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मीरा बाई-जोगन श्रीकृष्ण की

मीरा बाई-जोगन श्रीकृष्ण की

Duration

1hr 20m

Language

Hindi

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Devotional

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"विश्व की महान कवित्रियों में कृष्ण भक्ति शाखा की कवियित्री राजस्थान की मीरा बाई का जीवन समाज को अलग ही संदेश देता है वहीं इनके जीवन चरित्र को आधुनिक युग की कई फिल्मों, साहित्य और कॉमिक्स का विषय बनाया गया हैं। मीरा बाई का जीवन प्रारंभ से ही कृष्ण भक्ति से प्रेरित रहा और वे जीवन भर बावजूद विषम परिस्थितियों के कृष्ण भक्ति में लीन रही। कोई भी बाधा उनका मन कृष्ण भक्त से विमुख नहीं कर सकी। कृष्ण भक्ति में रत रहकर वे अमर हो गई और आज भी उनका नाम पूरी श्रृद्धा, आदर और सम्मान के साथ स्मरण किया जाता है। "

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कृष्ण उपासिनी मीराबाई का परिचय

1 - कृष्ण उपासिनी मीराबाई का परिचय

07 min 26 sec

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मीराबाई के जन्म और विवाह से जुड़ी कथा

2 - मीराबाई के जन्म और विवाह से जुड़ी कथा

07 min 26 sec

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मीराबाई का वैवाहिक जीवन

3 - मीराबाई का वैवाहिक जीवन

05 min 40 sec

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मीराबाई के पति का निधन

4 - मीराबाई के पति का निधन

06 min 22 sec

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मीराबाई और सती प्रथा

5 - मीराबाई और सती प्रथा

06 min 19 sec

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मीराबाई को जान से मारने की साज़िश - भाग १

6 - मीराबाई को जान से मारने की साज़िश - भाग १

06 min 38 sec

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मीराबाई को जान से मारने की साज़िश - भाग २

7 - मीराबाई को जान से मारने की साज़िश - भाग २

06 min 38 sec

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चित्तौड़ छोड़ने के बाद क्या हुआ मीराबाई के साथ

8 - चित्तौड़ छोड़ने के बाद क्या हुआ मीराबाई के साथ

06 min 38 sec

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जब मीराबाई पहुंची वृन्दावन

9 - जब मीराबाई पहुंची वृन्दावन

06 min 38 sec

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मीराबाई की बादशाह अकबर से मुलाक़ात

10 - मीराबाई की बादशाह अकबर से मुलाक़ात

06 min 53 sec

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मीरा बाई-जोगन श्रीकृष्ण की

Devotional|Hindi|12 Episodes
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About Show

"विश्व की महान कवित्रियों में कृष्ण भक्ति शाखा की कवियित्री राजस्थान की मीरा बाई का जीवन समाज को अलग ही संदेश देता है वहीं इनके जीवन चरित्र को आधुनिक युग की कई फिल्मों, साहित्य और कॉमिक्स का विषय बनाया गया हैं। मीरा बाई का जीवन प्रारंभ से ही कृष्ण भक्ति से प्रेरित रहा और वे जीवन भर बावजूद विषम परिस्थितियों के कृष्ण भक्ति में लीन रही। कोई भी बाधा उनका मन कृष्ण भक्त से विमुख नहीं कर सकी। कृष्ण भक्ति में रत रहकर वे अमर हो गई और आज भी उनका नाम पूरी श्रृद्धा, आदर और सम्मान के साथ स्मरण किया जाता है। "

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कृष्ण उपासिनी मीराबाई का परिचय

