महायोद्धा
Duration
1hr 39m
Language
Hindi
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Category
Stories
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1 - शो का परिचय
01 min 19 sec
7
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2 - अमर अश्वत्थामा
09 min 21 sec
8
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3 - पराक्रमी अर्जुन
10 min 43 sec
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4 - महाक्रोधी परशुराम
07 min 22 sec
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5 - महाबली दुर्योधन
12 min 37 sec
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6 - महाबली भीम
12 min 11 sec
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7 - महाबली, महापराक्रमी, महारथी भीष्म पितामह
14 min 52 sec
1
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8 - महारथी कर्ण
11 min 49 sec
5
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9 - माता कुंती
07 min 06 sec
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10 - मायावी घटोत्कच
06 min 31 sec
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महायोद्धा
About Show
| Episodes | Duration | |||
1 . शो का परिचयमहाभारत में एक से एक योद्धा थे। प्रत्येक व्यक्ति की दृष्टि में अलग-अलग योद्धा सर्वश्रेष्ठ हो सकते हैं। किसी के लिए अर्जुन सर्वश्रेष्ठ थे तो किसी के लिए कर्ण, किसी के लिए अश्वत्थामा तो किसी के लिए भीम। कोई बर्बरीक को तो कोई घटोत्कच को सर्वश्रेष्ठ योद्धा मानेगा। कोई एकलव्य को तो कोई द्रोण या भीष्म को। लेकिन हम क्या सोचते हैं, यह आपको बताएंगे। ' महायोद्धा' नामक इस शो में हम आपको महाभारत के इन सभी पराक्रमी योद्धा के बारे में बताएंगे। More | 01 min 19 sec | |||
2 . अमर अश्वत्थामामहाभारत काल के एक व्यक्ति जिनके बारे में यह माना जाता है कि वह आज भी जिंदा है। इस व्यक्ति का नाम है 'अश्वत्थामा'। यह कौरव और पाण्डवों के गुरु द्रोणाचार्य के पुत्र थे। उन्होंने महाभारत के युद्ध में कौरवों की ओर से युद्ध किया था। लेकिन अपनी एक गलती के कारण उन्हें एक श्राप मिला था, जिसके कारण वह दुनिया खत्म होने तक जीवित रहेंगे और भटकेंगे। आइये सुनते हैं कि उन्हें ऐसा श्राप किस कारण मिला? More | 09 min 21 sec | |||
3 . पराक्रमी अर्जुनपराक्रम यानि हर काम को करने की क्षमता। महाभारत के सभी पात्रों में से केवल अर्जुन ही एकमात्र ऐसे योद्धा थे, जोकि किसी भी चुनौती या परेशानी का सामना करने में समर्थ थे। अर्जुन के सामने चाहे जो भी परिस्थिति आई, उन्होंने अपने पराक्रम से उसका सामना बड़ी ही आसानी से किया। आइये पराक्रमी अर्जुन की कुछ विशेष कहानियों के बारे में ध्यान से सुने। More | 10 min 43 sec | |||
4 . महाक्रोधी परशुरामभगवान परशुराम ऐसे युग पुरूष हैं जो त्रैता युग (रामायण-काल) से दुआपर युग (महाभारत काल) तक उल्लेखनीय रहे हैं, लेकिन उन को एक महा क्रोधी के रूप में ही प्रस्तुत किया जाता है। उनके क्रोध का प्रमाण गोस्वामि तुलसीदास रचित राम चरित मानस के लक्षमण-परशुराम संवाद में दिया गया है। आइये सुनते भगवान् परशुराम के क्रोध को दर्शाती कथा। More | 07 min 22 sec | |||
5 . महाबली दुर्योधनदुर्योधन महाभारत के पात्र राजा धृतराष्ट्र और रानी गांधारी के सौ पुत्रों में सबसे बड़ा कौरव था। राजा का पहला पुत्र होने के नाते, वह कुरु वंश और उसकी राजधानी हस्तिनापुर का राजकुमार था। परंतु दुर्योधन अपने चचेरे भाई और कुरु वंश के सबसे बड़े पुत्र युधिष्ठर से छोटा था। कर्ण दुर्योधन का सबसे करीबी मित्र था। दुर्योधन महाभारत युद्ध का एक प्रमुख योद्धा व पात्र था । महाभारत के युद्ध का कारण भी दुर्योधन की महत्वाकांक्षाए थी। अंत: दुर्योधन के दो बड़े अवगुण क्रोध और अहंकार ही उसके पतन का कारण बने। आइये जानते हैं कि कौरवपुत्र दुर्योधन को महाबली क्यों माना जाता है। More | 12 min 37 sec | |||
