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उर्दूनामा

उर्दूनामा

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2hr 51m

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Urdu

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'उर्दूनामा', एक ऐसा शो जहां हम आपको उर्दू भाषा के कुछ बेहद खूबसूरत शब्दों से रूबरू करवाएंगे। ये शब्द अलग-अलग शायरों और कवियों द्वारा बहुत बार ग़ज़लों, नग्मों, शायरियों और गानों में इस्तेमाल किये जा चुके हैं, लेकिन अब तक शायद आप इनके असल मायनों से अपरिचित हैं। तो उर्दू के इन खूबसूरत शब्दों को समझने के लिए, अपने पसंदीदा शायरों और कवियों के बारे में करीब से जानने के लिए और उर्दू से थोड़ा और जुड़ने के लिए सुनिए हमारा ये शो 'उर्दूनामा'।

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साहिर: रिश्तों की ‘तल्खियों’ को ‘खूबसूरत मोड़’ पर छोड़ने के कायल

1 - साहिर: रिश्तों की ‘तल्खियों’ को ‘खूबसूरत मोड़’ पर छोड़ने के कायल

18 min 03 sec

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उर्दू के ये आशार हम से कह रहे है: ‘आस’ है तो सुकून पास है

2 - उर्दू के ये आशार हम से कह रहे है: ‘आस’ है तो सुकून पास है

12 min 28 sec

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अर्ज़ियाँ

3 - अर्ज़ियाँ

14 min 01 sec

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द मैजिक ऑफ डॉन: 'सहार' और 'सेहर' उर्दू कविता में

4 - द मैजिक ऑफ डॉन: 'सहार' और 'सेहर' उर्दू कविता में

15 min 35 sec

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फैज़ अहमद फैज़

5 - फैज़ अहमद फैज़

17 min 21 sec

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बाज़ी

6 - बाज़ी

09 min 06 sec

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नूरजहां

7 - नूरजहां

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कैफ़ी आज़मी

8 - कैफ़ी आज़मी

14 min 25 sec

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दास्ताँ-ए-राम

9 - दास्ताँ-ए-राम

15 min 03 sec

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इंतिखाब

10 - इंतिखाब

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उर्दूनामा

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'उर्दूनामा', एक ऐसा शो जहां हम आपको उर्दू भाषा के कुछ बेहद खूबसूरत शब्दों से रूबरू करवाएंगे। ये शब्द अलग-अलग शायरों और कवियों द्वारा बहुत बार ग़ज़लों, नग्मों, शायरियों और गानों में इस्तेमाल किये जा चुके हैं, लेकिन अब तक शायद आप इनके असल मायनों से अपरिचित हैं। तो उर्दू के इन खूबसूरत शब्दों को समझने के लिए, अपने पसंदीदा शायरों और कवियों के बारे में करीब से जानने के लिए और उर्दू से थोड़ा और जुड़ने के लिए सुनिए हमारा ये शो 'उर्दूनामा'।

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साहिर: रिश्तों की ‘तल्खियों’ को ‘खूबसूरत मोड़’ पर छोड़ने के कायल

1 . साहिर: रिश्तों की ‘तल्खियों’ को ‘खूबसूरत मोड़’ पर छोड़ने के कायल

"साढ़े पांच फुट का कद, जो किसी तरह सीधा किया जा सके तो छह फुट का हो जाए, लंबी -लंबी लचकीली टांगें, पतली सी कमर, चौड़ा सीना,चेहरे पर चेचक के दाग, सरकश नाक, खूबसूरत आंखें, आंखों से झींपा-झींपा सा तफक्कुर, बड़े-बड़े बाल, जिस्म पर कमीज़, मुड़ी हुई पतलून और हाथ में सिगरेट का टिन'। कुछ ऐसे हैं हमारे साहिर लुधियानवी साहब। साहिर के खयालात भी इस तरह के हैं जो हर दौर में पढ़े जाने चाहिए। चाहे उनकी नज्म 'परछाइयां' हो या हो 'ताज महल'। चाहे चित्रलेखा का गाना 'मन रे तू काहे न धीर धरे' हो या प्यासा फिल्म का 'तंग आ चुके हैं कश्मकश-ए-जिंदगी से हम' गाना हो। साहिर मुश्किल जज्बात को आसानी से बयान कर देते हैं। आज इस पॉडकास्ट में, सुनिए साहिर के ऐसे ही कुछ खयालातों के बारे में। "