1 . कृष्ण उपासिनी मीराबाई का परिचय

मीरा बाई भगवान श्रीकृष्ण की सबसे बड़ी भक्त मानी जाती है। मीरा बाई ने जीवनभर भगवान कृष्ण की भक्ति की ओर कहा जाता है कि उनकी मृत्यु भी भगवान की मूर्ति में समा कर हुई थी। हिंदू चंद्र कैलेंडर के अनुसार, शरद पूर्णिमा के दिन को मीराबाई की जयंती के रूप में मनाया जाता है। मीरा बाई के जीवन से जुड़ी कई बातों को आज भी रहस्य माना जाता है। इस शो में हम आपको मीरा बाई के जीवन और मृत्यु से जुड़ी कुछ ख़ास बातें बताने जा रहे हैं।

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07 min 26 sec

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मीराबाई के जन्म और विवाह से जुड़ी कथा

2 . मीराबाई के जन्म और विवाह से जुड़ी कथा

मीराबाई जोधपुर, राजस्थान के मेड़ता राजकुल की राजकुमारी थीं। मीराबाई मेड़ता महाराज के छोटे भाई रतन सिंह की एकमात्र संतान थीं। मीरा जब केवल दो वर्ष की थीं, उनकी माता की मृत्यु हो गई। इसलिए इनके दादा राव दूदा उन्हें मेड़ता ले आए और अपनी देख-रेख में उनका पालन-पोषण किया। मीराबाई का जन्म 1498 के लगभग हुआ था। आइए सुनते हैं उनके जन्म से जुड़ी कहानियां।

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मीराबाई का वैवाहिक जीवन

3 . मीराबाई का वैवाहिक जीवन

मीराबाई की शादी मेवाड़ के राजपूत राज्य के राजकुमार, भोजराज के साथ हो गई थी। भगवान कृष्ण के प्रति उनकी भक्ति उनके पति और परिवार को स्वीकार्य नहीं थी। मीराबाई कृष्ण के प्रेम में इतनी मग्न रहती थीं कि वह अक्सर अपनी जिम्मेदारियों पर ध्यान नहीं दे पाती थीं। यहाँ तक कि मीराबाई ने अपने ससुराल में कुल देवी “देवी दुर्गा” की पूजा करने से भी इंकार कर दिया था। इस कारण उनके साथ क्या-क्या हुआ सुनिए इस एपिसोड में।

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05 min 40 sec

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मीराबाई के पति का निधन

4 . मीराबाई के पति का निधन

मीरा का विवाह राणा सांगा के पुत्र और मेवाड़ के राजकुमार भोज राज के साथ सन 1516 में संपन्न हुआ। उनके पति भोज राज दिल्ली सल्तनत के शाषकों के साथ एक संघर्ष में सन 1518 में घायल हो गए और इसी कारण सन 1521 में उनकी मृत्यु हो गयी। पति की मृत्यु से मीराबाई के जीवन में क्या-क्या बदलाव आए, जानिये इस एपिसोड में।

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06 min 22 sec

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मीराबाई और सती प्रथा

5 . मीराबाई और सती प्रथा

मीराबाई के पति की मृत्यु के कुछ वर्षों के अन्दर ही उनके पिता और ससुर भी मुग़ल साम्राज्य के संस्थापक बाबर के साथ युद्ध में मारे गए। ऐसा कहा जाता है कि उस समय की प्रचलित प्रथा के अनुसार पति की मृत्यु के बाद मीरा को उनके पति के साथ सती करने का प्रयास किया गया किन्तु वे इसके लिए तैयार नही हुईं और धीरे-धीरे वे संसार से विरक्त हो गयीं और साधु-संतों की संगति में कीर्तन करते हुए अपना समय व्यतीत करने लगीं।

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मीराबाई को जान से मारने की साज़िश - भाग १

6 . मीराबाई को जान से मारने की साज़िश - भाग १

राणा विक्रमादित्य मीराबाई को अत्यधिक कष्ट दे रहे थे। राणा ने अपनी बहन ऊदाबाई को भी मीरा को समझाने के लिए भेजा, पर कोई फल न हुआ। वे कुल मर्यादा को छोड़कर भक्त जीवन अपनाए रहीं। मीरा को स्त्री होने के कारण, चित्तौड़ के राजवंश की कुलवधू होने के कारण तथा अकाल में विधवा हो जाने के कारण अपने समाज तथा वातावरण से जितना विरोध सहना पड़ा उतना कदाचित ही किसी अन्य भक्त को सहना पड़ा हो। यहां तक की राणा विक्रमादित्य ने उन्हें मारने के लिए षड़यंत्र भी रचा, परन्तु उसमें सफल ना हो पाए।