6 . महाबली भीमस्वयं राजा धृतराष्ट्र ने भीम की वीरता का वर्णन करते हुए कहा था कि महाबाहु भीम इन्द्र के समान तेजस्वी हैं। वे अपनी सेना में, युद्ध में भीम के समान किसी को भी नहीं समझते थे। भीम अस्त्रविद्या में गुरु द्रोण के समान, वेग में वायु के समान और क्रोध में महेश्वर के तुल्य हैं। राजा धृतराष्ट्र का यह कथन सर्वथा सत्य है। भीमसेन महाभारत के अद्वितीय योद्धा थे। महाभारत के युद्ध में उन्होंने अद्भुत पराक्रम का प्रदर्शन किया था। अन्त में दुर्योधन को गदायुद्ध में परास्त कर के उन्होंने पाण्डवों के लिये विजयश्री प्राप्त की। आइये सुनते हैं महाबली भीम की कहानी। More | 12 min 11 sec | |||
7 . महाबली, महापराक्रमी, महारथी भीष्म पितामहभीष्म अथवा भीष्म पितामह महाभारत के सबसे महत्वपूर्ण पात्रों में से एक थे। भीष्म महाराजा शान्तनु और देव नदी गंगा की आठवीं सन्तान थे | भीष्म में अपने पिता शान्तनु का सत्यवती से विवाह करवाने के लिए आजीवन ब्रह्मचर्य का पालन करने की भीषण प्रतिज्ञा की थी | अपने पिता के लिए इस तरह की पितृभक्ति देख उनके पिता ने उन्हें इच्छा मृत्यु का वरदान दे दिया था | उन्होंने राजा होने के बावजूद आजीवन हस्तिनापुर के सिंहासन के संरक्षक की भूमिका निभाई। अपनी प्रतिज्ञा का पालन करते हुए महाभारत में उन्होने कौरवों की तरफ से युद्ध में भाग लिया था। यह कौरवों के पहले प्रधान सेनापति थे जो सर्वाधिक दस दिनो तक कौरवों के प्रधान सेनापति रहे थे। आइये सुनते हैं भीष्म पितामह की कहानी। More | 14 min 52 sec | |||
8 . महारथी कर्णमहाभारत के युद्ध में कर्ण को ऐसे योद्धा के रूप में जाना जाता है, जिनसे स्वंय श्रीकृष्ण बेहद प्रभावित थे। उनके व्यक्तित्व के कई ऐसे गुण थे, जो उन्हें एक अच्छा योद्धा होने के साथ एक अच्छा इंसान भी बनाते थे। इस संसार में कर्ण जैसा योद्धा, कर्ण जैसा दानी, कर्ण जैसा मित्र कोई है ही नहीं, जिसने इक अधर्मी से मित्रता निभायी और इक धर्म युद्ध के लिये अपने प्राण भी दान कर दिए। ऐसे थे महारथी कर्ण लेकिन फिर भी उनसे कुछ गलतियां ऐसी हो गईं, जो उनकी मृत्यु का कारण बन गई। आइये सुनते हैं महारथी कर्ण की कथा। More | 11 min 49 sec | |||
9 . माता कुंतीमाता कुंती महाभारत में वर्णित पांडवों में से बड़े तीन की माता थीं। कुन्ती पंच-कन्याओं में से एक हैं जिन्हें चिर-कुमारी कहा जाता है। कुन्ती वसुदेव जी की बहन और भगवान श्रीकृष्ण की बुआ थी। नागवंशी महाराज कुन्तिभोज ने कुन्ती को गोद लिया था। ये हस्तिनापुर के नरेश महाराज पांडु की पहली पत्नी थीं। कुंती को महर्षि दुर्वासा ने एक वरदान दिया था जिसमें कुंती किसी भी देवता का आवाहन कर सकती थी और उन देवताओं से संतान प्राप्त कर सकती थी। पाण्डु एवं कुंती ने इस वरदान का प्रयोग किया एवं धर्मराज, वायु एवं इंद्र देवता का आवाहन किया। युधिष्ठर यमराज और कुंती के पुत्र थे। भीम वायु और कुंती के पुत्र थे। अर्जुन इन्द्र और कुंती के पुत्र थे। कुंती ने विवाह के पहले सूर्य देव का आवाहन किया था।सूर्य से कुंती को पुत्र प्राप्त हुआ, जिसका नाम कर्ण था। कर्ण को कुन्ती ने लोक लाज के कारण नदी मे बहा दिया था । कुन्ती एक तपस्वी स्त्री थी, ये हस्तिनापुर राज्य की महारानी और इन्द्रप्रस्थ सम्राज्य की राजमाता थीं। More | 07 min 06 sec | |||
10 . मायावी घटोत्कचद्रौपदी के अतिरिक्त भीम की एक अन्य पत्नी का नाम हिडिंबा था, जिससे भीम का परमवीर पुत्र घटोत्कच उत्पन्न हुआ था। घटोत्कच ने ही इन्द्र द्वारा कर्ण को दी गई अमोघ शक्ति को अपने ऊपर चलवाकर अर्जुन के प्राणों की रक्षा की थी। घट-हाथी का मस्तक + उत्कच= केशहीन। इसका मस्तक हाथी के मस्तक जैसा और केश शून्य होने के कारण यह घटोत्कच नाम से प्रसिद्ध हुआ। यह असल में मिश्र संतान था, इस कारण इसमें मनुष्यों और राक्षसों की विशेषताएँ विद्यमान थीं। पाण्डवों को राज्य की तथा संतान की प्राप्ति होने से पहले इसकी प्राप्ति हो गई थी। वनवास के समय पाण्डवों को इससे और इसके जाति-भाइयों से बड़ी सहायता मिली थी। यह पाण्डवों को अपना आत्मीय समझता था और वे भी इस पर पुत्र जैसा स्नेह रखते थे। More | 06 min 31 sec |
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