पान सिंह तोमर
Duration
1hr 53m
Language
Hindi
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Category
Stories
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1 - भारतीय सेना में भर्ती
11 min 01 sec
8
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2 - भाग 1 - एथलीट बनने का सफर
11 min 26 sec
1
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3 - भाग 2 - एथलीट बनने का सफर
08 min 39 sec
1
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4 - सेना में दौड़ का प्रशिक्षण
07 min 31 sec
2
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5 - स्टीपल चेज
07 min 13 sec
4
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6 - इंटरव्यू विथ पान सिंह तोमर
06 min 12 sec
3
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7 - युद्ध में न जा पाने की निराशा
05 min 52 sec
1
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8 - फ़ौज से समयपूर्व सेवानिवृति
05 min 59 sec
1
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9 - जमीन विवाद
05 min 53 sec
1
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10 - पुलिस से मदद न मिलने की निराशा
06 min 06 sec
3
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पान सिंह तोमर
About Show
| Episodes | Duration | |||
1 . भारतीय सेना में भर्ती"बीहड़ों को चीरकर बहती चंबल नदी, जो गवाह है एक ऐसी कहानी की जो अब तक अनसुनी है, कहानी एक फौजी की, कहानी एक खिलाड़ी की और कहानी एक डकैत की। ये कहानी शुरु होती है खेल के मैदान से लेकिन खत्म होती है चंबल के बीहड़ों में और कहानी का नायक है डाकू सूबेदार पान सिंह तोमर। तो चलिए, शरुआत करते है उनकी कहानी की। " More | 11 min 01 sec | |||
2 . भाग 1 - एथलीट बनने का सफर"इस एपिसोड में हम सुनेंगे पान सिंह तोमर के एथलीट बन ने के किस्से को। जब पान सिंह को सेना के एक बड़े ऑफिसर की ओर से सीमित खाना लेने को कहा गया तो उन्होंने उनसे कहा की उनकी इतनी ही खुराक है, इस पर ऑफिसर ने उनसे कहा खिलाडियों को खाने-पीने पर कोई रोक नहीं है। तब पान सिंह ने खेलों में भाग लेने का विचार किया। लेकिन सवाल यह था की वह कौन से खेल में शामिल हो। " More | 11 min 26 sec | |||
3 . भाग 2 - एथलीट बनने का सफर"भारतीय सेना के एक पार्टी में पान सिंह की ड्यूटी लगी थी। ड्यूटी के दौरान उन्होंने २ ऑफिसर्स को खिलाडियों की आवश्यकता होने के बारे में बात करते हुए सुना। पान सिंह ने तब कहा की वे अच्छा भागते भी है। ऑफिसर से उनकी बात होने पर ऑफिसर ने उनके हाथ पर आइसक्रीम पकड़ाया और उस आइसक्रीम के पिघलने से पहले उनके मेहमान के बंगले तक पहुंचाने को कहा। पान सिंह ने बिलकुल वैसा ही कर दिखाया और इस तरह उनके एथलीट बन ने का सफर की शुरआत हुई। " More | 08 min 39 sec | |||
4 . सेना में दौड़ का प्रशिक्षण"इस एपिसोड में हम सुनेंगे कैसे पान सिंह ने एक फौजी से एक नेशनल चैंपियन तक का सफर तय किया। प्रतिदिन 7 मील दौड़कर मजबूत बने पान सिंह जब फौज में भर्ती हुआ तो सेना के कोच ने इस प्रतिभा को पहचाना। फिर आर्मी कोच ने इस लंबी कद काठी के जवान को लंबी दूरी की दौड़ में आजमाना शुरू किया। इस से उन्हें पता चला कि तेज चलने की बाधा दौड़ (स्टीपल चेज) में पान सिंह की लंबी कूद की प्रतिभा का भी फायदा मिल सकता है।" More | 07 min 31 sec | |||
5 . स्टीपल चेज"पूर्व नेशनल कोच जोगेंदर सिंह सैनी के मुताबिक पान सिंह की स्टीपल चेज में इतना पारंगत था कि जब किसी पानी भरे पूल की बाधा आती थी तो पान सिंह एक छलांग में उसे न सिर्फ पार कर जाता था बल्कि जंप के लैंड होते ही बगैर संतुलन खोए दौड़ना शुरू कर देता था। यह देखते हुए कोच ने उन्हें स्टीपल चेज में भाग लेने को कहा। आगे क्या होता है कहानी में चलिए सुनते है। " More | 07 min 13 sec | |||
6 . इंटरव्यू विथ पान सिंह तोमर"इस एपिसोड में हम सुनेंगे, पान सिंह का इंटरव्यू लेने गए ज्ञानप्रकाश और पान सिंह का एक किस्सा जो खाने के मेज़ पर बैठे हुए हुआ था। खाने के बाद ज्ञानप्रकाश ने उनसे सवाल किया की क्या कभी वह फ़ौज में किसी युद्ध या जंग में शामिल हुए थे ? यह सवाल सुनकर पान सिंह के चेहरे पर ज्ञानप्रकश ने एक उदासी देखी। चलिए सुनते हैं, ऐसा क्या हुआ था। " More | 06 min 12 sec | |||
7 . युद्ध में न जा पाने की निराशा"इस एपिसोड में हम सुनेंगे उस किस्से के बारे में जिस वजह से पान सिंह जंग में भाग न ले पाए। 1962 में जंग की शरुआत हो चुकी थी। पान सिंह भी उस जंग में हिस्सा लेना चाहते थे। लेकिन फ़ौज में खिलाडियों का जंग में शामिल होने पर सख़्त मनाई थी। काफी बिनती के बाद भी उन्हें मौका नहीं दिया गया। आगे फिर क्या होता है चलिए सुनते है। " More | 05 min 52 sec | |||
8 . फ़ौज से समयपूर्व सेवानिवृति"रिटायरमेंट लेने के बाद जब पान सिंह अपने पैतृक गांव लौटे तो वो भ्रष्ट सिस्टम का शिकार हो गए। उनके परिवार के सदस्यों ने उनकी ज़मीन गलत तरीके से अपने कब्जे में कर ली थी, जिसका उन्होंने विरोध किया। मगर प्रशासन ने उनके साथ सहयोग नहीं किया। फिर आगे क्या हुआ सुनते हैं, अगले एपिसोड में। " More | 05 min 59 sec | |||
9 . जमीन विवाद"इस एपिसोड में हम सुनेंगे, क्या ऐसा हुआ पान सिंह के साथ की उन्हें पुलिस और पंचायतों की मदद मांगने के सोचना पड़ा। मध्यप्रदेश में मुरैना के पास अपने गांव आने के बाद। वहां वह एक जमीन विवाद में फंस गए। उन्होंने वहां की पुलिस और पंचायत से संपर्क करने का विचार किया। क्या प्रशाशन उनकी मदद करेंगे? चलिए सुनते हैं, आगे के एपिसोड्स में " More | 05 min 53 sec | |||
10 . पुलिस से मदद न मिलने की निराशा"जमीन विवाद में फँसे पान सिंह वहां की पुलिस और पंचायत से संपर्क किया लेकिन कोई मदद नहीं मिली। उन्होंने पुलिस और पंचायत को अपना सोने का पदक तथा उन पर हुए शोषण से जुड़ी अखबार की कतरनें और तस्वीरें भी दिखाईं ताकि वे उनकी बातों को गंभीरता से लें। अपनी शिकायतों पर कोई सुनवाई न होते देख वो निराश हुए और वहा परिवार में झगडे बढ़ते ही जा रहे थे। " More | 06 min 06 sec |
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