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06 min 38 sec

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मीराबाई को जान से मारने की साज़िश - भाग २

7 . मीराबाई को जान से मारने की साज़िश - भाग २

श्री कृष्ण की दीवानी मीराबाई को मारने की कोशिश में एक अन्य किवंदति के मुताबिक एक बार राणा विक्रम सिंह ने उन्हें मारने के लिए कांटो की सेज (बिस्तर) भेजा, लेकिन, ऐसा कहा जाता है कि, उनके द्वारा भेजी गई कांटो की सेज भी फूलों के बिस्तर में बदल गयी। श्री कृष्ण की अनन्य प्रेमिका और कठोर साधक मीराबाई की हत्या के सारे प्रयास विफल होने के पीछे लोगों का यह मानना है कि, भगवान श्री कृष्ण अपनी परम भक्त की खुद आकर सुरक्षा करते थे, कई बार तो श्री कृष्ण ने उन्हें साक्षात दर्शन भी दिए थे।

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चित्तौड़ छोड़ने के बाद क्या हुआ मीराबाई के साथ

8 . चित्तौड़ छोड़ने के बाद क्या हुआ मीराबाई के साथ

जब यातनाएं बर्दाश्त से बाहर हो गईं, तो मीराबाई ने चित्तौड़ छोड़ दिया। वे पहले मेड़ता गईं, लेकिन जब उन्हें वहां भी संतोष नहीं मिला तो कुछ समय के बाद उन्होने कृष्ण-भक्ति के केंद्र वृंदावन का रुख कर लिया। मीरा मानती थीं कि वह गोपी ललिता ही हैं, जिन्होंने फिर से जन्म लिया है। ललिता कृष्ण के प्रेम में दीवानी थीं। खैर, मीरा ने अपनी तीर्थयात्रा जारी रखी, वे एक गांव से दूसरे गांव नाचती-गाती पूरे उत्तर भारत में घूमती रहीं। माना जाता है कि उन्होंने अपने जीवन के अंतिम कुछ साल गुजरात के द्वारका में गुजारे। ऐसा कहा जाता है कि दर्शकों की पूरी भीड़ के सामने मीरा द्वारकाधीश की मूर्ति में समा गईं।

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जब मीराबाई पहुंची वृन्दावन

9 . जब मीराबाई पहुंची वृन्दावन

वृंदावन भगवान श्री कृष्ण की लीला स्थली रही है। ऐसा माना जाता है कि वृंदावन के कण-कण में श्री कृष्ण समाये हुए हैं। ऐसे स्थान के बारे में यह कहा जाए कि "यहां सिर्फ एक पुरूष है और शेष सभी स्त्रियां", तो सुनकर आप शायद हैरान हो जाएंगे। लेकिन यह पूरी तरह सच है, और यह हम नहीं कृष्ण की अनन्य भक्त मीरा कहती हैं।

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06 min 38 sec

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मीराबाई की बादशाह अकबर से मुलाक़ात

10 . मीराबाई की बादशाह अकबर से मुलाक़ात

मीरा द्वारा रची गई कविताओं और मंदिर में जाकर सुरीली आवाज़ में कीर्तन करने की प्रशंसा अकबर को चारों ओर से मिलने लगी। अकबर हमेशा से ही सभी धर्मों का सम्मान करने के लिए जाने जाते थे, खासतौर पर हिन्दू धर्म के लिए उनके ज़हन में खास महत्व था। इसलिए खुद मीराबाई की आवाज़ में कृष्ण भजन सुनने बादशाह अकबर उनसे भेंट करने गए।

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06 min 53 sec

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