स्वर्ण पदक ओलंपिक्स
Duration
0hr 58m
Language
Hindi
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Stories
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1 - 1928 ओलंपिक्स - मेजर ध्यानचंद
05 min 02 sec
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2 - 1932 ओलंपिक्स- इंडिया बनाम ऐन्ग्लो इंडिया
07 min 05 sec
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3 - 1936 ओलंपिक्स- भारतीय हॉकी टीम की हैट्रिक
05 min 35 sec
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4 - 1948 ओलंपिक्स- कप्तान किशनलाल का नेतृत्व
06 min 07 sec
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5 - 1952 ओलंपिक्स - पाँचवे स्वर्ण पदक का सफर
08 min 19 sec
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6 - 1956 ओलंपिक्स- बलबीर सिंह की कप्तानी
06 min 13 sec
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7 - 1964 ओलंपिक्स- पाकिस्तान से महामुकाबला
06 min 33 sec
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8 - 1980 ओलंपिक्स- कप्तान भास्करन
07 min 22 sec
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9 - 2008 ओलंपिक्स-अभिनव बिंद्रा
06 min 28 sec
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स्वर्ण पदक ओलंपिक्स
About Show
| Episodes | Duration | |||
1 . 1928 ओलंपिक्स - मेजर ध्यानचंद1928 में एम्सटर्डम में हुए ओलंपिक्स खेलों में वह भारत की ओर से सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी बने। उस टूर्नामेंट में ध्यानचंद ने 14 गोल किए। उस समय एक स्थानीय समाचार पत्र में लिखा था, 'यह हॉकी नहीं बल्कि जादू था और ध्यानचंद हॉकी के जादूगर हैं।' More | 05 min 02 sec | |||
2 . 1932 ओलंपिक्स- इंडिया बनाम ऐन्ग्लो इंडिया1932 के लॉस एंजेलिस ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीम ने मेजबान अमेरिका को 24-1 से रौंद डाला था. तब 11 अगस्त को मेजर ध्यानचंद की कप्तानी में भारतीय टीम ने गोलों की झड़ी लगाई थी. रूप सिंह ने 10 और खुद ध्यानचंद ने 8 गोल किए थे. उस ओलंपिक में भारत ने जापान को 11-1 से हराकर लगातार दूसरी बार स्वर्ण पदक जीता था. More | 07 min 05 sec | |||
3 . 1936 ओलंपिक्स- भारतीय हॉकी टीम की हैट्रिकसाल 1936 में नए नए कप्तान बनने के बाद ध्यानचंद पर लगातार तीन बार स्वर्ण पदक जीतने का दबाव था। एम्सटर्डम और लॉस एंजिल्स में टीम इंडिया हॉकी में स्वर्ण पदक जीत चुकी थी। बर्लिन ओलंपिक में ध्यानचंद को कप्तानी सौंपने को लेकर कोई असहमति नहीं थी। उन्होंने कप्तान बनने के बाद शानदार खेल का प्रदर्शन किया और ओलंपिक में गोल्ड मेडल की हैट्रिक पूरी कर दी। More | 05 min 35 sec | |||
4 . 1948 ओलंपिक्स- कप्तान किशनलाल का नेतृत्व1948 ओलंपिक खेलों में भारतीय हॉकी टीम के प्रदर्शन पर तो एक पूरी फिल्म बन चुकी है। गोल्ड नाम से बनी यह फिल्म टीम के मैनेजर तपन दास पर बनी थी। तपन दास का रोल अक्षय कुमार ने अदा किया था। फिल्म में दिखाया गया था कि कैसे कई मुश्किलों के बाद भारतीय टीम ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतती है। इस फिल्म की वजह से भी ये टूर्नामेंट और उस भारतीय टीम के बारे में ज्यादा लोगों को जानकारी मिली थी। More | 06 min 07 sec | |||