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उर्दू के ये आशार हम से कह रहे है: ‘आस’ है तो सुकून पास है

2 . उर्दू के ये आशार हम से कह रहे है: ‘आस’ है तो सुकून पास है

"हम जिंदगी से रोज़ाना जो आस लगाते हैं, वो तब टूटने लगती है जब हमारे हालात हमारे काबू में नहीं रहते या जब हम खुद को ऐसे हालात की जद में महसूस करते हैं, जैसे आजकल के माहौल में कर रहे हैं। इस वक्त हम एक मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं, जिसमें हो सकता है कि अपने वर्तमान और भविष्य को लेकर आप घबराहट महसूस कर रहे हों। ऐसे में जरूरी है कि उम्मीद और हौसले का दामन कस के थाम लें। वैसे भी, इंसान के पास सिर्फ एक ही दिल, एक दिमाग और एक ही जिंदगी होती है। इसी जिंदगी के बारे में उर्दू के शायरों ने अलग-अलग तरह से लिखा है और हमसे अपनी शायरी के ज़रिये ये बार-बार कहा है कि जिंदगी आसान बिलकुल नहीं है, लेकिन इतनी मुश्किल भी नहीं है जितनी हम इसे बना लेते हैं।"

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12 min 28 sec

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अर्ज़ियाँ

3 . अर्ज़ियाँ

"‘अर्जी’ मतलब ‘आवेदन’ या एक ‘मांग'। ‘अर्जियां’ शब्द सूफी कविताओं में अल्लाह के नज़दीकी एहसास को महसूस करने के लिए लिया जाता था। लेकिन सवाल यह है जब अल्लाह हर जगह हैं, तो हमें अर्जियों की क्या जरूरत है? उर्दूनामा के इस एपिसोड में यही समझने की कोशिश की गई है कि क्या अर्जियां अल्लाह तक पहुंचाती हैं या इसके लिए किसी गुरु की जरूरत होती है। इस बार पॉडकास्ट में हमारे साथ हैं प्रोफेसर अब्दुल बिस्मिल्लाह, जो बताएंगे कि अर्जियों की सूफी परंपरा में कोई जगह नहीं है। दरअसल गुरु ही भगवान और इंसान के बीच पुल का काम करते हैं। साथ में सुनिए सूफी गायक ध्रुव सांगरी बिलाल चिश्ती को, जो बताएंगे कि क्यों ‘अर्जियां’ उनके लिए पवित्र शब्द है। "

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द मैजिक ऑफ डॉन: 'सहार' और 'सेहर' उर्दू कविता में

4 . द मैजिक ऑफ डॉन: 'सहार' और 'सेहर' उर्दू कविता में

अधिकांश भाषाओं में, ऐसे भ्रामक शब्द हैं जिनका उच्चारण समान है लेकिन अर्थ और वर्तनी दोनों में भिन्न हैं। इसलिए यदि आप उर्दू के कुछ समलैंगिकों पर ठोकर खाते हैं, जो आपको अपना सिर खुजलाते हैं, तो और न कहें। हमने आपको कवर किया है। उरदुनमा के इस एपिसोड में, द क्विंट के फेबाहा सैयद ने लगभग समान ध्वनि वाले शब्दों के मामले की व्याख्या की - 'सहारा' जिसका अर्थ है 'भोर', और 'सेहर' का अर्थ है 'जादू'। इसके अलावा इस पॉडकास्ट में एक पत्रकार और कवि नोमान शौक भी हैं जो न केवल हमारे साथ उर्दू शायरी के कुछ रत्नों को साझा करते हैं बल्कि हमें यह भी बताते हैं कि फैज़ अहमद फ़ैज़ ने अपनी कविता रकीब से के लिए "तु साहिर आंखें" किसने लिखी थी।

