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मालगुडी डेज़ की कहानियाँ : सीज़न १

मालगुडी डेज़ की कहानियाँ : सीज़न १

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Hindi

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मालगुडी भारत के प्रख्यात लेखक आर. के. नारायण द्वारा रचित एक काल्पनिक शहर है और इसी तर्ज पर कन्नड़ अभिनेता और निर्देशक शंकर नाग ने इस पर 1986 में एक टीवी सीरियल का निर्देशन भी किया जिसे 'मालगुडी डेज़' कहते हैं | मालगुडी दक्षिण भारत के मद्रास से कुछ घंटो की दूरी पर स्थित एक काल्पनिक गाँव है जिसे आर. के. नारायण ने अपनी कल्पना में बनाया | यह शहर मेम्पी जंगल के पास सरयू नदी के किनारे बसा हुआ है | इस जगह की वास्तविकता के बारे में खुद आर. के. नारायण भी अनजान थे | कई लोग इसे कोइम्बतुर में मानते है क्योंकि वहा पर भी ऐसी ही इमारते और घर थे। आज आवाज़.कॉम आपके लिए 'मालगुडी डेज़' की वही कहानियां लेकर आए जिसे अपने बचपन में पढ़कर और देखकर आपको बेहद आनंद आता था। 'मालगुडी डेज़' की इस श्रृंखला में आपको ऐसी कहानियां सुनने को मिलेंगी जो आपको मनोरंजन के साथ जीवन से जुड़ी सरल लेकिन अहम सीख देती है।

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45 रूपए महीने

1 - 45 रूपए महीने

11 min 55 sec

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अंधा कुत्ता

2 - अंधा कुत्ता

12 min 19 sec

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अत्तिला

3 - अत्तिला

10 min 35 sec

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बाघ का पंजा

4 - बाघ का पंजा

14 min 53 sec

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डॉक्टर के शब्द

5 - डॉक्टर के शब्द

12 min 11 sec

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एक रूखी हुई चिट्ठी

6 - एक रूखी हुई चिट्ठी

14 min 21 sec

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गेटकीपर का इनाम

7 - गेटकीपर का इनाम

19 min 43 sec

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हरे कोट के पीछे

8 - हरे कोट के पीछे

10 min 30 sec

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ज्योत्षी का एक दिन

9 - ज्योत्षी का एक दिन

12 min 33 sec

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कितनी पूर्णता

10 - कितनी पूर्णता

11 min 07 sec

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मालगुडी डेज़ की कहानियाँ : सीज़न १

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मालगुडी भारत के प्रख्यात लेखक आर. के. नारायण द्वारा रचित एक काल्पनिक शहर है और इसी तर्ज पर कन्नड़ अभिनेता और निर्देशक शंकर नाग ने इस पर 1986 में एक टीवी सीरियल का निर्देशन भी किया जिसे 'मालगुडी डेज़' कहते हैं | मालगुडी दक्षिण भारत के मद्रास से कुछ घंटो की दूरी पर स्थित एक काल्पनिक गाँव है जिसे आर. के. नारायण ने अपनी कल्पना में बनाया | यह शहर मेम्पी जंगल के पास सरयू नदी के किनारे बसा हुआ है | इस जगह की वास्तविकता के बारे में खुद आर. के. नारायण भी अनजान थे | कई लोग इसे कोइम्बतुर में मानते है क्योंकि वहा पर भी ऐसी ही इमारते और घर थे। आज आवाज़.कॉम आपके लिए 'मालगुडी डेज़' की वही कहानियां लेकर आए जिसे अपने बचपन में पढ़कर और देखकर आपको बेहद आनंद आता था। 'मालगुडी डेज़' की इस श्रृंखला में आपको ऐसी कहानियां सुनने को मिलेंगी जो आपको मनोरंजन के साथ जीवन से जुड़ी सरल लेकिन अहम सीख देती है।

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45 रूपए महीने

1 . 45 रूपए महीने

"कभी-कभी अपने परिवार की ज़रूरतों को पूरा करने में आप उनकी खुशियों पर ध्यान देना भूल जाते हैं। कुछ ऐसा ही शांता के पिताजी वेंकटराव के साथ भी हो रहा था। शांता पिछले कई दिनों से अपने पिताजी के दिए हुए समय पर उनके साथ बहार घूमने जाने के लिए तैयार हो जाती हैं लेकिन, वेंकटराव को हर बार उसका मैनेजर उसे ज़्यादा काम देकर रोक लेता है, जिस कारण वे शांता को बाहर नहीं ले जा पाता था। शांता बहुत दुखी हो जाती है। ऐसे में अपनी बच्ची को दिया वादा लगातार पूरा ना कर पाने के कारण वेंकटराव मैनेजर से बात करने जाता है। "

