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अदा जाफ़री की नज़्में

अदा जाफ़री की नज़्में

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0hr 54m

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Urdu

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दोस्तों, इस शो में हम जिक्र करेंगे, अदा जाफ़री जी की नज्मों का। अदा जी को उर्दू शायरी की ख़ातून अव़्वल कहा जाता है। उन्होंने अपने बाद आने वाली शायरात किश्वर नाहीद, परवीन शाकिर और फ़हमीदा रियाज़ वग़ैरह के लिए, शायरी का वो रास्ता हमवार किया, जिस पर चल कर उन लोगों ने उर्दू में ख़वातीन की शायरी को दुनिया में अपना लोहा मनवाया। तो चलिए दोस्तों, करते हैं उन्हें याद, जानते हैं कुछ उनसे जुड़ी कुछ बातें।

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न ग़ुबार में न गुलाब में मुझे देखना

1 - न ग़ुबार में न गुलाब में मुझे देखना

06 min 22 sec

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तुम जो सियाने हो, गुन वाले हो

2 - तुम जो सियाने हो, गुन वाले हो

05 min 50 sec

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शादीशुदा जिंदगी

3 - शादीशुदा जिंदगी

04 min 51 sec

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शौहर के इंतकाल के बाद की जिंदगी

4 - शौहर के इंतकाल के बाद की जिंदगी

05 min 13 sec

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दीप था या तारा क्या जाने ?

5 - दीप था या तारा क्या जाने ?

06 min 12 sec

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संघर्ष

6 - संघर्ष

04 min 36 sec

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पुरस्कार

7 - पुरस्कार

04 min 58 sec

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इज्ज़त और पहचान

8 - इज्ज़त और पहचान

04 min 54 sec

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नारीवाद विचार

9 - नारीवाद विचार

05 min 34 sec

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अदा जी से जुड़ी कुछ यादें

10 - अदा जी से जुड़ी कुछ यादें

06 min 10 sec

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अदा जाफ़री की नज़्में

Stories|Urdu|10 Episodes
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दोस्तों, इस शो में हम जिक्र करेंगे, अदा जाफ़री जी की नज्मों का। अदा जी को उर्दू शायरी की ख़ातून अव़्वल कहा जाता है। उन्होंने अपने बाद आने वाली शायरात किश्वर नाहीद, परवीन शाकिर और फ़हमीदा रियाज़ वग़ैरह के लिए, शायरी का वो रास्ता हमवार किया, जिस पर चल कर उन लोगों ने उर्दू में ख़वातीन की शायरी को दुनिया में अपना लोहा मनवाया। तो चलिए दोस्तों, करते हैं उन्हें याद, जानते हैं कुछ उनसे जुड़ी कुछ बातें।

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न ग़ुबार में न गुलाब में मुझे देखना

1 . न ग़ुबार में न गुलाब में मुझे देखना

इस एपिसोड में हम सुनेंगे अदा जी के बारे में कुछ बातें। उन्होंने अपनी शायरी की शुरुआत 13 वर्ष की उम्र से कर दी थी। आपका जन्म बदायूँ में 22 अगस्त 1924 को हुआ, पहले आपने अपना तखल्लुस ''अदा बदायुनी'' रखा, बाद में नरुल हसन जाफरी के शादी के बाद, आपने अपना तखल्लुस ''अदा जाफरी'' कर दिया। इसी के साथ हम सुनेंगे उनकी एक बेहद खूबसूरत नज्म " न ग़ुबार में, न गुलाब में मुझे देखना "।

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06 min 22 sec

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तुम जो सियाने हो, गुन वाले हो

2 . तुम जो सियाने हो, गुन वाले हो

अदा जाफ़री की नज़्में मुहब्बत को उलझनों से दूर फितरत समझती हैं। वो उसे ज़्यादा से ज़्यादा लोगों के दरमियान अमली बनाने की कोशिश करती हैं। तो चलिए सुनते हैं, उनकी ही एक नज़्म " तुम जो सियाने हो, गुन वाले हो " जो इश्क को ज़िन्दगी का सार समझती हैं। तो सुनते हैं, अदा जाफरी की बदलते दौर में भी इश्क की शमां जलाए रखने वाली नज़्म।

