चिट्ठियाँ - कुछ ज़रूरी ख़त (सीजन 2)
Duration
1hr 13m
Language
Urdu
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Category
Urdu Shows
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1 - सफ़िया अख़्तर का ख़त जाँनिसार के नाम
07 min 45 sec
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2 - सफ़िया अख़्तर के ख़ुतूत जाँ निसार अख़्तर के नाम
07 min 46 sec
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3 - प्रेमचंद जी का ख़त सज्जाद ज़हीर के नाम
05 min 59 sec
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4 - निशातुन्निसा का ख़त हसरत मोहानी के नाम
06 min 35 sec
1
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5 - जवाहर लाल नेहरू को सरोजिनी नायडू का ख़त
06 min 49 sec
3
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6 - ग़ालिब का ख़त
08 min 00 sec
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7 - महात्मा गांधी जी का लिखा उर्दू ख़त
06 min 18 sec
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8 - फ़ुर्क़त काकोरवी का ख़त
09 min 48 sec
1
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9 - डॉ. दरख़्शाँ ताजवर के लिए ख़त
06 min 08 sec
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10 - बहादुर शाह ज़फर का ख़त
08 min 02 sec
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चिट्ठियाँ - कुछ ज़रूरी ख़त (सीजन 2)
About Show
| Episodes | Duration | |||
1 . सफ़िया अख़्तर का ख़त जाँनिसार के नाम"दोस्तों, इस एपिसोड में हम सुनेगें, सफ़िया अख़्तर जी का लिखा एक उर्दू ख़त जाँनिसार अख्तर जी के नाम का। उस ज़माने में जब औरतों के लिए घर से बाहर जाकर काम करना बहुत आम बात नहीं थी, वे स्कूल में अपनी नौकरी करती रहीं और न सिर्फ़ अपनी और अपने बच्चों, बल्कि मुम्बई की फ़िल्म इंडस्ट्री में अपनी ज़मीन तलाश रहे जाँ निसार साहब के लिए भी सम्बल जुटाती रहीं। उस दौरान उन्होंने प्यार और हौसलों से भरा ख़त अपने शौहर यानी जाँनिसार जी के लिए लिखा था। तो चलिए सुनते हैं , वही ख़त इस एपिसोड में।" More | 07 min 45 sec | |||
2 . सफ़िया अख़्तर के ख़ुतूत जाँ निसार अख़्तर के नाम"दोस्तों, इस एपिसोड में हम सुनेगें, सफ़िया अख़्तर के ख़ुतूत जाँ निसार अख़्तर के नाम किताब से एक ख़त। सफ़िया उर्दू के प्रसिद्धतम शायर मजाज़ की बहन थी। जाँनिसार और सफ़िया अक्सर एक दूसरे को ख़त लिखा करते थे। उन्हीं खतों में से इस ख़त में उन्होंने मजाज़ का जिक्र किया है उनकी दिमाग़ी हालत के बारे में बताते हुए। इस में झलकता है एक बहन का उसके भाई के लिए फ़िक्र। तो चलिए सुनते हैं , वही ख़त इस एपिसोड में।" More | 07 min 46 sec | |||
3 . प्रेमचंद जी का ख़त सज्जाद ज़हीर के नाम"दोस्तों, इस एपिसोड में हम सुनेगें, दोस्तों, इस एपिसोड में हम सुनेगें, प्रेमचंद जी द्वारा लिखा ख़त सज्जाद ज़हीर के नाम। जिसमें प्रगतिशील लेखक संघ की बातें हो रही हैं।तो चलिए सुनते हैं , वही ख़त इस एपिसोड में।" More | 05 min 59 sec | |||
