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2nd इनिंग - कुछ अधूरे एहसास

2nd इनिंग - कुछ अधूरे एहसास

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0hr 57m

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Hindi

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Stories

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बचपन में माँ बाप अपने बच्चों को पढ़ा लिखाकर उनकी ज़िन्दगी सँवारने की चाह में उन्हें हॉस्टल भेजते हैं, लेकिन वही बच्चे जब पढ़ लिख कर बड़े हो जाते हैं, तो वो अपने माँ बाप को उम्र के उस पड़ाव में "ओल्ड एज़ होल्म" यानी वृद्धाश्रम भेज देते हैं, जब उन्हें उन बच्चों की सबसे ज्यादा ज़रूरत होती है। बुढ़ापे में माँ-बाप को अपने बच्चों के प्यार, साथ और सम्मान की बहुत ज़रूरत होती है, लेकिन कुछ बच्चे इस बात को बिल्कुल नहीं समझते हैं। हमारे इस शो से उन सभी बच्चों को एक बहुत बड़ी सीख मिलेगी जो अपने माँ-बाप को बोझ समझते हैं। तो सुनिएगा ज़रूर।

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एहसास

1 - एहसास

09 min 58 sec

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शाश्वत- ओल्ड एज़ होम

2 - शाश्वत- ओल्ड एज़ होम

06 min 20 sec

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योगा क्लासेस

3 - योगा क्लासेस

10 min 49 sec

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बुढ़ापा: खुशियों की चाबी

4 - बुढ़ापा: खुशियों की चाबी

07 min 13 sec

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शेखर का फ़ोन

5 - शेखर का फ़ोन

03 min 31 sec

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सरला: दोस्त या दवा

6 - सरला: दोस्त या दवा

04 min 02 sec

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बदलती आदत

7 - बदलती आदत

04 min 35 sec

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राजमा चावल

8 - राजमा चावल

03 min 14 sec

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लिटल लेट, बट मे बी

9 - लिटल लेट, बट मे बी

03 min 39 sec

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शादी मुबारक

10 - शादी मुबारक

04 min 16 sec

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2nd इनिंग - कुछ अधूरे एहसास

Stories|Hindi|10 Episodes
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बचपन में माँ बाप अपने बच्चों को पढ़ा लिखाकर उनकी ज़िन्दगी सँवारने की चाह में उन्हें हॉस्टल भेजते हैं, लेकिन वही बच्चे जब पढ़ लिख कर बड़े हो जाते हैं, तो वो अपने माँ बाप को उम्र के उस पड़ाव में "ओल्ड एज़ होल्म" यानी वृद्धाश्रम भेज देते हैं, जब उन्हें उन बच्चों की सबसे ज्यादा ज़रूरत होती है। बुढ़ापे में माँ-बाप को अपने बच्चों के प्यार, साथ और सम्मान की बहुत ज़रूरत होती है, लेकिन कुछ बच्चे इस बात को बिल्कुल नहीं समझते हैं। हमारे इस शो से उन सभी बच्चों को एक बहुत बड़ी सीख मिलेगी जो अपने माँ-बाप को बोझ समझते हैं। तो सुनिएगा ज़रूर।

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एहसास

1 . एहसास

अपने दादा-दादी की गोदी में सिर रखकर उनके साथ अपने दुःख-सुख की बातें करना सबको अच्छा लगता है, लेकिन जब दादा-दादी उनकी ज़िन्दगी की दुःख-सुख की बातें आपसे करे, तो उससे अनमोल चीज़ दुनिया में और कोई नहीं। एक ऐसा ही अनमोल अनुभव होगा आपको इस एपिसोड में जब एक पोता अपने दादा-दादी की उनकी दुःख-सुख की बातें करेगा।

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09 min 58 sec

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शाश्वत- ओल्ड एज़ होम

2 . शाश्वत- ओल्ड एज़ होम

चाहे कितनी भी मुश्किलें आए, माँ-बाप कभी भी अपने बच्चे को बोझ की नज़र से नहीं देखते। तो बच्चे क्यों बड़े होने के बाद अपने माँ-बाप को बोझ समझकर उन्हें उनके ही घर से बेघर कर देते हैं? क्या आपके पास इस बात का जवाब है?

