्, इति, एके, कर्म, प्राहुः, मनीषिणः, यज्ञदानतपःकर्म, न, त्याज्यम्, इति, च, अपरे।।3।।"

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03 min 24 sec

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श्लोक ४ और  श्लोक ५

4 . श्लोक ४ और श्लोक ५

"(भगवान उवाच) निश्चयम्, श्रृणु, मे, तत्रा, त्यागे, भरतसत्तम, त्यागः, हि, पुरुषव्याघ्र, त्रिविधः, सम्प्रकीर्तितः।।4।। यज्ञदानतपःकर्म, न, त्याज्यम्, कार्यम्, एव, तत्, यज्ञः, दानम्, तपः, च, एव, पावनानि, मनीषिणाम्।।5।।"

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02 min 47 sec

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श्लोक  ६

5 . श्लोक ६

"एतानि, अपि, तु, कर्माणि, संगम्, त्यक्त्वा, फलानि, च, कर्तव्यानि, इति, मे, पार्थ निश्चितम्, मतम्, उत्तमम्।।6।।"

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02 min 11 sec

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श्लोक  ७

6 . श्लोक ७

"नियतस्य, तु, सóयासः, कर्मणः, न, उपपद्यते, मोहात्, तस्य, परित्यागः, तामसः, परिकीर्तितः।।7।।"

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02 min 10 sec

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श्लोक ८

7 . श्लोक ८

"दुःखम्, इति, एव, यत्, कर्म, कायक्लेशभयात्, त्यजेत्, सः, कृत्वा, राजसम्, त्यागम्, न, एव, त्यागफलम्, लभेत्।।8।।"

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01 min 35 sec

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श्लोक ९

8 . श्लोक ९

"कार्यम्, इति, एव, यत्, कर्म, नियतम्, क्रियते, अर्जुन, संगम्, त्यक्त्वा, फलम्, च, एव, सः, त्यागः, सात्त्विकः, मतः।।9।।"

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श्लोक १०, श्लोक  ११ और श्लोक १२

9 . श्लोक १०, श्लोक ११ और श्लोक १२

"न, द्वेष्टि, अकुशलम्, कर्म, कुशले, न, अनुषज्जते, त्यागी, सत्त्वसमाविष्टः, मेधावी, छिन्नसंशयः।।10।। न, हि, देहभृता, शक्यम्, त्यक्तुम्, कर्माणि, अशेषतः, यः, तु, कर्मफलत्यागी, सः, त्यागी, इति, अभिधीयते।।11।। अनिष्टम्, इष्टम्, मिश्रम्, च, त्रिविधम्, कर्मणः, फलम्, भवति, अत्यागिनाम्, प्रेत्य, न, तु, सóयासिनाम्, क्वचित्।।12।।"

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श्लोक १३, श्लोक १४, श्लोक १५, श्लोक १६ और श्लोक  १७

10 . श्लोक १३, श्लोक १४, श्लोक १५, श्लोक १६ और श्लोक १७

"पञ्च, एतानि, महाबाहो, कारणानि, निबोध, मे, साङ्ख्ये, कृतान्ते, प्रोक्तानि, सिद्धये, सर्वकर्मणाम्।।13।। अधिष्ठानम्, तथा, कर्ता, करणम्, च, पृथग्विधम्, विविधाः, च, पृथक्, चेष्टाः, दैवम्, च, एव, अत्रा, प×चमम्।। 14।। शरीरवाङ्मनोभिः, यत्, कर्म, प्रारभते, नरः, न्याय्यम्, वा, विपरीतम्, वा, पञ्च एते, तस्य, हेतवः।। 15।। तत्र, एवम्, सति, कर्तारम्, आत्मानम्, केवलम्, तु, यः, पश्यति, अकृतबुद्धित्वात्, न, सः, पश्यति, दुर्मतिः।।16।। यस्य, न, अहङ्कृृतः, भावः, बुद्धिः, यस्य, न, लिप्यते, हत्वा, अपि, सः, इमान्, लोकान्, न, हन्ति, न, निबध्यते।।17।।"

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05 min 17 sec

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