4 . निशातुन्निसा का ख़त हसरत मोहानी के नाम"दोस्तों, इस एपिसोड में हम सुनेगें, निशातुन्निसा का ख़त हसरत मोहानी जी के नाम का। पहली बार जब हसरत मोहानी जेल जा रहे थे तब उनके घर में एक बच्ची थी और एक बीवी, तब आजादी की धुन में रमे हसरत मोहानी को अंग्रेज खींचकर जेल ले जाने लगे तब उनकी बच्ची बुखार से भुन रही थी। उनकी पत्नी निशातुन्निसा के लिए यह सब बिल्कुल नया था। हसरत मोहानी निशातुन्निसा से मिलकर वे जेल की तरफ चल दिए मगर वह बेहद परेशान भी थे कि अब उनके घर की जरूरतें कैसे पूरी होंगी । उस दौरान निशातुन्निसा ने हसरत मोहानी जी के लिए यह खत लिखा था। " More | 06 min 35 sec | |||
5 . जवाहर लाल नेहरू को सरोजिनी नायडू का ख़तदोस्तों, इस एपिसोड में हम सुनेगें, जवाहर लाल नेहरू को सरोजिनी नायडू का लिखा ख़त। इस एपिसोड में दोस्तों सुनते हैं , क्या लिखा था सरोजिनी नायडू जी ने जवाहर लाल नेहरू जी के लिए ख़त में । More | 06 min 49 sec | |||
6 . ग़ालिब का ख़त"दोस्तों, इस एपिसोड में हम सुनेगें, ग़ालिब का ख़त वह अक्सर अपने शेर और खत, फ़ारसी में लिखा करते थे लेकिन उन्होंने कुछ हिंदी ख़त भी लिखे थे। उन्हीं चंद खतों को हम आपको सुनाएंगे। मिर्ज़ा असदुल्ला बेग ‘ग़ालिब' का अन्दाज़े बयां और था, चाहे उनके लिखे पत्र ही क्यों न हों। तो चलिए सुनते हैं , वही ख़त इस एपिसोड में।" More | 08 min 00 sec | |||
7 . महात्मा गांधी जी का लिखा उर्दू ख़त"दोस्तों, इस एपिसोड में हम सुनेगें, महात्मा गांधी जी का लिखा उर्दू भाषा में एक ख़त। गांधी जी के कुछ उर्दू खत शिब्ली एकेडमी आजमगढ़ में आज भी रखें हुए है। आज हम जिस खत का जिक्र कर रहें हैं , वो उर्दू पत्र साल 1930 में लिखा गया था, उस दौरान 26 और 27 फरवरी को दिल्ली में आयोजित हिंदुस्तानी प्रचार सभा की बैठक में मौलाना सलमान नदवी देवी को लिखा गया था जिसमें मौलाना से बैठक में आने की विनती की थी।" More | 06 min 18 sec | |||
8 . फ़ुर्क़त काकोरवी का ख़त"दोस्तों, इस एपिसोड में हम सुनेगें, मिर्ज़ा ग़ालिब का खत पंडित नेहरू के नाम - फ़ुर्क़त काकोरवी। दोस्तों , कई दफ़ा ऐसा होता है कि दो लोग एक दूसरे को ख़त लिखते है तो कई बार ऐसा भी होता हैं कि अगर वो होते तो ऐसा कुछ लिखते इनके लिए यह सोच कर लिखें जाने वाले ख़त। ऐसा ही एक ख़त फ़ुर्क़त काकोरवी साहब ने लिखा है। तो चलिए सुनते है। " More | 09 min 48 sec | |||
9 . डॉ. दरख़्शाँ ताजवर के लिए ख़त"दोस्तों, इस एपिसोड में हम सुनेगें, डॉ. दरख़्शाँ ताजवर के बारे में जिन्होंने बहुत सारे कार्यक्रम किये, जिस के द्वारा उन्होंने मुस्लिम महिलाओं को प्रेरित किया और कुछ किताबें भी उन्होंने समाज में अच्छा बदलाव लाने के लिए लिखीं। इस पर उनके लेख को पसंद करने वालों ने उन्हें कई ख़त लिखे हैं। उन्हीं में से एक ख़त हम आपको इस एपिसोड में सुनाने जा रहें हैं , तो चलिए सुनते हैं। " More | 06 min 08 sec | |||
10 . बहादुर शाह ज़फर का ख़त"दोस्तों, इस एपिसोड में हम सुनेगें, बहादुर शाह ज़फर भारत में मुग़ल साम्राज्य के आखिरी शहंशाह, और उर्दू के जानेे-माने शायर का ख़त। यह ख़त उस दौर का है जब बाप और बेटी दोनों जेल में थे। बाप रंगून में था तो बेटी दिल्ली में। सख्त नज़रबंदी के बावजूद भी उस बेटी ने पिता को एक खत भेजा, जिसमें अपने परिवार एवं देश की स्थिति का वर्णन हुआ है। खत पढ़कर पिता की आँखें भीग गई। उस कैदी बाप को पुत्री का खत एक आँसूनामा ही लगा। तो चलिए सुनते हैं , वही ख़त इस एपिसोड में।" More | 08 min 02 sec |
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