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मंटो की कहानियां - सीज़न 2

मंटो की कहानियां - सीज़न 2

Duration

3hr 13m

Language

Hindi

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Stories

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"सआदत हसन मंटो एक पाकिस्तानी लेखक और नाटककार हैं। उनका जन्म ब्रिटिश भारत के लुधियाना में हुआ था। मुख्य रूप से उर्दू भाषा में लिखते हुए, उन्होंने लघु कहानियों के 22 संग्रह, एक उपन्यास, रेडियो नाटकों की पांच श्रृंखला, निबंधों के तीन संग्रह, व्यक्तिगत रेखाचित्रों के दो संग्रह तैयार किए। उनकी सर्वश्रेष्ठ लघु कथाएँ लेखकों और आलोचकों द्वारा उच्च सम्मान में आयोजित की जाती हैं। मंटो समाज की कठिन सच्चाइयों के बारे में लिखने के लिए जाने जाते थे जिनके बारे में बात करने की हिम्मत किसी में नहीं थी। तो इस शो सुनेंगे वह चुनिंदा कहानियां जिनके वजह से मंटो दुनियाभर मशहूर हुए। "

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ब्लाउज़

1 - ब्लाउज़

27 min 03 sec

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डरपोक

2 - डरपोक

22 min 15 sec

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मिसेस डिकोस्टा

3 - मिसेस डिकोस्टा

22 min 01 sec

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मिस टीन वाला

4 - मिस टीन वाला

19 min 02 sec

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नंगी आवाज़ें

5 - नंगी आवाज़ें

17 min 29 sec

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फुंदने

6 - फुंदने

21 min 51 sec

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शाह दूले का चूहा

7 - शाह दूले का चूहा

13 min 38 sec

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शिकारी औरतें

8 - शिकारी औरतें

13 min 05 sec

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"आँखें  "

9 - "आँखें "

11 min 17 sec

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1919 की एक बात

10 - 1919 की एक बात

25 min 42 sec

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मंटो की कहानियां - सीज़न 2

Stories|Hindi|10 Episodes
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About Show

"सआदत हसन मंटो एक पाकिस्तानी लेखक और नाटककार हैं। उनका जन्म ब्रिटिश भारत के लुधियाना में हुआ था। मुख्य रूप से उर्दू भाषा में लिखते हुए, उन्होंने लघु कहानियों के 22 संग्रह, एक उपन्यास, रेडियो नाटकों की पांच श्रृंखला, निबंधों के तीन संग्रह, व्यक्तिगत रेखाचित्रों के दो संग्रह तैयार किए। उनकी सर्वश्रेष्ठ लघु कथाएँ लेखकों और आलोचकों द्वारा उच्च सम्मान में आयोजित की जाती हैं। मंटो समाज की कठिन सच्चाइयों के बारे में लिखने के लिए जाने जाते थे जिनके बारे में बात करने की हिम्मत किसी में नहीं थी। तो इस शो सुनेंगे वह चुनिंदा कहानियां जिनके वजह से मंटो दुनियाभर मशहूर हुए। "

EpisodesDuration
ब्लाउज़

1 . ब्लाउज़

"यह कहानी युवावस्था के आरम्भ में शरीर में होने वाले परिवर्तनों का श्रेष्ठ वर्णन है। मोमिन एक ऐसे घर में मुलाज़िम है जिसमें शकीला और रज़िया दो खुले विचारों वाली बहनें रहती हैं। शकीला मोमिन के सामने ही ब्लाउज़ नापती, सिलती और पहन कर देखती है जिसके नतीजे में मोमिन के दिमाग़ में विभिन्न प्रकार के विचारों का हुजूम रहने लगता है और फिर एक दिन वो नए आनंद से परिचित होता है।"