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11 min 55 sec

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अंधा कुत्ता

2 . अंधा कुत्ता

"अंधा कुत्ता' एक राह चलते कुत्ते की कहानी है जो एक अंधे भिखारी से दोस्ती करता है। उस अंधे आदमी की देखभाल करने वाली बूढ़ी औरत जब मर जाती है, तो वह आदमी कुत्ते को मारना शुरू कर देता है और उसे लेकर सड़कों पर भीख मांगने निकल पड़ता है। उसे इस बात का एहसास होता है कि इस प्रकार उसकी आमदनी बढ़ रही है। इसलिए वह और भी ज़्यादा लालची बन जाता है और अपना काम निकलवाने के लिए कुत्ते को लगातार मारता रहता है। जब मार्केट में यह बात फैलती है कि असल में वो भिखारी अब इतना अमीर बन चुका है कि दूसरों को पैसे उधार देता है, तो लोग कैंची से कुत्ते का पट्टा काट देते हैं और कुत्ता वहां से भाग जाता है। कुछ हफ़्तों बाद अंधा भिखारी और कुत्ता फिर दिखाई देते हैं। इस बार कुत्ते के गले में मेटल का पट्टा होता है। अंधा आदमी कहता है कि कुछ रातों रात उसका कुत्ता उसके पास वापस आ गया था।"

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12 min 19 sec

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अत्तिला

3 . अत्तिला

"यह कहानी 'अत्तिला' नामक एक प्यारे से कुत्ते की कहानी है। एक परिवार जिसके पड़ोस में आए दिन कोई-ना कोई नया रहने चला आता है, वे एक दिन अपनी सुरक्षा के लिए कुत्ता लेकर आते हैं। यह कुत्ता बहुत प्यार होता है, सभी के साथ आसानी से घुल-मिल जाता है और अपने बाग़ से दूसरों को फूल भी चुराने देता है। परिवार के लोग कुत्ते को रात में घर के अंदर ही रखते हैं। एक रात, रंगा नामक एक चोर गहने चोरी करने के लिए आता है। अत्तिला उसे अपना दोस्त बनाने के लिए इतना उत्साहित होता है कि वह उसका पीछा करने लगता है। परिवार को लगता है कि गहनों के साथ कुत्ता भी चोरी हो गया, लेकिन वे अत्तिला को चोर का पीछा करते हुए देखते हैं। रंगा डर के मारे सारे गहने वापस कर देता है। पुलिस रंगा को गिरफ्तार करती है और अत्तिला की प्रशंसा होती है।"

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10 min 35 sec

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बाघ का पंजा

4 . बाघ का पंजा

"यह कहानी एक बातूनी आदमी और एक बाघ की कहानी है। कुछ शिकारी एक मरे हुए बाघ को शहर लेकर आते हैं, और कुछ बच्चों को उसकी कहानी सुनाते हैं। जब वह बातूनी आदमी एक फर्टिलाइज़र सेल्समैन था, तब वह एक बार रात में एक छोटे से गाँव के ट्रेन स्टेशन में रुका था। उसने सोने से पहले स्टेशन का दरवाज़ा खुला ही छोड़ा था क्योंकि वहां बहुत गर्मी थी। बीच रात वहां अचानक से एक बाघ घुसा और उसने आदमी को जगाया। आदमी छपाक से उठकर फर्नीचर के पीछे जाकर छिप गया, जहां बाघ का सिर्फ एक पंजा पहुंच सकता था। बाघ के पीछे हटने से पहले आदमी चाकू से उसके पंजे की तीन उंगलियां काट देता है। शहर में, बच्चे बाघ का पंजा देखने की ज़िद करते हैं। निश्चित रूप से उसके पंजे की तीन उंगलियां गायब होती हैं। शिकारियों का कहना है कि कुछ आदिवासी बाघों के बच्चों को ले जाना और उनके पंजे की उंगलियाँ काटना शुभ मानते हैं। "

