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धनुर्धारी एकलव्य

धनुर्धारी एकलव्य

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0hr 13m

Language

Hindi

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Stories

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"दोस्तों, आवाज़.कॉम आपके लिए लाया है एक नया शो जिसका नाम है, एकलव्य- एक महान धनुर्धारी। कहते हैं ना कि नदी को रास्ता नहीं दिखाना पड़ता, वो खुद-ब-खुद अपना रास्ता बना लेती है। इसी प्रकार पुराने समय में एक ऐसा शिष्य हुआ जिसने अपने हुनर और गुरु भक्ति से अपना नाम इतिहास में दर्ज करवा लिया। वो वीर योद्धा था, एकलव्य। लेकिन इस वीर योद्धा की जिंदगी का आरंभ और अंत कैसे हुआ। आइये जानते हैं ,वीर एकलव्य की कहानी विस्तार में। "

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एकलव्य का जन्म

1 - एकलव्य का जन्म

03 min 01 sec

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एकलव्य और गुरु द्रोणाचार्य की भेंट

2 - एकलव्य और गुरु द्रोणाचार्य की भेंट

03 min 26 sec

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धनुर्विद्या का अभ्यास

3 - धनुर्विद्या का अभ्यास

02 min 01 sec

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एकलव्य की गुरु दक्षिणा

4 - एकलव्य की गुरु दक्षिणा

03 min 15 sec

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एकलव्य की मृत्यु

5 - एकलव्य की मृत्यु

02 min 13 sec

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धनुर्धारी एकलव्य

Stories|Hindi|5 Episodes
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About Show

"दोस्तों, आवाज़.कॉम आपके लिए लाया है एक नया शो जिसका नाम है, एकलव्य- एक महान धनुर्धारी। कहते हैं ना कि नदी को रास्ता नहीं दिखाना पड़ता, वो खुद-ब-खुद अपना रास्ता बना लेती है। इसी प्रकार पुराने समय में एक ऐसा शिष्य हुआ जिसने अपने हुनर और गुरु भक्ति से अपना नाम इतिहास में दर्ज करवा लिया। वो वीर योद्धा था, एकलव्य। लेकिन इस वीर योद्धा की जिंदगी का आरंभ और अंत कैसे हुआ। आइये जानते हैं ,वीर एकलव्य की कहानी विस्तार में। "

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एकलव्य का जन्म

1 . एकलव्य का जन्म

"राजा हिरणधनु की पत्नी सुलेखा थी। इसके बाद इन दोनों से उत्तराधिकारी की प्राप्ति हुई। एकलव्य, निषाद राजा हिरणधनु का ही पुत्र था, महाभारत काल में निषाद जाति को शूद्र माना जाता था। उस बालक को गुरु, धनुष चलाने की विद्या सिखाते थे तो वह वैसे ही उस विद्या को ग्रहण कर लेता था। इस गुण को देखकर ही गुरु ने अभय का नाम एकलव्य रख दिया जिसका अर्थ होता है -देखकर धनुष चलाने वाला।"

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एकलव्य और गुरु द्रोणाचार्य की भेंट

2 . एकलव्य और गुरु द्रोणाचार्य की भेंट

इस एपिसोड में हम सुनेंगे, कैसे एकलव्य और गुरु द्रोणाचार्य मिले और क्यों गुरु द्रोणाचार्य ने एकलव्य को शिक्षा देने से मना कर दिया था। तो चलिए दोस्तों, सुनते हैं।

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03 min 26 sec

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धनुर्विद्या का अभ्यास

3 . धनुर्विद्या का अभ्यास

"एकलव्य गुरु द्रोणाचार्य की मूर्ति बनाकर उसके सामने धनुर्विद्या का अभ्यास करने लगा। जब एकलव्य को किसी विद्या को सीखने में परेशानी आती तो वो खुद से ही सवाल जवाब कर कर उसका हल ढूंढ लेता था। इस प्रकार एकलव्य का अभ्यास जारी रहा और वह एक सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर बन गया। इसके बाद एकलव्य ने धनुर्विद्या में महारत हासिल कर ली। "

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एकलव्य की गुरु दक्षिणा

4 . एकलव्य की गुरु दक्षिणा

"गुरु द्रोणाचार्य ने एकलव्य से उनके दाहिने हाथ का अंगूठा मांग लिया। फिर एकलव्य ने मुस्कुराते हुए अपने दाहिने हाथ का अंगूठा गुरु द्रोणाचार्य को दक्षिणा के रूप में दे दिया। फिर उसके बाद क्या हुआ जानते हैं, आगे के एपिसोड में। "

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एकलव्य की मृत्यु

5 . एकलव्य की मृत्यु

"निषाद नगर का राजा बनने के बाद एकलव्य ने जरासंध की तरफ से मथुरा पर आक्रमण किया था। जब श्री कृष्ण ने एकलव्य को 4 अंगुलियों के सहारे धनुष बाण चलाते हुए देखा। तो उन्हें विश्वास ही नहीं हुआ एकलव्य अकेले ही सैकड़ों यादव वंशी योद्धाओं को मार चुका था। इसी युद्ध में श्रीकृष्ण ने छल से एकलव्य का वध किया था। "

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02 min 13 sec

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