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27 min 03 sec

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डरपोक

2 . डरपोक

"यह कहानी एक ऐसे शख़्स की है जो औरत की शदीद ख़्वाहिश होने के चलते रंडीख़ाने पर जाता है। उसने अभी तक की अपनी ज़िंदगी में किसी औरत को छुआ तक नहीं था। न ही उसने अभी तक किसी से इज़हार-ए-मोहब्बत किया था। ऐसा नहीं था कि उसे कभी कोई मौक़ा न मिला हो। मगर उसे जब भी कोई मौक़ा मिला वह किसी अनजाने ख़ौफ़़ के चलते उस पर अमल न कर सका। मगर पिछले कुछ दिनों से उसे औरत की बेहद ख़्वाहिश हो रही थी। इसलिए वह उस जगह तक चला आया था। रंडीख़ाना उससे एक गली दूर था, पर पता नहीं किस डर के चलते उस गली को पार नहीं कर पा रहा था। अंधेरे में तन्हा खड़ा हुआ वह आस-पास के माहौल को देखता है और अपने डर पर क़ाबू पाने की कोशिश करता है। मगर इस से पहले कि वह डर को अपने क़ाबू में करे, डर उसी पर हावी हो गया और वह वहाँ से ऐसे ही ख़ाली हाथ लौट गया।"

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22 min 15 sec

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मिसेस डिकोस्टा

3 . मिसेस डिकोस्टा

"यह एक ईसाई औरत की कहानी है, जिसे अपनी पड़ोसन के गर्भ में बहुत ज़्यादा दिलचस्पी है। गर्भवती पड़ोसन के दिन पूरे हो चुके हैं, लेकिन बच्चा है कि पैदा होने का नाम ही नहीं ले रहा है। मिसेज़ डिकोस्टा हर रोज़़ उससे बच्चे की पैदाइश के बारे में पूछती है। साथ ही उसे मोहल्ले भर की ख़बरें भी बताती जाती हैं। उन दिनों देश में शराब-बंदी क़ानून की माँग बढ़ती जा रही थी, जिसके कारण मिसेज़ डिकोस्टा बहुत परेशान थी। फिर भी वह अपनी गर्भवती पड़ोसन का बहुत ख़याल रखती है। एक दिन उसने पड़ोसन को घर बुलाया और उसका पेट देखकर बताया कि बच्चा कितने दिनों में और क्या (लड़का या लड़की) पैदा होगा।"

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22 min 01 sec

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मिस टीन वाला

4 . मिस टीन वाला

यह एक मनोवैज्ञानिक मरीज़़ के मानसिक उलझाव और परेशानियों पर आधारित कहानी है। ज़ैदी साहब एक शिक्षित व्यक्ति हैं और बंबई में रहते हैं। पिछले कुछ दिनों से वह एक बिल्ले की अपने घर में आमद-ओ-रफ़्त से परेशान हैं। वह बिल्ला इतना ढीट है कि डराने, धमकाने या फिर मारने के बाद भी टस से मस नहीं होता। खाने के बाद भी वह उसी तरह अकड़ के साथ ज़ैदी साहब को घूरता हुआ घर से बाहर चला जाता है। उसके इस रवय्ये से ज़ैदी साहब इतने परेशान होते हैं कि वह दोस्त लेखक से मिलने चले आते हैं। वह अपने दोस्त की अपनी स्थिति और उस बिल्ले की हठधर्मी की पूरी दास्तान सुनाते हैं तो फिर लेखक के याद दिलाने पर उन्हें याद आता है कि बचपन में स्कूल के बाहर मिस टीन वाला आया करता था, जो मि. ज़ैदी पर आशिक़ था। वह भी उस बिल्ले की ही तरह ठीट, अकड़ वाला और हर मार-पीट से बे-असर रहा करता था।

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19 min 02 sec

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नंगी आवाज़ें

5 . नंगी आवाज़ें

"इस कहानी में शहरी ज़िंदगी के मसाइल को उजागर किया गया है। भोलू एक मज़दूर पेशा आदमी है। जिस बिल्डिंग में वो रहता है उसमें सारे लोग रात में गर्मी से बचने के लिए छत पर टाट के पर्दे लगा कर सोते हैं। उन पर्दों के पीछे से आने वाली मुख्तलिफ़ आवाज़ें उसके अंदर जिन्सी हैजान पैदा करती हैं और वो शादी कर लेता है। लेकिन शादी की पहली ही रात उसे महसूस होता है कि पूरी बिल्डिंग के लोग उसे देख रहे हैं। इसी उधेड़ बुन में वो बीवी की अपेक्षाओं को पूरा नहीं कर पाता और जब बीवी की ये बात उस तक पहुँचती है कि उसके अंदर कुछ कमी है तो उसका मानसिक संतुलन बिगड़ जाता है और फिर वो जहाँ टाट का पर्दा देखता है उखाड़ना शुरू कर देता है।"