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14 min 53 sec

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डॉक्टर के शब्द

5 . डॉक्टर के शब्द

"डॉ रमन अपने मरीज़ के जीवन और मृत्यु से जुड़ी भविष्यवाणी करने के लिए प्रख्यात है। उनकी भविष्यवाणी कभी गलत साबित नहीं हुई है। लेकिन उन्हें एक अजीब भविष्यवाणी होती है जब वे दोस्त गोपाल के मृत्यु से जुड़ी भविष्यवाणी करते हैं। गोपाल जानना चाहता है कि वह कब तक जीवित रहनेवाला है क्योंकि उसे अपनी विल साइन करनी है। यदि इस विल पर उसकी साइन नहीं होगी, तो उसका परिवार सड़क पर आ जाएगा। लेकिन अगर डॉ रमन उसे साइन करने देते हैं, तो उसका मतलब है कि वे अपने दोस्त को उम्मीद की एक किरण भी नहीं दे रहे हैं। बहुत सोचने के बाद, डॉ रमन गोपाल से झूठ बोलने का फैसला लेते हैं। वह उसे कहते हैं उसे अभी डरने की ज़रूरत नहीं है और वह आगे अभी बहुत साल जीनेवाला है। लेकिन सर्जरी के बाद, गोपाल सच में पूरी तरह से ठीक हो जाता है और यह देख डॉ रमन आश्चर्यचकित रह जाते हैं।"

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12 min 11 sec

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एक रूखी हुई चिट्ठी

6 . एक रूखी हुई चिट्ठी

"एक रूखी हुई चिट्ठी' थनप्पा नामक एक डाकिये की कहानी है। वह अपने परिवार को अपने काम से अधिक महत्व देता है। वह 'विनायक मुदाली स्ट्रीट' के सभी लोगों से बहुत करीब है, खासकर रामानुजम और उसके परिवार से। थनप्पा जानता था कि रामानुजम अपनी बेटी की शादी को लेकर चिंतित हैं। हालांकि रामानुजम के ससुर ने शादी के लिए rs.5000 की बचत की थी, लेकिन फिर भी उसे अपनी बेटी के लिए कोई योग्य वर नहीं मिल रहा था। थनप्पा ने दिल्ली में एक लड़का देख रखा था। लड़के का परिवार कामाक्षी से मिला और उनकी बात बन गयी। शादी की तारीख 20 मार्च से पहले रखना ज़रूरी था क्योंकि उसके बाद लड़का अगले 3 साल तक शादी नहीं कर सकता था। इस बीच, शादी के ठीक पहले, थानप्पा के हाथ रामानुजम के नाम का खत लगा जिसमे लिखा था कि उसके चाचा का देहांत हो चुका है। थानप्पा ने उस खत के बारे में रामानुजम को नहीं बताया, क्योंकि अगर वह बताता, तो उसकी बेटी की शादी फिर टल जाती। हालांकि, शादी के बाद उसने रामानुजम को सब सच बता दिया। शुरुआत में रामानुजम को बहुत गुस्सा आया, लेकिन फिर उसने थानप्पा को माफ़ कर दिया क्योंकि उसका इरादा नेक था। "

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14 min 21 sec

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गेटकीपर का इनाम

7 . गेटकीपर का इनाम

"यह कहानी गेटकीपर गोविंद सिंह की है जिन्हें अपनी पच्चीस साल की नौकरी पूरी करने के बाद अब ऐसा लगता है की वे पागल हो चुके हैं। रिटायरमेंट के बाद उनके लिए मुसीबतें तब बढ़ती हैं, जब वे अपने खाली समय में गुड़ियाँ और अलग-अलग जगहों के मॉडल बनाना शुरू करते हैं। जैसे- कोई बाज़ार, उनका पुराना दफ्तर इत्यादि। उनकी इस कला के लिए ऑफिस में उनकी बहुत सराहा होती है। वे अपनी कुछ कृतियाँ अपने जनरल मैनेजर को भेंट में भी देते हैं। उन्हें एक एम्प्लॉय से पता चलता है कि जनरल मैनेजर को ये कृतियाँ बहुत अच्छी लगती है। यह सुनकर गोविन्द बेहद ख़ुश होते हैं। गोविंद सिंह अपने ऑफिस का एक मॉडल बनाकर उन्हें भेंट करते हैं जिसके कुछ दिनों बाद उन्हें एक मेल आता है जिसे देखते ही वे घबरा जाते हैं। (इससे पहले भी उन्हें दो बार मेल मिले थे जिन्हे पढ़ने से पहले ही उन्हें घबराहट होती थी।)"

