रंग-ए-ग़ज़ल - ग़ज़लों की दुनिया सीजन 4
Duration
0hr 51m
Language
Urdu
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Category
Urdu Shows
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1 - इमाम बक़्श नासीख़ - जान हम तुझपे दिया करते हैं
04 min 49 sec
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2 - इब्न-ए-इंशा - कुछ कहने का वक़्त नहीं ये
04 min 45 sec
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3 - हैदर अली आतिश - सुन तो सही जहाँ में है तेरा फ़साना क्या
07 min 09 sec
1
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4 - हफ़ीज़ जालंधरी - कोई चारा नहीं दुआ के सिवा
05 min 03 sec
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5 - दाग़ देहलवी - लुत्फ़ वो इश्क़ में पाए हैं कि जी जानता है
04 min 54 sec
3
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6 - बहादुर शाह ज़फ़र - कहूं तो किस से कहूं
05 min 12 sec
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7 - अकबर इलाहाबादी - आंखें मुझे तलवों से वो मलने नहीं देते
05 min 18 sec
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8 - अमीर मीनाई - ऐ ज़ब्त देख इश्क़ की उन को ख़बर न हो
05 min 20 sec
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9 - अल्लामा इक़बाल - गेसू-ए-ताबदार को और भी ताबदार कर
04 min 42 sec
3
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10 - आह संभल - कल हमारा भी गुलिस्तां में बसेरा था मगर
03 min 53 sec
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रंग-ए-ग़ज़ल - ग़ज़लों की दुनिया सीजन 4
About Show
| Episodes | Duration | |||
1 . इमाम बक़्श नासीख़ - जान हम तुझपे दिया करते हैंरंग-ए-ग़ज़ल' S4 के इस एपिसोड में सुनिए शायर इमाम बक़्श नासीख़ साहब की लिखी ग़ज़ल, जिसका नाम है 'जान हम तिझपे दिया करते हैं'। More | 04 min 49 sec | |||
2 . इब्न-ए-इंशा - कुछ कहने का वक़्त नहीं येरंग-ए-ग़ज़ल' S4 के इस एपिसोड में सुनिए शायर इब्न-ए-इंशा साहब की लिखी ग़ज़ल, जिसका नाम है 'कुछ कहने का वक़्त नहीं ये'। More | 04 min 45 sec | |||
3 . हैदर अली आतिश - सुन तो सही जहाँ में है तेरा फ़साना क्यारंग-ए-ग़ज़ल' S4 के इस एपिसोड में सुनिए शायर हैदर अली आतिश साहब की लिखी ग़ज़ल, जिसका नाम है 'सुन तो सही जहाँ में है तेरा फ़साना क्या'। More | 07 min 09 sec | |||
4 . हफ़ीज़ जालंधरी - कोई चारा नहीं दुआ के सिवारंग-ए-ग़ज़ल' S4 के इस एपिसोड में सुनिए शायर हफ़ीज़ जालंधरी साहब की लिखी ग़ज़ल, जिसका नाम है 'कोई चारा नहीं दुआ के सिवा'। More | 05 min 03 sec | |||
5 . दाग़ देहलवी - लुत्फ़ वो इश्क़ में पाए हैं कि जी जानता हैरंग-ए-ग़ज़ल' S4 के इस एपिसोड में सुनिए शायर दाग़ देहलवी साहब की लिखी ग़ज़ल, जिसका नाम है 'लुत्फ़ वो इश्क़ में पाए हैं कि जी जानता है'। More | 04 min 54 sec | |||
6 . बहादुर शाह ज़फ़र - कहूं तो किस से कहूंरंग-ए-ग़ज़ल' S4 के इस एपिसोड में सुनिए शायर बहादुर शाह ज़फ़र साहब की लिखी ग़ज़ल, जिसका नाम है 'कहूं तो किस से कहूं'। More | 05 min 12 sec | |||
7 . अकबर इलाहाबादी - आंखें मुझे तलवों से वो मलने नहीं देतेरंग-ए-ग़ज़ल' S4 के इस एपिसोड में सुनिए शायर अकबर इलाहाबादी साहब की लिखी ग़ज़ल, जिसका नाम है 'आंखें मुझे तलवों से वो मलने नहीं देते'। More | 05 min 18 sec | |||
8 . अमीर मीनाई - ऐ ज़ब्त देख इश्क़ की उन को ख़बर न होरंग-ए-ग़ज़ल' S4 के इस एपिसोड में सुनिए शायर अमीर मीनाई साहब की लिखी ग़ज़ल, जिसका नाम है 'ऐ ज़ब्त देख इश्क़ की उन को ख़बर न हो'। More | 05 min 20 sec | |||
9 . अल्लामा इक़बाल - गेसू-ए-ताबदार को और भी ताबदार कररंग-ए-ग़ज़ल' S4 के इस एपिसोड में सुनिए शायर अल्लामा इक़बाल साहब की लिखी ग़ज़ल, जिसका नाम है 'गेसू-ए-ताबदार को और भी ताबदार कर'। More | 04 min 42 sec | |||
10 . आह संभल - कल हमारा भी गुलिस्तां में बसेरा था मगररंग-ए-ग़ज़ल' S4 के इस एपिसोड में सुनिए शायर आह संभल साहब की लिखी ग़ज़ल, जिसका नाम है 'कल हमारा भी गुलिस्तां में बसेरा था मगर'। More | 03 min 53 sec |
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