5 . 1952 ओलंपिक्स - पाँचवे स्वर्ण पदक का सफर24 जुलाई, 1952 की तारीख भारतीय हॉकी के इतिहास में दर्ज हो गया। भारतीय टीम ने 1952 के हेलसिंकी ओलंपिक के फाइनल में नीदरलैंड्स को हराकर जीत हासिल की और कुल मिलाकर पांचवीं बार स्वर्ण पदक जीता। देखा जाए तो फ़िनलैंड का सफर कैसा भी रहा हो, लेकिन भारतीय हॉकी टीम के लिए आदर्श था, जिसे फेवरेट माना जा रहा था। More | 08 min 19 sec | |||
6 . 1956 ओलंपिक्स- बलबीर सिंह की कप्तानीभारतीय टीम का स्वर्णिम दौर साल 1956 मेलबर्न ओलंपिक में देखने को मिला, जहां उन्होंने देश से आजाद होने के बाद पहली और टोटल दूसरी बार गोल्ड की हैट्रिक बनाई। पहले मैच में टीम इंडिया ने सिंगापुर को 6-0 से हराया। इसके बाद उन्होंने अफगानिस्तान को 14-0 से करारी शिकस्त दी। वहीं, अमेरिका को तो इस टीम ने 16-0 से हराया था। More | 06 min 13 sec | |||
7 . 1964 ओलंपिक्स- पाकिस्तान से महामुकाबलाभारतीय हॉकी टीम के ओलंपिक प्रभुत्व को कट्टरपंथी पाकिस्तान ने रोम 1960 में समाप्त कर दिया था, क्योंकि बाद में उन्हें फाइनल में 0-1 से हराकर अपना पहला ओलंपिक स्वर्ण पदक जीता। इसके 4 साल बाद एक बार फिर फाइनल मुकाबले में भारत का सामना पाकिस्तान से हुआ। पिछले खेल की तरह भारतीय टीम को इस बार भी कठिन चुनौती का सामना करना पड़ा। ईस्ट जर्मनी के खिलाफ उन्हें 1-1 से ड्रॉ खेलना पड़ा। इसके अलावा उन्होंने स्पेन, मलेशिया, बेल्जियम और नीदरलैंड को बहुत कम अंतर से हराया। आखिरी मुकाबलों में भारतीय टीम ने शानदार फॉर्म में वापसी की लेकिन फाइनल में पहुंचने वाली पाकिस्तान टीम अब तक अजेय थी। वहीं, सभी फाइनल मैच में पाकिस्तान को ही जीत का दावेदार मान रहे थे। More | 06 min 33 sec | |||
8 . 1980 ओलंपिक्स- कप्तान भास्करनगोल्ड मेडल के बिना 3 ओलंपिक खेलने के बाद भारतीय टीम का इंतजार साल 1980 मास्को में खत्म हुआ। साल 1968 और 1972 में उन्होंने कांस्य पदक जीता तो साल 1976 के ओलंपिक में टीम 7वें स्थान पर रही। साल 1980 में भी टीम काफी दबाव में थी और उनका सफर भी इतना आसान नहीं था। भारतीय टीम ने तंजानिया को 18-0 से हराया और उसके बाद क्यूबा को 13-0 से शिकस्त दी। भारतीय टीम को भी पता था कि उनका मुकाबला इन टीमों से नहीं था। More | 07 min 22 sec | |||
9 . 2008 ओलंपिक्स-अभिनव बिंद्राअभिनव बिंद्रा १० मीटर एयर रायफल स्पर्धा में भारत के एक प्रमुख निशानेबाज हैं। वे ११ अगस्त २००८ को बीजिंग ओलंपिक खेलों की व्यक्तिगत स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं। क्वालीफाइंग मुकाबले में ५९६ अंक हासिल करने के बाद बिंद्रा ने जबर्दस्त मानसिक एकाग्रता का परिचय दिया और अंतिम दौर में १०४.५ का स्कोर किया। उन्होंने कुल ७००.५ अंकों के साथ स्वर्ण पर निशाना साधने में कामयाबी हासिल की। बिंद्रा ने क्वालीफाइंग मुकाबले में चौथा स्थान हासिल किया था, जबकि उनके प्रतियोगी गगन नारंग बहुत करीबी अंतर से फाइनल में पहुंच पाने से वंचित रह गए। वे नौवें स्थान पर रहे थे। पच्चीस वर्षीय अभिनव बिंद्रा एयर राफल निशानेबाजी में वर्ष २००६ में विश्व चैम्पियन भी रह चुके हैं। More | 06 min 28 sec |
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