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15 min 35 sec

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फैज़ अहमद फैज़

5 . फैज़ अहमद फैज़

"इस एपिसोड में हम बात करेंगे मशहूर पंजाबी कवी फैज़ अहमद फैज़ की सबसे विवादित नज़्म 'हम देखेंगे' के बारे में। इस नज़्म में फैज़ ने केवल 'शाश्वत सत्य' को महत्व देते हुए अपनी बात रखने की कोशिश की है। लेकिन अफ़सोस है कि हर कोई यह समझ नहीं पाया है। इसलिए आज हम आपको इस नज़्म की हर एक पंक्ति का अर्थ समझाएंगे। "

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बाज़ी

6 . बाज़ी

"बाज़ी' एक ऐसा शब्द जो बॉलीवुड के गानों में और अन्य नग्मों, शायरियों और कई फ़िल्मी डायलॉग्स में अक्सर सुनाई देता है। आज उर्दूनामा में हम इसी शब्द के अलग- अलग मायनो को समझने की कोशिश करेंगे। साथ ही, यह भी देखेंगे की इस शब्द के साथ कौनसे दूसरे शब्द जोड़ कर एक नया शब्द बन सकता है। "

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नूरजहां

7 . नूरजहां

" नूरजहां उर्दू और हिन्दी फिल्म की सुप्रसिद्ध गायिका और अभिनेत्री थीं जिन्होंने अपनी दिलकश आवाज़ और अभिनय से लगभग चार दशक तक श्रोताओं के दिल पर अपनी अमिट छाप छोड़ी। आज हम उनके सफर को याद करते हुए एक ऐसे दौर के बारे में चर्चा करेंगे जिनके बारे में आपने शायद अपनी दादी-नानी से सूना होगा। साथ ही, एक ख़ास चर्चा होगी नूरजहां और उनकी सबसे ख़ास सहेली लता मंगेशकर के रिश्ते के बारे में। "

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कैफ़ी आज़मी

8 . कैफ़ी आज़मी

"अगर ग़ज़ल का गुलिस्तां होगा तो कैफ़ी आज़मी के बगीचे से हर फूल की ख़ुशबू आएगी। वह उन चुनिंदा शायरों में से हैं जिन्होंने रूमानियत के साथ-साथ समाज को भी अपने अशआरों में लिखा। उनके लफ़्ज़ बेहद आसानी से समझ आ कर दिल में उतर जाते हैं। उन्होंने वही कहा जिससे लोगों के ज़हन को आवाज़ मिल सके। आइये आज आप और हम मिलकर कैफ़ी आज़मी को श्रद्धांजलि दे। "

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दास्ताँ-ए-राम

9 . दास्ताँ-ए-राम

"अल्लामा इकबाल की कविता 'राम' में इकबाल ने कहा है कि राम एक ऐसे विश्वसनीय लीडर हैं जो सभी को आध्यात्मिक सफलता के मार्ग पर ले जाते हैं। वह भगवान राम को ‘इमाम-ए-हिंद’ यानी पूरे हिंदुस्तान का लीडर मानते हैं। उरदुनमा के इस विशेष एपिसोड में, जामिया मिलिया इस्लामिया में रेडियो सिखाने वाले प्रोफेसर दानिश इकबाल ने हमारी होस्ट फबेहा सैयद से शेयर किया कि 'दास्तान-ए-राम' लिखने के लिए उन्हें प्रेरणा कहाँ से मिली और और यह उर्दू में लिखी अन्य रामलीला से अलग कैसे है।"

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इंतिखाब

10 . इंतिखाब

"इंतिखाब का मतलब होता है चुनाव या चयन। उर्दू के कई शायरों ने अपने इंतिखाब के बारे में लिखा है। इस इंतिखाब का सामना उन्हें कठोर विकल्पों के चलते करना पड़ा। खासकर तब, जब उन्होंने किसी को अपनी यादों में गहराई तक समेट रखा हो। उर्दूनामा के इस एपिसोड में फाबेहा न सिर्फ इस अशर का मतलब समझाती हैं, बल्कि व्यक्तिगत से राजनीतिक तक की पृष्ठभूमि में शायरों द्वारा इस्तेमाल किए गए इंतिख़ाब शब्द को समझाती हैं। "

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