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राहत इंदौरी के रंग

राहत इंदौरी के रंग

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0hr 32m

Language

Hindi

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Category

Entertainment

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राहत इंदौरी के शायराना मिज़ाज को कोई एक नाम नहीं दिया जा सकता। उनकी कलम से सियासी तंज की ख़ूब इबारत निकलीं, तो वहीं उन्होंने फ़िल्मों के लिए भी गाने लिखे, साथ ही रूमानी शायरी भी कही। राहत साहब जब मंच पर आते हैं, तो लोग उन्हें बड़े रोमांच से सुनते हैं। लोग जितना रोमांच से उन्हें सुनते हैं उसी उत्साह के साथ उन्हें पढ़ते भी हैं। इसलिए आज हम इस शो के माध्यम से, उनकी रूमानी ग़ज़लें आपके लिए लेकर आए हैं।

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दरमियाँ एक ज़माना रखा जाए

1 - दरमियाँ एक ज़माना रखा जाए

02 min 34 sec

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धूप समंदर चेहरा है

2 - धूप समंदर चेहरा है

02 min 27 sec

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दीये जलाये तो अंजाम क्या हुआ मेरा

3 - दीये जलाये तो अंजाम क्या हुआ मेरा

03 min 45 sec

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दांव पर मैं भी, दांव पर तू भी

4 - दांव पर मैं भी, दांव पर तू भी

02 min 46 sec

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अपने होने का हम इस तरह पता देते थे

5 - अपने होने का हम इस तरह पता देते थे

02 min 49 sec

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बैठे-बैठे कोई ख़्याल आया

6 - बैठे-बैठे कोई ख़्याल आया

02 min 24 sec

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ज़िन्दगी भर दूर रहने की सज़ाएं रह गयी

7 - ज़िन्दगी भर दूर रहने की सज़ाएं रह गयी

02 min 00 sec

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मुआफ़िक जो फ़ज़ा तैयार की है

8 - मुआफ़िक जो फ़ज़ा तैयार की है

03 min 09 sec

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पहली शर्त जुदाई है

9 - पहली शर्त जुदाई है

03 min 13 sec

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पुराने शहरों के मंज़र निकलने लगते हैं

10 - पुराने शहरों के मंज़र निकलने लगते हैं

02 min 49 sec

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राहत इंदौरी के रंग

Entertainment|Hindi|12 Episodes
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About Show

राहत इंदौरी के शायराना मिज़ाज को कोई एक नाम नहीं दिया जा सकता। उनकी कलम से सियासी तंज की ख़ूब इबारत निकलीं, तो वहीं उन्होंने फ़िल्मों के लिए भी गाने लिखे, साथ ही रूमानी शायरी भी कही। राहत साहब जब मंच पर आते हैं, तो लोग उन्हें बड़े रोमांच से सुनते हैं। लोग जितना रोमांच से उन्हें सुनते हैं उसी उत्साह के साथ उन्हें पढ़ते भी हैं। इसलिए आज हम इस शो के माध्यम से, उनकी रूमानी ग़ज़लें आपके लिए लेकर आए हैं।

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दरमियाँ एक ज़माना रखा जाए

1 . दरमियाँ एक ज़माना रखा जाए

शो के पहले एपिसोड में सुनिये राहत इंदौरी साहब की सबसे बेहतरीन नज़्मों में से एक 'दरमियाँ' एक ज़माना रखा जाए'

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धूप समंदर चेहरा है

2 . धूप समंदर चेहरा है

इस एपिसोड में सुनिये राहत इंदौरी साहब की एक विचारशील कविता 'धूप समंदर चेहरा है'

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02 min 27 sec

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दीये जलाये तो अंजाम क्या हुआ मेरा

3 . दीये जलाये तो अंजाम क्या हुआ मेरा

इस एपिसोड में सुनिये राहत इंदौरी साहब की एक और खूबसूरत कविता 'दीये जलाये तो अंजाम क्या हुआ मेरा'

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03 min 45 sec

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दांव पर मैं भी, दांव पर तू भी

4 . दांव पर मैं भी, दांव पर तू भी

इस एपिसोड में सुनिये राहत इंदौरी साहब की और मशहूर कविता 'दांव पर मैं भी, दांव पर तू भी'

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02 min 46 sec

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अपने होने का हम इस तरह पता देते थे

5 . अपने होने का हम इस तरह पता देते थे

इस एपिसोड में सुनिये राहत इंदौरी साहब की कविता 'अपने होने का हम इस तरह पता देते थे'

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02 min 49 sec

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बैठे-बैठे कोई ख़्याल आया

6 . बैठे-बैठे कोई ख़्याल आया

इस एपिसोड में सुनिये राहत इंदौरी साहब की कविता 'बैठे-बैठे कोई ख़्याल आया'

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ज़िन्दगी भर दूर रहने की सज़ाएं रह गयी

7 . ज़िन्दगी भर दूर रहने की सज़ाएं रह गयी

इस एपिसोड में सुनिये राहत इंदौरी साहब की कविता 'ज़िन्दगी भर दूर रेहने की सज़ाएं रह गयी' जो ज़िन्दगी जीने के फ़ल्सफ़ों के बारे में बात करती है.

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02 min 00 sec

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मुआफ़िक जो फ़ज़ा तैयार की है

8 . मुआफ़िक जो फ़ज़ा तैयार की है

इस एपिसोड में सुनिये राहत इंदौरी साहब की कविता 'मुआफ़िक जो फ़ज़ा तैयार की है.'

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03 min 09 sec

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पहली शर्त जुदाई है

9 . पहली शर्त जुदाई है

इस एपिसोड में सुनिये राहत इंदौरी साहब की कविता 'पहली शर्त जुदाई है'

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03 min 13 sec

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पुराने शहरों के मंज़र निकलने लगते हैं

10 . पुराने शहरों के मंज़र निकलने लगते हैं

इस एपिसोड में सुनिये राहत इंदौरी साहब की कविता 'पुराने शहरों के मंज़र निकलने लगते हैं'

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02 min 49 sec

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