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शादीशुदा जिंदगी

3 . शादीशुदा जिंदगी

इस एपिसोड में हम सुनेंगे, अदा जी के ज़िंदगी के कुछ पहलुओं के बारे में जैसे की उनका पाकिस्तान जाना, उनकी शादी और उनके नाम के आगे जाफरी नाम जुड़ने का किस्सा। सुनिए यह एपिसोड

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04 min 51 sec

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शौहर के इंतकाल के बाद की जिंदगी

4 . शौहर के इंतकाल के बाद की जिंदगी

इस एपिसोड में हम सुनेंगे, अदा जी के ज़िंदगी के कुछ और पहलुओं के बारे में। अदा जाफरी अपने शौहर को अपनी सबसे बड़ी ताक़त मानती थीं। उनके पति का इंतकाल 3 दिसंबर 1995 को हुआ। इसके के बाद वो टोरंटो चली गयीं। उन्होंने उर्दू को बढ़ावा देने में एक अहम किरदार निभाया और इसके लिये, वे अक्सर कराची और टोरंटो के बीच लगातार सफर करती थी।

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दीप था या तारा क्या जाने ?

5 . दीप था या तारा क्या जाने ?

दोस्तों, इस एपिसोड में सुनेंगे अदा जी जिंदगी से जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें और जिक्र करेंगे उनके शौहर और उनकी मां का, जिन्होंने उन्हें सहारा दिया और सुनेंगे उनकी कुछ नज़्म जैसे "दीप था या तारा क्या जाने"।

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06 min 12 sec

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संघर्ष

6 . संघर्ष

दोस्तों, इस एपिसोड में हम जिक्र करेंगे अदा जी के संघर्ष के बारे में, जानेंगे किस तरह उन्होंने ढेर सारी मेहनत करके एक अपना मुकाम हासिल किया और साथ ही साथ सुनेंगे उनकी लिखीं कुछ नज्में।

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04 min 36 sec

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पुरस्कार

7 . पुरस्कार

दोस्तों, इस एपिसोड में हम जिक्र करेंगे अदा जी के इतने मेहनत के बाद मिले हुए अवॉर्ड्स का, जानेंगे उनको उनके कलम और खयालों के बुनियाद पर कहाँ कहाँ पहचान मिली। साथ ही साथ, सुनेंगे उनकी लिखी कुछ नज्में।

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04 min 58 sec

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इज्ज़त और पहचान

8 . इज्ज़त और पहचान

दोस्तों, इस एपिसोड में हम अदा जी को मिले अवॉर्ड्स के सिलसिले को आगे बढ़ाएंगे। साथ ही साथ सुनेंगे उनकी लिखीं कुछ नज्में।

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04 min 54 sec

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नारीवाद विचार

9 . नारीवाद विचार

इस एपिसोड में हम अदा जाफरी की सोच का जिक्र करेंगे। अदा जी नारीवाद की समर्थक थी और ये ख़याल उनके कुछ कामों में भी झलकते हैं। उन्होंनें कुछ इस प्रकार अपनी सोच व्यक्त कि है - ''मैंने मर्दों की आइद करदा पाबंदीयों को क़बूल नहीं किया, बल्कि उन पाबंदीयों को क़बूल किया जो मेरे ज़हन ने मुझपे आइद की हैं।''

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05 min 34 sec

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अदा जी से जुड़ी कुछ यादें

10 . अदा जी से जुड़ी कुछ यादें

दोस्तों, इस एपिसोड में हम सुनेंगे अदा जी के बारे में कुछ दिलचस्प बातें। सुनेंगे क्या कहना हैं, उन लोगों को जो अदा जी को जानते हैं और साथ ही साथ सुनेंगे उनकी लिखीं कुछ नज्में।

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06 min 10 sec

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