श्रीमद्भगवद्गीता - अध्याय १३
Duration
2hr 7m
Language
Hindi
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Category
Devotional
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1 - श्लोक १
05 min 20 sec
12
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2 - श्लोक २
06 min 25 sec
6
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3 - श्लोक ३
05 min 25 sec
7
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4 - श्लोक ४
04 min 05 sec
5
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5 - श्लोक ५
06 min 00 sec
8
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6 - श्लोक ६ - श्लोक ७
05 min 21 sec
5
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7 - श्लोक ८ - श्लोक १२
03 min 52 sec
8
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8 - श्लोक १३
04 min 37 sec
5
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9 - श्लोक १४
05 min 08 sec
5
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10 - श्लोक १५
03 min 56 sec
6
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श्रीमद्भगवद्गीता - अध्याय १३
About Show
| Episodes | Duration | |||
1 . श्लोक १"अर्जुन उवाच प्रकृतिं पुरुषं चैव क्षेत्रं क्षेत्रज्ञमेव च । एतद्वेदितुमिच्छामि ज्ञानं ज्ञेयं च केशव" More | 05 min 20 sec | |||
2 . श्लोक २"श्रीभगवानुवाच इदं शरीरं कौन्तेय क्षेत्रमित्यभिधीयते। एतद्यो वेत्ति तं प्राहुः क्षेत्रज्ञ इति तद्विदः॥" More | 06 min 25 sec | |||
3 . श्लोक ३"श्रीभगवानुवाच क्षेत्रज्ञं चापि मां विद्धि सर्वक्षेत्रेषु भारत। क्षेत्रक्षेत्रज्ञयोर्ज्ञानं यत्तज्ज्ञानं मतं मम॥" More | 05 min 25 sec | |||
4 . श्लोक ४"तत्क्षेत्रं यच्च यादृक्च यद्विकारि यतश्च यत्। स च यो यत्प्रभावश्च तत्समासेन मे श्रृणु॥" More | 04 min 05 sec | |||
5 . श्लोक ५"ऋषिभिर्बहुधा गीतं छन्दोभिर्विविधैः पृथक् । ब्रह्मसूत्रपदैश्चैव हेतुमद्भिर्विनिश्चितैः ॥" More | 06 min 00 sec | |||
6 . श्लोक ६ - श्लोक ७"महाभूतान्यहङ्कारो बुद्धिरव्यक्तमेव च । इन्द्रियाणि दशैकं च पञ्च चेन्द्रियगोचराः ॥ इच्छा द्वेषः सुखं दुःखं सङ्घातश्चेतना धृतिः । एतत्क्षेत्रं समासेन सविकारमुदाहृतम् ॥" More | 05 min 21 sec | |||
7 . श्लोक ८ - श्लोक १२"अमानित्वमदम्भित्वमहिंसा क्षान्तिरार्जवम् । आचार्योपासनं शौचं स्थैर्यमात्मविनिग्रहः ॥ इन्द्रियार्थेषु वैराग्यमनहङ्कार एव च । जन्ममृत्युजराव्याधिदुःखदोषानुदर्शनम् ॥ असक्तिरनभिष्वङ्ग: पुत्रदारगृहादिषु । नित्यं च समचित्तत्वमिष्टानिष्टोपपत्तिषु ॥ मयि चानन्ययोगेन भक्तिरव्यभिचारिणी । विविक्तदेशसेवित्वमरतिर्जनसंसदि ॥ अध्यात्मज्ञाननित्यत्वं तत्वज्ञानार्थदर्शनम् । एतज्ज्ञानमिति प्रोक्तमज्ञानं यदतोऽन्यथा ॥" More | 03 min 52 sec | |||
8 . श्लोक १३"ज्ञेयं यत्तत्वप्रवक्ष्यामि यज्ज्ञात्वामृतमश्नुते । अनादिमत्परं ब्रह्म न सत्तन्नासदुच्यते ॥" More | 04 min 37 sec | |||
9 . श्लोक १४"सर्वतः पाणिपादं तत्सर्वतोऽक्षिशिरोमुखम् । सर्वतः श्रुतिमल्लोके सर्वमावृत्य तिष्ठति ॥" More | 05 min 08 sec | |||
10 . श्लोक १५"सर्वेन्द्रियगुणाभासं सर्वेन्द्रियविवर्जितम् । असक्तं सर्वभृच्चैव निर्गुणं गुणभोक्तृ च ॥" More | 03 min 56 sec |
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