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06 min 20 sec

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योगा क्लासेस

3 . योगा क्लासेस

शाश्वत ओल्ड एज होम दादाजी के लिए अपने घर से ज़्यादा अपना लगने लगा था। सुबह के योगा क्लासेस में जाने के लिए तो दादाजी बेसब्री से इंतज़ार किया करते थे। क्या थी इसकी वजह, चलिए इस एपिसोड में आपको बताते हैं।

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10 min 49 sec

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बुढ़ापा: खुशियों की चाबी

4 . बुढ़ापा: खुशियों की चाबी

बचपन और बुढ़ापा इंसान की ज़िन्दगी के दो ऐसे चरण है जिनमें उन्हें सबसे ज़्यादा खुशियों की ज़रूरत होती है। इसलिए उन्हें इन दोनों चरण में ज़्यादा से ज़्यादा खुशियां देनी चाहिए। खासकर अपने बूढ़े माँ-बाप को एक बच्चे की लाड-प्यार कर उनका ख़याल रखिए।

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07 min 13 sec

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शेखर का फ़ोन

5 . शेखर का फ़ोन

दादाजी काफी समय बाद बहुत खुश नज़र आ रहे थे। मानो अब यह वृद्धाश्रम ही उनका सब कुछ बन चुका था। ख़ुशी-ख़ुशी अपने दोस्तों के साथ ज़िन्दगी बिता रहे थे। इसी बीच फिर से तूफ़ान के आने की खबर आनी थी। ये तूफ़ान शेखर के फ़ोन कॉल के रूप में आया। शेखर के फ़ोन कॉल ने फिर से दादाजी को अपने दर्द का एहसास कराया। आइये सुनते हैं शेखर ने उस फ़ोन कॉल में ऐसा क्या कहा।

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03 min 31 sec

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सरला: दोस्त या दवा

6 . सरला: दोस्त या दवा

अकेलापन और तन्हाई- ये दो चीज़ें आपको सही मायने में इस बात का एहसास कराती है कि आपको ज़िन्दगी में कौनसे रिश्तों की ज़रूरत है और किस तरह के इंसान की। यह एहसास अब दादाजी को भी हो रहा था। जिस रिश्ते और इंसान में वो अपनी ख़ुशी ढूँढ़ रहे थे, वह उनकी नई दोस्त सरला थी। सरला जी धीरे-धीरे उनकी ख़ुशी का कारण बनती जा रही थी। आइये सुनते किस तरह सरला जी दादाजी के लिए दोस्त और दवा, दोनों का काम कर रही थी।

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04 min 02 sec

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बदलती आदत

7 . बदलती आदत

अपनी योगा गुरु के साथ समय बिताना दादाजी की सबसे फेवरेट आदत बन चुकी थी। उनसे योगा सीखना हो या उनके साथ शेखर की बुराई करना, इन सब चीज़ों में दादाजी को मज़ा इसलिए आता था क्योंकि सरला जी भी इन सब बातों का हिस्सा थी। पर एक दिन अचानक से दादू को यह एहसास हुआ की कि उनकी यह आदत कहीं छूट ना जाए। जब एक दिन योगा करते हुए सरला जी की अचानक तबियत बिगड़ी और उन्हें हॉस्पिटल ले जाना पड़ा। आइये सुनते है आगे क्या हुआ।

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04 min 35 sec

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राजमा चावल

8 . राजमा चावल

कहीं ना कहीं सरला को देखते ही दादाजी के दिल में ज़िन्दगी को ख़ुशी से जीने की उम्मीद जागती थी। और तो और सरला जी भी दादाजी में अपनी ख़ुशी ढूंढती थी। उम्र के इस पड़ाव में दोनों ने एक दूसरे में एक साथी ढूंढ लिया था, इनके इस रिश्ते को कोई नाम नहीं दिया जा सकता, सिर्फ जिया जा सकता है। दादाजी की ये कहानी उनके पोते को किस तरह से प्रेरित करती है, आइये सुनते है आगे।

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03 min 14 sec

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लिटल लेट, बट मे बी

9 . लिटल लेट, बट मे बी

सरला के लिए दादाजी की फीलिंग्स बढ़ते-बढ़ते इतनी बढ़ चुकी थी कि वे अब पूरी तरह से तैयार थे, सरला को अपने दिल की बात बताने के लिए। पर वे नहीं जानते थे कि ये सब सुनने के बाद सरला कैसे रिएक्ट करेंगी, इसलिए थोड़ा घबरा रहे थे। लेकिन वो भी ठहरे सच्चे आशिक़, तो किसी तरह हिम्मत कर के सरला से कह ही दिया कि.......

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03 min 39 sec

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शादी मुबारक

10 . शादी मुबारक

दादाजी और सरला ने इस बात को साबित कर दिया की किसी को प्यार करने लिए उम्र नहीं दिल चाहिए। दोनों ने एक दूसरे के साथ अपनी खुशियां ढूंढ ली थी। और अंत में अपने इस रिश्ते को उन्होंने एक नाम भी दे ही दिया। दादाजी ने सरला से शादी कर ली और आश्रम में ही अपनी ज़िन्दगी की 2nd इनिंग्स खेलना शुरू कर दिया। आइये सुनते हैं यह चमत्कार हुआ कैसे।

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04 min 16 sec

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