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19 min 43 sec

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हरे कोट के पीछे

8 . हरे कोट के पीछे

"राजू एक पाकिट मार है, लेकिन वह हमेशा से अपनी पत्नी को झूठ बोलता आ रहा है कि वह बिज़नेस कर पैसे कमाता है। एक दिन वह ग्रीन ब्लेज़र वाले एक आदमी का पीछा करता है जो अपनी बेटी के लिए गुब्बारे लेकर जा रहा होता है। मौक़ा मिलते ही राजू उसका पाकिट मार लेता है। पर्स से पैसे निकालते समय राजू की नज़र उन गुब्बारों पर पड़ती है जो वह आदमी उसकी बेटी के लिए ले जा रहा था। उसे सोचकर बुरा लगता है कि जब वह घर लौटेगा और उसकी बेटी को गुब्बारे नहीं दिखेंगे तो उसे कितना दुःख होगा। राजू उन गुब्बारों को दोबारा पर्स में रख उसके ब्लेज़र के पाकिट में डालने जा ही रहा होता है कि पुलिस आकर उसे पकड़ लेती है। पुलिस राजू को बहुत मारती है। तब वह निश्चय करता है कि आगे से वह किसी के भी प्रति सहानुभति नहीं दिखाएगा। "

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10 min 30 sec

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ज्योत्षी का एक दिन

9 . ज्योत्षी का एक दिन

"एक शराबी और देहाती जमींदार एक साधारण किसान का लगातार शोषण करता था। यातना से परेशान किसान एक दिन अपने ज़मींदार को कुएं में धकेलकर, पकड़े जाने के डर से भाग जाता है। लेकिन जमींदार फिर भी बच जाता है क्योंकि कुआँ सूखा होता है। उसके बाद कई वर्षों तक वह किसान से बदला लेने के लिए तड़पता रहता है। फिर एक दिन, उसे एक प्रसिद्ध ज्योतिष के बारे में पता चलता है जो किसी भी चीज की भविष्यवाणी कर सकते हैं। ज्योतिषी में विश्वास ना रखते हुए भी, जमींदार अपने एक दोस्त के कहने पर उस ज्योतिष से मिलने जाता है। जमींदार दंग रह जाता है जब ज्योतिष उसे उसके और किसान के बीच हुई सारी घटना अपने आप सुनाता है। जब जमींदार उसे किसान के ठिकाने के बारे में पूछता है तो ज्योतिषी बताता है कि किसान की एक भयानक हादसे में मौत हो चुकी है और अब उसे उसको ढूंढना बंद कर देना चाहिए। जमींदार यह सुनकर खुश होता है। ज्योतिष इसके बाद जब घर लौटकर अपना सारा भेंस हटाता है, तो पता चलता है कि वह और कोई नहीं बल्कि खुद किसान है। वह इतने सालों से इसी ग़म में था कि उसने ज़मींदार की ह्त्या की थी। परन्तु जब उसने उसे जीवित देखा, तो राहत की सांस भरी, खुश हुआ

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12 min 33 sec

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कितनी पूर्णता

10 . कितनी पूर्णता

"यह कहानी एक ऐसे मूर्तिकार की है जो पाँच साल की महनत के बाद एक मूर्ति को पूरा कर पाता है। यह भगवान नटराज की मूर्ति है, जिन्हे हर कोई एक परिपूर्ण देवता मानता है। इसलिए उनकी मूर्ति भी ऐसी होनी चाहिए, जिसे देखते ही लोग उनकी आभा को महसूस कर सके। पुजारी मूर्तिकार से मूर्ति के एक अंगूठे को तोड़ने के लिए कहते हैं ताकि वह देखने पर सुरक्षित रहे, लेकिन मूर्तिकार ऐसा नहीं करता। बदले में पुजारी मंदिर में पूजा करने से मना कर देते हैं। मूर्तिकार अपने घर को ही एक मंदिर में बदल देता है ताकि वह वहां पर पूजा कर सके। यह देखकर भगवान खुद हर तरह की प्राकृतिक आपदा उत्पन्न कर इस क्षेत्र का नाश करते हैं। ऐसा होने पर क्षेत्र के कई निवासी मूर्तिकार से विनती करते हैं की वह सब की भलाई के लिए मूर्ति की पूर्णता को कुर्बान करे, पर वह ऐसा नहीं करता। वह खुद को भगवान् को समर्पित करने के लिए झील में डूबने के लिए निकलता ही है कि उसके घर पर एक पेड़ गिर जाता है। वह वापस आकर देखता है, तो मूर्ति के एक अंगूठे के अलावा और कुछ भी टूटता नहीं है। अब जाकर इस मूर्ति की स्थापना मंदिर में होती है और मूर्तिकार अपना व्यापार बंद कर देता ह

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