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17 min 29 sec

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फुंदने

6 . फुंदने

"कहानी का मौज़ू सेक्स और हिंसा है। कहानी में एक साथ इंसान और जानवर दोनों को पात्र के रूप में पेश किया गया है। जिन्सी अमल से पैदा होने वाले नतीजों को स्वीकार न कर पाने की स्थिति में बिल्ली के बच्चे, कुत्ते के बच्चे, ढलती उम्र की औरतें जिनमें जिन्सी कशिश बाक़ी नहीं, वे सब के सब मौत का शिकार होते नज़र आते हैं।"

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21 min 51 sec

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शाह दूले का चूहा

7 . शाह दूले का चूहा

"मज़हब के नाम पर गोरख धंधा करने वालों की कहानी है। शाह दूले के मज़ार के बारे में यह अक़ीदा राइज कर दिया गया था कि यहाँ मन्नत मानने के बाद अगर बच्चा होता है तो पहला बच्चा शाह दूले का चूहा है और उस बच्चे को मज़ार पर छोड़ना ज़रूरी है। सलीमा को अपना पहला बच्चा मुजीब इसी अक़ीदे से मज़ार पर छोड़ना पड़ा, लेकिन वह उसका ग़म अपने सीने से लगाये रही। एक मुद्दत के बाद जब मुजीब उसके दरवाज़े पर शाह दूल्हे का चूहा बन कर आता है तो सलीमा उसे तुरंत पहचान लेती है और तमाशा दिखाने वाले से पाँच सौ के बदले उसे ले लेती है, लेकिन जब वह पैसे देकर वापस अंदर आती है तो मुजीब ग़ायब हो चुका होता है।"

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13 min 38 sec

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शिकारी औरतें

8 . शिकारी औरतें

"यह कहानी मर्दों के शिकार पर निकली औरतों पर आधारित है। इसमें बंबई और लाहौर की उन औरतों के क़िस्से बयान किए गए हैं, जो बिना किसी वजह के राह चलते मर्दों के साथ हो लेती हैं। ये औरतें उन मर्दों के साथ अपना समय बिताती हैं, या फिर उनसे पैसे ऐंठती हैं।"

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13 min 05 sec

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"आँखें  "

9 . "आँखें "

यह अतृप्त भावनाओं की कहानी है। आँखों की रोशनी से वंचित हनीफ़ा को वह अस्पताल में देखता है तो उसकी पुरकशिश आँखों पर फ़िदा हो जाता है। हनीफ़ा के रवय्ये से महसूस होता है कि यह अस्पताल उसके लिए बिल्कुल नई जगह है, इसलिए वह उसकी मदद के लिए आगे आता है। उसकी पुरकशिश आँखों की गहराई में डूबे रहने के लिए झूट बोल कर कि उसका घर भी हनीफ़ा के घर के रास्ते में है, वह उसके साथ घर तक जाता है। मंज़िल पर पहुंचने के बाद जब वह तांगे से उतरने के लिए बदरू का सहारा लेती है तब पता चलता है कि यह आँख की रौशनी से वंचित है और फिर...

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11 min 17 sec

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1919 की एक बात

10 . 1919 की एक बात

यह कहानी आज़ादी के संघर्ष में अंग्रेज़ की गोली से शहीद होने वाले एक वेश्या के बेटे की है। तुफ़ैल उर्फ़ थैला कंजर की दो बहनें भी वेश्या थीं। तुफ़ैल एक अंग्रेज़ को मौत के घाट उतार कर ख़ुद शहीद हो गया था। अंग्रेज़ों ने बदला लेने के उद्देश्य से उसकी दोनों बहनों को बुला कर मुजरा कराया और उनकी इज़्ज़त को तार-तार किया।

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25 min 42 sec

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