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ठुमरी - फणीश्वरनाथ रेणु

ठुमरी - फणीश्वरनाथ रेणु

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2hr 45m

Language

Hindi

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Stories

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"दोस्तों, आवाज़ हिंदी के नए शो "ठुमरी" फणीश्वरनाथ रेणु द्वारा लिखित में रेणु की नौ अतिचर्चित कहानियाँ संगृहीत हैं। इन कहानियों में जैसे कथाकार ने अपने प्राणों का रस घोल डाला है। 'ठुमरी' की कहानियाँ जीवन की सहज लय को मोहक सुरों में बाँधने का कलात्मक प्रयास हैं। इनमें पीड़ा और अवसाद की अनुगूँजें हैं, आनन्द और उल्लास के मुखरित कलरव-गान हैं।"

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परिचय

1 - परिचय

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रसप्रिया

2 - रसप्रिया

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पंचलाईट

3 - पंचलाईट

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नित्य लीला

4 - नित्य लीला

38 min 48 sec

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लालपान की बेगम

5 - लालपान की बेगम

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ठेस

6 - ठेस

13 min 51 sec

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सिरपंचमी का शगुन

7 - सिरपंचमी का शगुन

39 min 57 sec

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ठुमरी - फणीश्वरनाथ रेणु

Stories|Hindi|7 Episodes
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About Show

"दोस्तों, आवाज़ हिंदी के नए शो "ठुमरी" फणीश्वरनाथ रेणु द्वारा लिखित में रेणु की नौ अतिचर्चित कहानियाँ संगृहीत हैं। इन कहानियों में जैसे कथाकार ने अपने प्राणों का रस घोल डाला है। 'ठुमरी' की कहानियाँ जीवन की सहज लय को मोहक सुरों में बाँधने का कलात्मक प्रयास हैं। इनमें पीड़ा और अवसाद की अनुगूँजें हैं, आनन्द और उल्लास के मुखरित कलरव-गान हैं।"

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परिचय

1 . परिचय

"ठुमरी एक कथा-संग्रह है जिसके रचयता फणीश्वर नाथ रेणु हैं। ठुमरी नामक इस कथा संग्रह में विविध प्रकार की कहानियाँ हैं और ठुमरी शीर्षक से कोई कहानी न होते हुए भी इसलिए लेखक ने इसका नाम ठुमरी नामक गायन विधा के नाम पर रखा है, जिसमें मिश्रित भावों और रागों का निरूपण होता है, क्योंकि यह संग्रह विविध प्रकार और भाव वाली कहानियों का संग्रह है।"

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रसप्रिया

2 . रसप्रिया

"आजादी के बाद उभरे प्रयोगधर्मी और जमीन से जुड़े लेखकों में प्रमुख स्थान रखने वाले फणीश्वर नाथ रेणु के सबसे लोकप्रिय कथा संग्रह ‘ठुमरी’ में यूं तो इस नाम की कोई कहानी नहीं है, परंतु सभी कहानियां मानो स्वरों की संगति से किसी राग का निर्माण करती हैं। इसी संग्रह की पहली कहानी है ‘रसप्रिया’, जो कि लोकराग और प्रेम के सौंदर्य की असाधारण गाथा है। आइए, इस कहानी को सुनते है और इसके बारे में विस्तार से जानते हैं। "

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पंचलाईट

3 . पंचलाईट

"यह कहानी बिहार के ग्रामीण परिवेश के इर्द गिर्द घूमती है। गाँव के एक युवक गोधन का मुनरी नामक लड़की से प्रेम है जिससे नाराज़ होकर पंचायत ने उसका बहिष्कार कर रखा है। एक दिन मेले से गाँव वाले सार्वजनिक उपयोग के लिये पंचलाइट खरीद कर लाते हैं। सभी उत्साह में हैं लेकिन तभी पता चलता है कि इसे जलाना तो किसी को आता ही नहीं। गाँववालों के भोलापन और पेट्रोमैक्स जलाना न आने के कारण हास्य की स्थिति पैदा होती है। दूसरे गाँव के लोग उपहास करने लगते है। तब मुनरी अपनी सहेली के माध्यम से पंचों से कहलवाती है कि गोधन को आता है, पंचलाइट जलाना। पंच लोग दूसरे गाँव से पंचलाइट जलाने के लिये किसी को बुलाने की बेइज्ज़ती से बचने के लिये अंततः गोधन को माफ कर देते हैं और उसका हुक्का-पानी बहाल कर दिया जाता है। और उसे सनीमा का गाना गाने की छूट भी मिल जाती है।"

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नित्य लीला

4 . नित्य लीला

"रेणु इस कहानी में किसन और उसके माता-पिता को एक साधारण परिवार के रूप में व्यक्त करते हुए लौकिक और अलौकिक भेद को मिटाने का प्रयास करते हैं। हिंदी ही नहीं विश्व साहित्य में कृष्ण की लीलाओं का कोई तोड़ नहीं है। इसलिए उन्हें लीलाधारी कहा जाता है। सबसे बड़ी बात यह है कि उनकी लीलाओं की भूमिका भी उनके द्वारा ही बनाई जाती है। बाल लीला से लेकर युद्ध के मैदान तक लीला ही लीला है। सूरदास ने जो कृष्ण के बारे में लिखा है उससे गुजरे बिना कृष्ण पर लिखा कुछ भी पूरा नहीं होता। रेणु ने भी कहानी का आधार वहीं से लिया है।"

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लालपान की बेगम

5 . लालपान की बेगम

"‘लाल पान बाग की बेगम’ कहानी हिंदी के प्रसिद्ध साहित्यकार लेखक ‘फणीश्वर नाथ रेणु’ द्वारा लिखी गई है। कहानी में रेणु ने ग्रामीण समाज में आत्मीयता का चित्रण किया है। इस कहानी की मुख्य पात्र बिरजू की माँ है। वह अभाव में भी स्वाभिमान के साथ जीने की इच्छा रखती है। इस कहानी के माध्यम से रेणु ने ग्रामीण समाज में नाच देखने जैसी स्वाभाविक इच्छाओं को केन्द्रित किया है किन्तु बैलगाड़ी की व्यवस्था न हो पाने के कारण उसके प्रति खीझ भी व्यक्त करवाया है, जिसको रेणु ग्रामीण समाज के सन्दर्भ में एक व्यंग्य की तरह उभारते है।"

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ठेस

6 . ठेस

"ठेस' फणीश्वर नाथ रेणु द्वारा रचित एक बहुचर्चित कहानी है इस कहानी में उन्होंने एक कलाकार पात्र की कोमल भावनाओं का मार्मिक चित्रण किया है 'ठेस' कहानी की तात्विक समीक्षा कथानक, पात्र, संवाद, देशकाल, भाषा और उद्देश्य तत्त्वों के आधार पर की जा सकती है।"

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13 min 51 sec

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सिरपंचमी का शगुन

7 . सिरपंचमी का शगुन

"ठुमरी' की कहानियाँ जीवन की सहज लय को मोहक सुरों में बाँधने का कलात्मक प्रयास हैं। इनमें पीड़ा और अवसाद की अनुगूँजें हैं, आनंद और उल्लास के मुखरित कलरव-गान हैं। तो चलिए दोस्तों सुनते हैं, रेणु जी की अतिचर्चित कहानियाँ संगृहीत में से एक और कहानी जिसका नाम हैं 'सिरपंचमी का शगुन'।"

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39 min 57 sec

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